h n

जानती हूं कि सरकार एक दिन या तो जेल में बंद करेगी या गोली मार देगी : सोनी सोरी

पैगासस प्रकरण में दलित-बहुजन विचारों को लेकर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों की जासूसी कराए जाने का मामला सामने आया है। फारवर्ड प्रेस ने सोनी सोरी, डिग्री प्रसाद चौहान, अशोक भारती और रूपेश कुमार सिंह व ईप्सा शताक्षी से दूरभाष पर बातचीत की

“मैं जानती हूं कि मैं जो बस्तर में अपने लोगों के हक-हुकूक के लिए कर रही हूं, इसके लिए सरकार हमें जेल भी भेज सकती है और चाहे तो गोली भी मार सकती है। जासूसी कराने के पीछे उनका मकसद यही रहा होगा कि सोनी सोरी के खिलाफ कुछ सबूत मिल जाय ताकि उसके आधार पर उसे जेल भेजा जाय और अंतत: उसे काम करने से रोका जाय। और क्या कारण हो सकता है मेरी जासूसी का?” ये बातें फारवर्ड प्रेस से दूरभाष पर बातचीत में छत्तीसगढ़ की प्राख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने कही।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : जानती हूं कि सरकार एक दिन या तो जेल में बंद करेगी या गोली मार देगी : सोनी सोरी

लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

संबंधित आलेख

बिहार : भरत तिवारी एनकाउंटर पर चढ़ा जाति का रंग
हालिया एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति का नाम भरत तिवारी है, जो ब्राह्मण जाति का है। एक ब्राह्मण की हत्या के बाद ब्राह्मण नेताओं...
किस ‘प्रशासनिक’ कारण से नहीं दिए जा रहे डॉ. आंबेडकर के नाम पर पुरस्कार?
पुरस्कार से प्रोत्साहन का संचार होता है। शायद दलितों के बीच काम करने वालों को प्रोत्साहन की राजनीतिक जरूरत नहीं रह गई है। उनके...
संगठित होने के बजाय बिखराव की राह पर आंबेडकरवादी संगठन
यदि शासक बनना है तो सबसे पहले काम यह करना होगा कि बहुजन जातियों में एकता लानी होगी, कम-से-कम बहुजन नेता आपस में एकजुट...
वर्ग-जाति अंतर्संबंध और सामाजिक न्याय आंदोलन की चुनौतियां
फुले, पेरियार और आंबेडकर के आंदोलन केवल पहचान के आंदोलन नहीं थे। उनके केंद्र में मनुष्य की गरिमा, बराबरी और अधिकार का प्रश्न था।...
आखिर क्यों नहीं दिए जा रहे श्रम पुरस्कार?
संसद में मजदूरों से संबंध बनाने के लिए भाषा नहीं दिखती है। केवल कामगारों, श्रमिकों, मजदूरों के लिए चार लेबर कोड बनाए गए। कोड...