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गुडिया कांड : कटघरे में हिमाचल सरकार और पुलिस

हिमाचल प्रदेश में बलात्कार के मामले लगभग न के बराबर होते हैं। संभवत: यही वजह है कि इस एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। आलम यह है कि पुलिस से लेकर प्रदेश की सरकार तक कटघरे में है। बता रहे हैं हमारे स्थानीय संवाददाता मुकेश :

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की कोटखाई तहसील के हलाईला गांव के जंगल में बीते 4 जुलाई को दसवीं कक्षा की मासूम छात्रा गुड़िया (काल्पनिक नाम)  के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद नृशंस हत्या का मामला आजकल खूब गर्माया हुआ है। पूरे प्रदेश में इस मामले के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग कोटखाई थाने को जलाने के अलावा पुलिस के वाहनों में भी आग लगा चुके हैं और ठियोग थाने पर भी दो बार पथराव हो चुका है। शिमला में सचिवालय पर भी पथराव हुआ। लोग इस मामले में प्रदेश पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

गुड़िया के गुनाहगारों को मिले सजा : सड़क पर उतरे  हिमाचलवासी

आम लोगों का पुलिस पर आरोप यह है कि इस मामले के रसूखदार व संपन्न असली दोषियों को बचाया जा रहा है और जांच के नाम पर सबूतों से पुलिस ने छेड़छाड़ की है। इस मामले में पुलिस द्वारा इसी गांव में मजदूरी करने वाले छह लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें दो नेपाली, दो उत्तराखंड निवासी और एक स्थानीय युवक के अलावा एक स्थानीय निवासी शामिल है।

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हद तो तब हो गई जब इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की हत्या कोटखाई थाने के हाजत में बीते 18 जुलाई की रात को कर दी गई। वह अन्य पांच आरोपियों के साथ इसी थाने में पुलिस रिमांड पर था। पुलिस के अनुसार इसकी हत्या मुख्य आरोपी राजू ने की है। लेकिन लोग इसे भी साजिश मान रहे हैं। वहीं इस संबंध में शुक्रवार को एक समाचार पत्र में प्रकाशित नेपाली सूरज की पत्नी के बयान ने मामले को और गरमा दिया है। ममता नाम की इस महिला के अनुसार उसके पति को पैसे का लालच देकर इस मामले में फंसाया गया था।

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एक नजर में अब तक की घटना

अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार गुड़िया चार जुलाई को महासू स्कूल से अपने घर को जाते हुए गायब हो गई थी। तीसरे दिन उसकी लाश रास्ते के जंगल में एक गड्‌डे में क्षतविक्षत अवस्था में मिली। इस मामले में शुरूआती जांच स्थानीय पुलिस ने की बाद में प्रदेश सरकार ने आईजी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने चार-पांच दिनों की जांच के बाद हत्यारों को पकड़ने का दावा शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में किया। इससे पहले सोशल मीडिया पर भी यह मामला खूब गर्माया हुआ था और कुछ स्थानीय बागवानों के फोटो भी वायरल हो रहे थे जिन्हें सोशल मीडिया अभियुक्त बता रहा था। ये तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए ही मुख्यमंत्री तक पहुंची। हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने जो खुलासा किया उसके मुताबिक नेपालियों व गढ़वाल के मजदूरों को आरोपी बनाकर मीडिया के समक्ष रखा गया। पुलिस के इस खुलासे को जनता व गुड़िया के परिजनों ने नकार दिया। ठियोग में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ जिसमें आक्रोशित जनता ने पुलिस के वाहन व थाने में तोड़फोड़ की। वहीं 14 जुलाई को हजारों की संख्या में लोग ठियोग में पहुंचे और आंदोलन शुरू कर दिया। सीबीआई जांच की मांग की गई जिसे सरकार ने उसी दिन मान लिया। लेकिन इसके बावजूद गुड़िया को न्याय के लिए आंदोलन जारी रहा। इस बीच कोटखाई थाने में एक आरोपी की मौत के बाद फिर से आंदोलन हिंसक हो गया और कोटखाई थाने में तोडफोड़, आगजनी और कुछ पुलिस कर्मियों पर पथराव हुआ।

सीबीआई जांच की अनुशंसा भी नाकाफी : कटघरे में वीरभद्र सरकार

जन आक्रोश बढ़ता देख आनन-फानन में हरकत में आयी सीबीआई

यह हिमाचल प्रदेश की जनता का आक्रोश का ही परिणाम है कि गुड़िया के सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की जांच शुक्रवार से सीबीआई ने संभाल ली। हालांकि सरकार की सिफारिश और प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर एसपी स्तर के नेतृत्व में इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन हो चुका है। शुक्रवार को थाने में मारे गए आरोपी की पत्नी ममता को सीबीआई ने अपनी कस्टडी में ले लिया है और उसके बयान को दर्ज करने की तैयारी चल रही है। सरकार ने इस मामले मे पुलिस की एसआईटी के अधिकारियों आईजी व शिमला के एसपी का स्थानांतरण कर दिया है और नई महिला एसपी को तैनात किया गया है। इसके अलावा कोटखाई थाना के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी लाईन हाजिर किया गया है। अब लोगों की नजर सीबीआई की जांच पर टिकी है। लेकिन वे खामोश नहीं हैं। वे गुड़िया के गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए सड़कों पर हैं। ठियोग में लोग शनिवार 22 जुलाई को भी सड़कों पर उतरे। लोग हिमाचल पुलिस के मुखिया और डीसी शिमला को भी हटाने की मांग कर रहे हैं। इस प्रकार यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि गुड़िया का मामला एक भावनात्मक मुद्दा बन चुका है और पूरे हिमाचल में जन आक्रोश चरम पर है।

पहली बार हिमाचल के हिम में लगी आग

हिमाचल प्रदेश में बलात्कार के मामले लगभग न के बराबर होते हैं। संभवत: यही वजह है कि इस एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। आलम यह है कि पुलिस से लेकर प्रदेश की सरकार तक कटघरे में है। यह इस मायने में भी दिलचस्प है कि प्रदेश में दो-तीन महीने के बाद विधानसभा का चुनाव है और इस मामले में यदि लोगों को यह संदेह सही निकला कि कुछ रसूखदार व अमीर लोगों को बचाया गया है तो प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस सरकार के लिए नुकसानदायक साबित होगा। वहीं शुरू में इस मामले को मीडिया में भी हल्के में लिया जा रहा था लेकिन कुछ राष्ट्रीय अखबारों और अब इलेक्ट्रानिक मीडिया के हस्तक्षेप के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है। यही वजह है कि इस घटना को 16 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी भी यह मामला मीडिया की सुर्खियों में है।


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लेखक के बारे में

मुकेश

मुकेश फारवर्ड प्रेस के हिमाचल प्रदेश संवाददाता हैं

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