वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर नाज़ुक स्थिति में एम्स के आईसीयू में भर्ती

हिंदी के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार राजकिशोर की तबियत बीते 15 मई (मंगलवार) को अचानक बिगड़ गई। फिलहाल वे एम्स के आईसीयू में भर्ती हैं। हालत नाज़ुक बनी हुई है। कुछ ही दिनों पहले उनके 40 वर्षीय युवा पुत्र विवेक की ब्रेन हैम्रेज से मौत हो गई थी

हिंदी के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार राजकिशोर की तबियत बीते 15 मई (मंगलवार) को अचानक बिगड़ गई। उनकी पत्नी उन्हें लेकर नजदीक के अस्पताल गईं। डाक्टर ने कहा कि इन्हें जल्दी किसी ऐसे अस्पताल में ले जाइये, जहां आक्सीजन देने की सुविधा उपलब्ध हो। पड़ोसियों की मदद से उन्हें नोएडा सेक्टर 27 के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उनकी स्थिति में सुधार न देख अगले दिन (बुधवार) की सुबह उन्हें एम्स ले जाया गया। फिलहाल वे एम्स के आईसीयू में भर्ती हैं। हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।

वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर

अभी कुछ ही दिनों पहले उनके और उनके परिवार पर दुख का पहाड़ टूटा था, जब उनके 40 वर्षीय युवा पुत्र विवेक की ब्रेन हैम्रेज से मौत हो गई थी। डाक्टरों का अंदाजा है कि विवेक की मौत से लगे सदमे के चलते उनकी स्थिति इतनी बिगड़ी है। राजकिशोर जी के आंतरिक अंगों में गंभीर इंफेक्शन है। फिलहाल उनकी देख-रेख उनकी बेटी अस्मिता और पत्नी विमला कर रहीं हैं।

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बेटे को खोने के बाद जीवनसाथी को खोने की काली छाया राजकिशोेर की पत्नी के चेहरे पर कोई भी पढ़ सकता है। उनके आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे है। यह स्वाभाविक भी है, जिस स्त्री ने चन्द दिनों पहले अपना जवान बेटा खोया हो और उसका जीवनसाथी जिंदगी और मौत से जूझ रहा हो, उसकी हालात क्या होगी? वह बार-बार एक ही प्रश्न करती है कि इनको कुछ हो गया तो क्या होगा? वह रह-रह कर बोल उठती हैं कि लगता है, ये भी विवेक की तरह छोड़ कर चले जायेंगे, मैं कैसे जीऊगीं। मेरी कुंवारी बेटी का का क्या होगा? हालात जैसे हैं, उन्हें ढांढस बधाने के लिए कोई शब्द नहीं मिलते हैं। क्या कह कर उन्हें संतोष दियाला जाय। उनकी हालत देखकर मन व्याकुल और विवश हो उठता।

राजकिशोर की बेटी अस्मिता ही पूरी स्थिति को संभाल रही है। भीतर-भीतर आशंकित और वेदना से जूझती वह गजब के साहस का परिचय देते हुए पिता का इलाज करा रही और मां को ढांढस बधा रही है।

बताते चलें कि राजकिशोर एक बेटा और बेटी के पिता रहे हैं। बेटा विवेक तो उन्हें छोड़ हमेशा के लिए चला गया, बेटी अस्मिता ही इस समय पूरे परिवार का सहारा है।

राजकिशोर अपने वैचारिक लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उपन्यास व कविताएं भी लिखी हैं। हाल ही में उन्होंने डॉ आम्बेडकर की किताब ‘एनहिलेशन ऑफ कास्ट’ का ‘जाति का विनाश’ शीर्षक से हिंदी अनुवाद किया है, जो फारवर्ड प्रेस बुक्स से शीघ्र ही प्रकाश्य है।

फारवर्ड प्रेस परिवार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है।


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