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सम-सामयिकी

खिरियाबाग आंदोलन : साम-दाम-दंड-अर्थ-भेद सब अपना रही सरकार
जमुआ गांव की सुनीता भारती बताती हैं कि पूरे आठ गांवों में घनी आबादी है कि जब वे उजाड़ दिए जाएंगे तो कहां जाएंगे? इसीलिये धरना दे रहे हैं। अकेले जमुआ गांव में चार हजार...
तीसरे दलित साहित्य उत्सव में रहा सबकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर
इस बार के दलित साहित्य उत्सव के मौके पर तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमे चौथीराम यादव द्वारा लिखित पुस्तक 'बात कहूं मैं खरी-खरी', डॉ. बलराज सिंहम़ार की पुस्तक 'हिंदी सिनेमा : आलोचनात्मक...
एक दलित-बहुजन यायावर की भूटान यात्रा (तीसरा भाग)
मैं जब पुनाखा जिले की राह में स्थित धार-चू-ला के नज़दीक स्थित एक बौद्ध मठ में गया तो मुझे उसके एक कमरे में जाने से मना किया गया था, लेकिन मैं गलती से उस कक्ष...
क्यों बख्शें तुलसी को?
अगर मंडल कमीशन और सिमोन द बुआ का स्त्री-विमर्श आ भी गया होता, तब भी तुलसी स्त्री-शूद्र के समर्थक नहीं होते, क्योंकि जब मंडल कमीशन आया था, तो ब्राह्मणों ने ही, जो आज तुलसी के...
बुद्धि और विवेक पर मीडिया का पुरोहितवादी हमला
एंकर ने मुझसे जानना चाहा कि क्या सनातन धर्म में चमत्कार होते हैं? मेरा जवाब था– मैं तो...
उत्तर भारत में ओबीसी ने रामचरितमानस के खिलाफ बजाया विद्रोह का डंका
यह कदाचित पहली बार है कि उत्तर भारत के शूद्र और दलित राजनेता, प्राचीन और मध्यकाल में ब्राह्मणों...
आजमगढ़ का खिरिया बाग आंदोलन : ग्रामीण महिलाएं संभाल रहीं मोर्चा
धरने पर बैठीं जमुआ गांव की केवलपत्ती देवी से एक पत्रकार जब पूछती हैं कि कब तक आप...
दलित-बहुजनों को अपमानित करनेवाली किताबों को जलाने या न जलाने का प्रश्न
सवाल उठता है कि यदि ‘रामचरितमानस’ और ‘मनुस्मृति’ नहीं जलाई जानी चाहिए, तो रावण का पुतला जलाना भी...
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