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सम-सामयिकी

स्मृतियां शेष : मुक्ति तिर्की के कारण झामुमो को मिला था ‘तीर-धनुष’
झामुमो की आज की पीढ़ी को इस बात का पता नहीं होगा कि यह मुक्ति तिर्की का कितना बड़ा योगदान था झामुमो को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दिलाने में। लेकिन इससे इस बात...
पटना में अली अनवर की किताब के लोकार्पण के मौके पर जाति के सवाल के साथ जवाब भी
दरभंगा के कुशेश्वरस्थान की घटना का उल्लेख करते हुए हेमंत ने कहा कि खबर को वास्तविकता से काटकर उसे एससी-एसटी एक्ट के विरोध में प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एपस्टिन फाइल पर...
दलितों के लिए बारात निकालना आज भी बड़ी चुनौती क्यों बनी हुई है?
दलितों ने कठिन परिश्रम और संघर्ष, साथ ही संविधान प्रदत्त अधिकारों के कारण समाज में अपने लिए बेहतर स्थान हासिल किया है। यही सफलता सामंतवादी दंभ में डूबे लोगों के लिए असहजता का वजह बनती...
सावरकर बनाम हम : गांधी की जगह सावरकर को राष्ट्रपिता बनाना चाहते हैं आरएसएस-भाजपा
आरएसएस-भाजपा और दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी चाहते हैं कि गांधी-नेहरू की विरासत का स्थान सावरकर ले लें क्योंकि उन्हें पता है कि कांग्रेस का यदि आज भी अस्तित्व बचा हुआ है तो वह इन दो बनिया-ब्राह्मण नेताओं...
यूजीसी रेगुलेशन के पक्ष में बोलें सामाजिक न्याय की सियासत करने वाले नेता
उत्तर भारत की दलित-ओबीसी पार्टियों ने संशय की स्थिति में न केवल सामाजिक अपितु राजनीतिक स्तर पर लामबंदी...
यूजीसी रेगुलेशन : इन कारणों से जरूरी है दलित-बहुजनों की यह लड़ाई
विश्वविद्यालयों में बहुजन छात्रों के ख़िलाफ़ गहरे और व्यवस्थित भेदभाव का एक प्रमुख कारण यह है कि प्रशासन...
यूजीसी रेगुलेशन : बिहार के चप्पे-चप्पे में दलित-बहुजनों का हल्ला बोल
सिवान जिले के प्रिंस पासवान कहते हैं कि मुट्ठी भर लोगों के विरोध से एक बड़ी आबादी को...
यूजीसी रेगुलेशन : सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं इसके विरोधी
ऊंची जाति के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की इक्का-दुक्का घटनाएं हो सकती हैं, मगर एससी, एसटी और ओबीसी...
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