ओबीसी पर फिर फोकस

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने क्रीमी लेयर की आय सीमा रुपये 4.50 लाख प्रति वर्ष से बढ़ाकर रुपये 6 लाख कर दी है। इस आशय की घोषणा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने की

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने क्रीमी लेयर की आय सीमा रुपये 4.50 लाख प्रति वर्ष से बढ़ाकर रुपये 6 लाख कर दी है। इस आशय की घोषणा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने की।

धर्मशाला स्थित पर्यावास भवन में ‘हिमाचल प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंडल’ की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सन् 2001 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर कहा कि राज्य की कुल ओबीसी आबादी 9,27,542 है जो कि प्रदेश की कुल आबादी का 15.27 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में उन कदमों की विस्तृत चर्चा की जो सरकार ने पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी की नौकरियों में 12 प्रतिशत और तृतीय व चतुर्थ वर्ग में 18 प्रतिशत पद ओबीसी के लिए आरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने फरवरी 2006 में कुछ और उपजातियों को भारत सरकार की ओबीसी अनुसूची में शामिल करने की अनुशंसा की थी व केन्द्र सरकार ने तदनुसार तरखान, बढ़ई, रामगढ़ी, धीमन (लोहार को छोड़कर), विश्वकर्मा, पुंबा, हादी व सैनी उपजातियों को अनुसूची में शामिल कर लिया है। अन्य उपजातियों के बारे में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग विचार कर रहा है।

सिंह ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि भूमिहीन परिवारों को ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा व शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा के प्लाट, मकान बनवाने के लिए दिए जाएंगे।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि विकास कार्यों का लाभ सभी समुदायों, विशेषकर समाज के पिछड़े वर्ग, तक पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में राज्य ने विकास की दौड़ में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया कि मण्डी जिले की गलमा पंचायत में लबाना समुदाय के श्मशान घाट तक जाने के लिए सड़क बनाई जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसी जिले की लोहारा पंचायत अंतर्गत टांडा में स्थित लबाना समुदाय के मंदिर को जाने वाली सड़क को सुधारने का निर्देश दिया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जंगलों में फलदार वृक्ष लगाने पर जोर दिया ताकि बंदरों की समस्या से निजात पाई जा सके और मानव व जंगली जानवरों के बीच संघर्ष की संभावना को कम किया जा सके।

सिंह के अनुसार, सिरमोर जिले में बट्टा नदी को चैनेलाइज करने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया कि नदी पर पुल बनाकर फ तेहपुर को गुलाबनगर से जोडऩे का प्रस्ताव तैयार करे।

सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री डॉ धनीराम शांडिल्य ने कहा कि राज्य सरकार ने ओबीसी की बेहतरी के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को ध्यान में रखते हुए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ओबीसी विद्यार्थियों के लिए चल रही योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या वर्तमान वित्तीय वर्ष में 500 से बढ़कर 2,500 हो गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि कांगड़ा में हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम का गठन किया गया है। यह निगम व्यावसायिक प्रशिक्षण देता है और कम ब्याज दर पर स्वरोजगार स्थापित करने के लिए रुपये 5,00,000 तक कर्ज भी देता है। निगम द्वारा उच्च शिक्षा व व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए 50,000 रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋ ण भी दिया जाता है। शांडिल्य ने कहा कि पिछड़े वर्ग के विद्यार्थी इन छात्रवृत्तियों से लाभ उठा रहे हैं।

शांडिल्य ने बताया कि राज्य में 2,92,921 बुजुर्गों, विकलांगों, विधवाओं, अकेली महिलाओं व निराश्रितों को रुपये 500 प्रतिमाह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। इनमें से जो 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं उन्हें रुपये 1000 दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन पेंशनों पर चालू वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

 

(फारवर्ड प्रेस के मार्च, 2014 अंक में प्रकाशित )


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