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Suresh Kumar
मानना और अवमानना के दौर में फुले
सुरेश कुमार
फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों...
दलित-बहुजन विमर्श के नये आयाम गढ़तीं दिनेश कुशवाह की कविताएं
सुरेश कुमार
दिनेश कुशवाह की कविताओं में ऐसी कई भारतीय समाज की दृश्यावलियां उभर कर आती हैं, जो साहित्य और...
‘चमरटोली से डी.एस.पी. टोला तक’ : दलित संघर्ष और चेतना की दास्तान
सुरेश कुमार
यह आत्मकथा सिर्फ रामचंद्र राम के इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने तक जीवन संघर्ष की गाथा नहीं बल्कि यह...
दलित आलोचना की कसौटी पर प्रेमचंद का साहित्य (संदर्भ : डॉ. धर्मवीर, अंतिम भाग)
सुरेश कुमार
प्रेमचंद ने जहां एक ओर ‘कफ़न’ कहानी में चमार जाति के घीसू और माधव को कफनखोर के तौर...
दलित आलोचना की कसौटी पर प्रेमचंद का साहित्य (संदर्भ : डॉ. धर्मवीर, पहला भाग)
सुरेश कुमार
डॉ. धर्मवीर को प्रेमचंद से यही तो अपेक्षा थी कि आचार्य चतुरसेन शास्त्री की तरह वह भी ‘कफ़न’...
डॉ. धर्मवीर की नजर में दलितों का धर्म
सुरेश कुमार
डॉ. धर्मवीर न तो हिंदू धर्म को दलितों के लिए ठीक मानते हैं, न ईसाई, न मुसलमान और...
बाबासाहब के संदर्भ में अपना नजरियां बदलें द्विज स्त्रियां
सुरेश कुमार
वर्तमान में स्त्री चिंतन की बात की जाए तो कहीं ना कहीं उच्च श्रेणी की स्त्रियां डॉ. आंबेडकर...
जातिवादी मुखौटों की शिनाख़्त करतीं असंगघोष की कविताएं
सुरेश कुमार
असंगघोष का कविकर्म सामाजिक गलियारों में फैली जातिवादी सड़ांध को उजागर करने का काम करता है। तथा कथित...
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