महिषासुर प्रकरण : लोकेश गिरफ्तार, छत्तीसगढ़ में हाई-वोल्टेज ड्रामा जारी

महिषासुर और रावण का अपमान करना अब मनुवादियों को महंगा पड़ रहा है। हालांकि छत्तीसगढ़ पुलिस ने दुर्गा पूजा के आयोजकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले भाजपा के स्थानीय आदिवासी नेता लोकेश सोरी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन आदिवासियों के लिए तो लड़ाई अभी शुरू हुई है। बता रहे हैं नवल किशोर कुमार :

अब आदिवासी समुदाय महिषासुर और अपने कुलगुरु रावेन पेन (रावण) का और अपमान बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला के पखांजूर थाने में दो दिन पहले 28 सितंबर 2017 को जहां दुर्गा पूजा के विरूद्ध देश की पहली एफआईआर दर्ज करवायी गयी थी, वहीं आज फिर  सूबे के कई जिलों में लोग इसी मामले  को लेकर एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे।

उधर, पखांजूर में पुलिस , बंगाली समुदाय व आदिवासियों के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा जारी है। दुर्गा पूजा समिति पर एफआईआर दर्ज करवाने के दो दिन बाद बड़ी संख्या मेंं आदिवासी विजयादशमी के दिन  फिर से पखांजूर थाने पहुंचे तथा आरोप लगाया कि दो दिन पहले जब उनके प्रतिनिधि थाने में एफआईआर करवाने आये थे तब जन दबाव व उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से एफआईआर तो दर्ज कर ली गयी थी लेकिन थाने में मौजूद दारोगा धीरेंद्रनाथ दूबे ने, न सिर्फ उनके साथ बदसलुकी की थी, बल्कि जाति सूचक गालियां भी दी थी। उन्होंने थाने का घेराव कर पंखांजूर थाने में दारोगा धीरेंद्रनाथ दूबे के खिलाफ शिकायत दर्ज दी तथा उसपर  तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

इसी बीच एक अन्य घटनाक्रम में पुलिस ने दुर्गा पूजा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने वाले भाजपा के स्थानीय आदिवासी नेता लोकेश सोरी को भी व्हाट्स अप पर दुर्गा का अपमान करने वाले संदेश भेजने का आरोप लगाकर हिरासत में ले लिया है।

इन घटनाक्रमों से आदिवासियों का विरोध शांत होने के बजाय भड़कता ही जा रहा है। पूरे प्रदेश से आदिवासियों के विभिन्न संगठन राज्यपाल और अनुसूचित जनजाति आयोग समेत विभिन्न उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने-अपने क्षेत्र में महिषासुर और रावेन का अपमान करने वालों पर संविधान में पांचवीं अनुसूची में शामिल प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। लोगों ने अकेले फारवर्ड प्रेस के पास ऐसे लगभग दो दर्जन पत्रों की प्रतियां व्हाट्स अप से भेजी हैं। ये पत्र अलग-अलग तारीखों को भेजे गये हैं।

आइये सबसे पहले देखें देवी दुर्गा पर देश की पहली FIR  दर्ज करवाने वाले लोकेश के मामले को।

लोकेश सोरी की गिरफ्तारी पर उठने लगे सवाल

 पखांजूर की पुलिस ने दुर्ग्गा पर  एफआईआर दर्ज कराने वाले भाजपा के स्थानीय आदिवासी नेता लोकेश सोरी को गिरफ्तार कर लिया है। 

इस संबंध में व्हाट्स अप पर वायरल हुए एक संदेश के लोकेश सोनी के समर्थन में सवाल उठाए गए हैं कि :

“अनुसूची क्षेत्र के एक ही थाने में दो तरह का कानून क्यों

पहला मामला – लोकेश सोरी बनाम व्हाट्स अप में दुर्गा टिप्पणी फारवर्ड करने को लेकर 26 सितंबर 2017 को बंगाली समाज के लोगों द्वारा उनके खिलाफ पुलिस थाना पखांजूर में रिपोर्ट दर्ज करवा दी।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सात दिनों के भीतर 1 अक्टूबर 2017 को कांकेर जिला सचिव अनुसूचित जाति समुदाय श्री लोकेश सोरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

दूसरा मामला – पखांजूर (परलकोट) में हमारे आराध्य पेन महिषासुर का दुर्गा पंडालों में वध करने से आदिवासियों के धार्मिक भावना को ठेस पहुंचा है, जिसकी 27 सितंबर 2017 को पुलिस थाना पखांजूर में रिपोर्ट दर्ज करवायी गयी। पर आजतक महिषासुर का वध करने वाले बंगाली समाज के दुर्गा पंडालों के पदाधिकारियों व सदस्यों के खिलाफ कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गयी।  कानून के रखवालों का यह दोहरा रवैया आदिवासियों के साथ ही क्यों?”

दारोगा पर भड़का आदिवासी समाज, शिकायत दर्ज

दरअसल पखांजूर में बंगाली समुदाय और आदिवासियों के बीच संघर्ष की शुरूआत बीते 27 सितंबर 2017 को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर थाने में अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष लोकेश सोरी द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमे से हुई। इसी मामले में एक दिलचस्प जानकारी यह है कि इसी दिन  इसी थाने में एक और मुकदमा दर्ज कराया गया। यह मुकदमा किसी और पर नहीं बल्कि इसी थाने के के दारोगा धीरेंद्रनाथ दूबे के खिलाफ दर्ज कराया गया था।

अपने शिकायत पत्र में

दारोगा के खिलाफ की गयी शिकायत

लोकेश सोरी ने थाना प्रभारी पखांजूर को लिखा  कि “अनुसूचित जाति/जनजातियों के पूर्वज/पुरखों के देवता महिषासुर का वध करते हुए दुर्गा पंडाल में मूर्तियां प्रदर्शित की गयी हैं। जिससे हमारे धार्मिक, संस्कृति एवं आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा है। जिसकी शिकायत आवेदन लेकर 27 सितंबर 2017 को पुलिस थाना पखांजूर गये थे, परंतु अापके अधीनस्थ अफसर धीरेंद्रनाथ दूबे, उप निरीक्षक, थाना पखांजूर ने हमारे साथ बदसलुकी करते हुए रे बे साले जातिगत गाली गलौज एवं डरा धमका कर हमको ही मारने के लिए हाथ उठाया और धमकाया कि हमारे बिलासपुर तरफ भी गोंड़ गारा लोग हिन्दू रीति रिवाज को मानते हैं। तुम लोग कौन सा गोंड़ गारा हो बे साले, जो हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार दुर्गा को नहीं मानते हो। कौन लिखकर भेजा है, कौन सा पांचवीं अनुसूचित की बात करते हो, ऐसा कोई धारा नहीं है, कहां संविधान पढ़कर आते हो, ऐसा कोई संविधान नहीं है। कलेक्टर, एसडीएम, एसडीओपी जहां जाना है, वहां जाओ। जो करना है कर लो, दुबारा दूबे के रहते फालतू चीजों को लेकर थाना में मत आना। ऐसा धमकाते व जातिगत गाली-गलौज करते हुए, गुस्से में हाथ उठाकर मारने के लिए तेजी से हमारे पास आया और आवेदन को मेरी ओर फेंक दिया और बिना रिपोर्ट दर्ज किये ही हमें थाना से भगा दिया। ऐसा कर इस अफसर ने भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है।”

इस मामले में कांकेर पुलिस जहां एक ओर पहली शिकायत को एफआईआर के रूप में दर्ज किये जाने की बात को स्वीकार किया है। कांकेर के एसपी के एन ध्रुव ने फारवर्ड प्रेस के साथ दूरभाष पर बातचीत में कहा है कि वे इस शिकायत पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। इससे पहले उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में आदिवासियों द्वारा पखांजूर थाने के परलकोट इलाके में दुर्गा पूजा आयोजकों के खिलाफ मुकदमा आया है और उस मामले में पहले ही जांचोपरांत गिरफ्तारी के आदेश दिये जा चुके हैं।

ध्यातव्य है कि पिछले वर्ष 12 मार्च 2016 को सुकमा जिले में एक प्रदर्शन के दौरान मनुवादियों ने आदिवासियों के खिलाफ अपशब्द युक्त नारा लगाया था। इस मामले में छह लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज गौतम भादुड़ी ने अपने ऐतिहासिक न्यायादेश में कहा था कि आदिवासियों का अपना धर्म और संस्कृति है। किसी को उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है। अपने न्यायादेश में अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

शिकायत पत्रों से पटे अधिकारियों के कार्यालय

कांकेर जिले के नरहनपुर थाने में 28 सितंबर को  ही दर्ज एक और शिकायत में गोंडवाना गणतांत्रिक पार्टी की जिला इकाई ने कहा है कि “भारत के संविधान के अनुसार जिला कांकेर(छग) पांचवीं अनुसूची 244(1) के अंतर्गत आता है, जिसके मूल अधिकार अनुच्छेद 13(3) (क) रूढि प्रथा के तहत रावण दहन किया जाना अपराध है।”


महिषासुर को राक्षस कहना देशद्रोह : कांकेर जिले में गोंडवाना गणतांत्रिक पार्टी के युवा प्रभाग द्वारा नरहनपुर थाना प्रभारी को दिया गया शिकायत पत्र

इसी दिन एक और शिकायत छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव तहसीलदार से की गयी है और इसकी एक प्रतिलिपि स्थानीय थानेदार को देकर प्राप्ति की मुहर ली गयी है। इस शिकायत में ‘सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग’ ने भी अपने क्षेत्र के पांचवीं अनुसूची में होने का हवाला देते हुए कहा है कि “आदिवासियों की रक्षा करने वाले महाज्ञानी रावण और भैंसासुर(मूर्म) हमारे पूर्वज हैं (तथा) उनको दशहरा में जलाना या राक्षस कहना (सिर्फ) सांस्कृतिक द्रोह नहीं, बल्कि देशद्रोह है, इसलिए राजा रावण, भैंसासुर – मुर्मू को राक्षस कहना और जलाना बंद करने का निर्देश (प्रशासन) दे।” शिकायतकर्ता संस्था ने ऐसा नहीं करने पर अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनके क्षेत्र में उनके पुरखों को  “राक्षस कहकर जलाया गया तो संबंधित जिला उच्चाधिकारियों पर देशद्रोह का मुकदमा, ऐट्रोसिटी एक्ट एवं आईपीसी 124ए के तहत किया जाएगा, जिससे वे  भारत सरकार की सेवा से बर्खास्त किये जायेंगे।”  उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि “बाहरी जगह से आकर (वे) धर्म प्रचार नहीं कर सकते हैं।” इस शिकायत पत्र में पुनीत कोड़गम, युवराज नेताम, श्रवण कुमार, रोशन गावड़े, मिठकू राम मरकाम, मोती लाल मरकाम, राजेश कोर्राम, दशरू नेताम, चालकी कोर्राम, मानकू कोर्राम, राजा नेताम और रमेश नेताम के हस्ताक्षर हैं।

ऐसा ही एक अन्य शिकायत पत्र मोहला, जिला राजनंदगांव(छग) में राज्यपाल को संबोधित करते अनुविभागीय दंडाधिकारी को सौंपा गया है तथा उनसे प्राप्ति की मुहर ली गयी है। इस पत्र में जन मुक्ति मोर्चा के पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर समेत दस से अधिक जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। जबकि सूबे के लोहंडीगुड़ा तहसील में उप अनुविभागीय दंडाधिकारी(राजस्व) को सौंपे गये पत्र में कहा गया है “प्रदेश में गोंड जनजाति की संख्या लगभग 32 फीसदी है एवं गोंड जनजाति में बड़ी संख्या रावण वंशी गोंडों की है, जो प्रदेश के सभी 27 जिलों में निवास कर रही है। गोंड बहुल ग्रामों में हमारे आराध्य महाराजा रावण, मेघनाथ, कुंभकरण एवं महिषासुर की पूजा प्राचीन काल से प्रचलन में है। पिछले कुछ वर्षों से व्यापक स्तर पर इनका पुतला दहन कर हमारे आत्मसम्मान, सामाजिक एवं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचायी जा रही है, जो कि एक असंवैधानिक कृत्य है।”

बस्तर जिला में ‘सर्व आदिवासी समाज, अनुसूचित क्षेत्र’  के कोंडागांव युवा प्रभाग के अध्यक्ष पीलाराम मरकाम ने जिला कलेक्टर को सौंपे गये शिकायत पत्र में कहा है कि “भारत देश के मूलनिवासी आदिवासी मूलसंस्कृति ‘प्रकृति धर्म’ को मानने वाले हैं। हमारे पूर्वज प्रकृति में आस्था रखते थे और हम आज भी वह परंपरा बनाये हुए हैं। भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है तथा यहां हर मजहब के लोग रहते हैं व दूसरे धर्म व संस्कृति का भी आदर करते हैं। लेकिन आदिवासी हिन्दू नहीं हैं, यह फैसला देश की सुप्रीम कोर्ट कर चुकी है। हम आदिवासी समाज के लोग रावण, कुंभकरण, महिषासुर (मुर्मू) को पुरखा मानते हैं। इनका दहन कर हमारे पुरखों का अपमान किया जा रहा है, जिसकी इजाजत भारत का संविधान नहीं देता है।”

जबकि मध्यप्रदेश में भारतीय गोंडवाना पार्टी के पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी ने मध्यप्रदेश के

भारतीय गोंडवाना पार्टी के पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी द्वारा मध्यपद्रेश के राज्यपाल को लिखा गया पत्र

राज्यपाल को ज्ञापन देकर अपनी शिकायत दर्ज करायी है। उन्होंने कहा है “मध्यप्रदेश में गोंड जनजाति(आदिवासी) की आबादी 1.20 करोड़ है एवं गोंड जनजाति में बड़ी संख्या रावणवंशी गोंडों की है, जो प्रदेश के 12 जिलों में निवास करते हैं। गोंड बहुल गांवों में रावण, मेघनाथ एवं महिषासुर की पूजा प्राचीन काल से ही प्रचलन में है। कुछ हिंदूवादी संगठनों द्वारा पिछले कुछ वर्षों से व्यापक स्तर पर बड़े धूमधाम से बुराई पर अच्छाई की जीत का नाम लेकर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण का पुतला दहन कर बहुसंख्यक मूल आदिवासियों की सामाजिक, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया जा रहा है। जिससे आने वाले भविष्य में दो बड़े समुदायों के बीच सांप्रदायिक झगड़े(दंगे)  का कारण बन सकता है।” रेखांकित करने योग्य यह है कि गोंडवाना पार्टी के पूर्व विधायक श्री बट्टी ने इस पत्र को सोशल मीडिया पर जारी कर पार्टी की ओर से प्रत्येक विकास खंड, तहसील और जिला मुख्यालय में सौंप कर प्राप्ति की सील(मुहर) लेने का निर्देश अपने कार्यकर्ताओं को दिया है।  

मध्यप्रदेश के ही नारायणपुर जिला कलेक्टर को सौंपे गये पत्र में ‘सर्व आदिवासी समाज’ द्वारा भी इसी मुद्दे को दैनिक नवभारत में प्रकाशित एक समाचार के हवाले से  व्यापक फलक पर उठाया गया है। संगठन ने पत्र में लिखा है कि “हम नवभारत राष्ट्रीय समाचार पत्र के रायपुर  संस्करण में 26 सितंबर 2017 को प्रकाशित ‘अलगाववादियों की खिलाफत’ शीर्षक समाचार की ओर कलेक्टर महोदय का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इस समाचार में ‘बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच’ के जिला संयोजक मंगऊ राम कावड़े, ग्राम एडका, तहसील नारायणपुर ने बस्तर की गलत छवि प्रस्तुत करते हुए बस्तर के मूल निवासी आदिवासी मुरिया समाज को अलगाववादी गतिविधियों को पनाह देने वाला एवं जातीय संघर्ष को बढ़ाने वाला बताया है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा है कि राजनीतिक लोग अपने को हिन्दू न बताकर मूलनिवासी बताते हैं तथा हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं के विरूद्ध अनर्गल प्रचार कर आस्था को चोट पहुंचाते हैं। उनका यह कथन आदिवासी समाज की पारंपरिक विचारधारा से मेल नहीं खाता। कथित   ‘बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच’ का यह स्वयंभू जिला संयोजक हिन्दूवादी विचारधारा के हाथों में खेलते हुए बस्तर के आदिवासी समाज को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है। बस्तर का कोया एवं कोयतोर आदिवासी समाज यहां का मूल निवासी है, जो यहां पुरखा (आदिम) जमाने से रह रहा है तथा यहां निवासरत अन्य जाति समाज के साथ समरसता बनाकर आज भी सौहाद्र पूर्ण तरीके से रह रहा है।” ‘सर्व आदिवासी समाज’ ने इस पत्र में जिलाधिकारी से उपरोक्त बयान देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा है कि “अलगाववादियों से सबसे ज्यादा क्षति आदिवासी समाज को हुई है। ‘बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच’ के कथित स्वयंभू संयोजक अगर किसी अलगाववादी को जानते हैं तो उसका नाम बतायें तथा यह बतायें कि मूल रूप से बस्तर में निवासरत आदिवासी समाज के किस कृत्य से हिन्दू देवी-देवताओं को मानने वालों की आस्था को चोट पहुंची है। अन्यथा आदिवासी समाज के विरूद्ध हिन्दूवादी विचारधारा से प्रेरित भ्रामक प्रचार बंद करें। अन्यथा आदिवासी समाज ऐसे तथाकथित संगठन के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने को बाध्य होगा।”   

बस्तर जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

सांसत में भाजपा

इस पूरे मामले में एक राजनीतिक पेंच भी है जो भाजपा के लिए गले का फांस बनता जा रहा है। दरअसल भारतीय संस्कृति के इतिहास में पहली बार दुर्गा के उपासकों के खिलाफ लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराने वाला कोई और नहीं बल्कि भाजपा के ही एक नेता हैं। इनका नाम लोकेश सोरी है। दो दिनों पहले तक ये कांकेर जिला भाजपा के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के उपाध्यथ थे। जैसे ही इनके द्वारा दुर्गा पूजा के आयोजकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किये जाने का मामला प्रकाश में आया, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने हरकत में आते ही इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

इस बात की पुष्टि करते हुए कांकेर जिला के भाजपा अध्यक्ष हलधर साहू ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि भारत में हिन्दू देवी-देवता बहुत वर्षों से पूजे जाते रहे हैं। उन्होंने अपने ही दल के नेता रहे लोकेश सोरी को अज्ञानी करार देते हुए कहा कि आदिवासियों का अपना कोई धर्म नहीं होता है। उन्होंने यह भी कहा कि दल की तरफ से श्री सोरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का जवाब मिलने के उपरांत पार्टी के संविधान के मुताबिक उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बहरहाल लोकेश की गिरफ्तारी के बाद दुर्गा के उपासकों बनाम महिषासुर को अपना आराध्य मानने वालों का संघर्ष अभी और जोर पकड़ने की  संभावना तेज हो गयी है। आदिवासियों के पास वर्ष 2016 में छत्तीसगढ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला जिसमें आदिवासियों के धार्मिक अधिकार एवं उनके धार्मिक भावनाओं के मद्देनजर अदालत ने आदिवासियों को गाली देने वालों की जमानत को खारिज कर दिया था।

(प्रशासनिक पदाधिकारियों को भेजे गये पत्रों को संप्रेषणीय बनाने के लिए किंचित संपादित किया गया है)

 


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