अब मायावती और शरद यादव ने भी पूछा, किसने जलवाया शब्बीरपुर?

सहारनपुर दंगे के सुनियोजित होने तथा इसमें फूलन देवी के हत्या के आरोप में सजायाफ्ता शेर सिंह राणा के हाथ होने का सवाल पिछले दिनों संसद के पटल पर भी गूंजा। बसपा सुप्रीमो मायावती ने जहां पिछले दिनों इन दंगों को सुनियोजित बताया वहीं जदयू सांसद शरद यादव ने इसमें शेरसिंह राणा की संलिप्तता की ओर इशारा किया

सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाने के लिए चर्चित वरिष्ठ राजनेता शरद यादव ने गत 21 जुलाई को राज्यसभा में अपने भाषण में कहा कि सहारनपुर दंगा कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक सुनियोजित कार्रवाई थी। उन्होंने संकेत किया कि इस दंगे में फूलन देवी के हत्यारे शेर सिंह राणा और स्थानीय भाजपा सांसद की भी संलिप्तता थी। उन्होंने दलितों पर अत्याचार एवं गौ रक्षा के नाम पर लोगों की हत्या के सवाल को उठाते हुए कहा कि  2 मई,2017 को सहारनपुर के स्थानीय सांसद ने शिमलाना गांव में अपनी बिरादरी के लाेगें के साथ बैठक की थी और इस बैठक में पूर्व सांसद फूलन देवी का हत्यारा शेर सिंह राणा भी मौजूद था। इस बैठक के बाद ही 5 मई को शब्बीरपुर में की दलित बस्ती में आग लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने दलितों का घर जलाया गया तथा दलित महिलाओं के साथ जो सलूक किया गया, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

 

श्री यादव ने कहा कि उत्तरप्रदेश में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर किन कारणों से शब्बीरपुर गांव में दलितों का घर जलाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। यहां तक कि एफआईआर तक नहीं दर्ज किया गया। वहीं भीम आर्मी के पचास से अधिक सदस्यों को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी गत 18 जुलाई  को सहारनपुर मुद्दे पर अपनी बात नहीं रख पाने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। त्यागपत्र देने  से पूर्व अपने भाषण में उन्होंने भी कहा था कि सहारनपुर का दंगा सुनियोजित था। राज्य सभा के सभापति को सौंपे गए त्यागपत्र में भी उन्होंने लिखा – “मैंने यह भी कहा है कि सहारनपुर कांड कोई मामूली मामला नहीं है। अत: मुझे इस बात को सदन में रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। परंतु माननीय उपसभापति से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी मुझे और मौका दिये जाने से मना कर दिया गया।”

 

इससे पहले राज्यसभा में इस सवाल पर स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए मायावती ने कहा कि सहारनपुर का मामला वस्तुत: अांबेडकर जयंती को शुरू हुई जब शब्बीरपुर के लोगों ने जयंती मनाने और रविदास मंदिर में बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित करने के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति देने का अनुरोध किया। परंतु स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गयी। जबकि पांच मई को महाराणा प्रताप की जयंती मनाने और प्रदर्शन की अनुमति दी गयी। इससे पहले उन्होंने यह भी कहा कि सहारनपुर दंगे को भाजपा के लोग जातिवादी दंगा साबित करने में लगे हैं जबकि वास्तव में यह दंगा नहीं दलितों का उत्पीड़न है।

ध्यातव्य है कि फारवर्ड प्रेस ने मई, 2017 में प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों  में उन तथ्यों को विस्तार रखा था, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि शब्बीरपुर में लगायी गयी आग केवल एक आक्रोशित भीड़ की कार्रवाई नहीं थी बल्कि इनके लिए विशेष केमिकल का इस्तेमाल किया गया था। पूरे मामले में शेर सिंह राणा जैसे व्यक्तियों की संलिप्तता की जांच होनी चाहिए।

फारवर्ड प्रेस में सहारनपुर दंगा के संबंध में प्रकाशित रिर्पोट :

सहारनपुर कांड : किसने मंगवाए थे ज्वलनशील केमिकल वाले बैलून?

https://www.forwardpress.in/2017/05/saharanpur-riot-bhim-army-and-shersingh-rana-hindi/

सहारनपुर कांड और फूलन देवी के हत्यारे का शातिर दिमाग

https://www.forwardpress.in/2017/05/caste-violence-in-saharanpur-and-shersingh-rana_killer-of-phoolan-devi/

सहारनपुर कांड : स्थानीय प्रशासन का रुख

https://www.forwardpress.in/2017/05/saharanpur-samjhdar-dm-akrosh-men-ssp/

सहारनपुर कांड : जाति नहीं, दलितों के आर्थिक विकास पर हमला

https://www.forwardpress.in/2017/05/saharnpur-kand-jati-nahi-dalito-ka-arthik-vikash-par-hamala/


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