डॉ. आंबेडकर ने ब्रिटिश सरकार से मांग की कि दलित वर्ग को समान नागरिकता दी जाए। समान नागरिक के सभी अधिकार दलितों को दिये जाएं। उन्होंने विधानसभा में प्रतिनिधि भेजने के अधिकार की बात भी...
फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों की नुमाइंदगी करते हुए ब्राह्मणवादी अवधारणा और उसकी निर्मितियों को चुनौती पेश की थी। भारतीय नवजागरण के...
हैरानी की बात यह है कि बराबरी का समाज बनाने का ख़्वाब देखने वालों के संघर्षों को जनता के बीच बेअसर करने में जिस तरह सांप्रदायिकता बल्कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत का इस्तेमाल किया गया,...
जोतीराव के लिए ‘तृतीय रत्न’ या ‘तीसरी आंख’ का आशय मानवीय विवेक से था। शूद्रातिशूद्रों की दोनों आंखें तो ब्राह्मण-पुरोहित की छलना का शिकार हैं। वे वही देखने की अभ्यस्त हैं जो वे दिखाना चाहते...