बाबा रामदेव के सर्वदलीय और निर्दलीय हो उठने के मायने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक रहे बाबा रामदेव इन दिनों कहते फिर रहे हैं कि वे सर्वदलीय और निर्दलीय दोनों हैं। वे उनकी नीतियों पर भी सवाल उठा रहे हैं। साथ ही चेतावनी भी दे रहे हैं। माजरा क्या है, बता रहे हैं विशद कुमार :

पिछले 16 सितंबर 2018 को एनडीटीवी के युवा समागम में बाबा रामदेव ने कहा, ”मैं सर्वदलीय भी हूं और निर्दलीय भी”। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करना लोगों का मौलिक अधिकार है। साथ ही यह भी कह दिया कि पीएम मोदी कठिन मेहनत करते हैं। महंगाई के सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा, ”मैं या आप कहें या ना कहें पर मोदी सरकार को ये महंगाई कम करनी होगी। अगर यह महंगाई कम नहीं की गई तो यह आग उन्हें ले डूबेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि ”पहले मैं सक्रिय था, मगर अब नहीं। मैं अब सर्वदलीय और निर्दलीय हूं। मैं 2019 में मोदी सरकार का प्रचार नहीं करूंगा।’

यह वही बाबा रामदेव हैं जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए आगे बढ़कर चुनाव प्रचार भी किया था। काला धन और भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों की सराहना की थी।

  • नरेंद्र मोदी के लिए चलाया था चुनावी कैंपेन

  • रामकृष्ण यादव है रामदेव का पारिवारिक नाम

  • रामदेव के अभियान में शामिल हुए थे अमिताभ बच्चन और शिल्पा शेट्टी

जाहिर तौर पर भाजपा से बाबा रामदेव की नजदीकियां किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में उनके बयान के मायने क्या हैं? यह राजनीतिक विश्लेषकों से छुपा नहीं है।

कौन हैं बाबा रामदेव?

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के अली सैयदपुर नामक गाँव में वर्ष 1965 को गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव के घर जन्मे बाबा रामदेव का पारिवारिक नाम रामकृष्ण यादव है। अली सैयदपुर गांव से सटा शहजादपुर के एक सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली।  उसके बाद रामकृष्ण ने युवावस्था में ही संन्यास लेने का निर्णय लिया और रामकृष्ण यादव से बाबा रामदेव का नया चोला धारण कर लिया।

एनडीटीवी के युवा समागम में बोलते बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। 2003 से आस्था टीवी ने हर सुबह बाबा रामदेव का योग का कार्यक्रम दिखाना शुरू किया जिसके बाद बहुत से समर्थक उनसे जुड़े। योग को जन-जन तक पहुँचाने में बाबा रामदेव की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। योग के इस प्रचार-प्रसार में भारत और विदेशों में उनके योग शिविरों में आम लोगों सहित कई बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भी भाग लिया। जिसमें मुख्य रूप से अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का नाम उल्लेखनीय है।

बाबा रामदेव ने वर्ष 2006 में महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड नाम से दो कंपनियों की स्थापना की। इसके माध्यम से बाबा रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदि के साथ-साथ वैदिक शिक्षा व आयुर्वेद का भी प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रवचन विभिन्न टीवी चैनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टीवी पर प्रसारित होते रहे।

प्रवचन भी राजनीति भी

दूसरी तरफ भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में जमा कथित 400 लाख करोड़ रुपये के “काले धन” को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए बाबा रामदेव ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। भ्रष्टाचार एवं कथित काले धन के खिलाफ चल रहे बाबा रामदेव के इस मिशन में और काफी लोग जुड़े। इतना ही नहीं उन्होंने इस अभियान के तहत हरिद्वार और तीर्थ नगरी ऋषिकेश को गोद लेने की घोषणा भी की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बाबा रामदेव

राजनीति में अपनी पकड़ बनाने के लिए बाबा रामदेव ने जब 27 फ़रवरी 2011 को रामलीला मैदान में जनसभा की थी, उस जनसभा में स्वामी अग्निवेश के साथ-साथ अन्ना हजारे भी पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर पर 5 अप्रैल 2011 से अन्ना हजारे सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन की घोषणा की जिसमें एक दिन के लिये बाबा रामदेव भी शामिल हुए। बाबा रामदेव ने 4 जून 2011 से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी। उसी दिन सुबह सात बजे सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ। रात को बाबा रामदेव पंडाल में बने विशालकाय मंच पर अपने सहयोगियों के साथ सो रहे थे कि चीख-पुकार सुनकर वे मंच से नीचे कूद पड़े और भीड़ में घुस गये। 5 जून 2011 को सुबह 10 बजे तक बाबा को लेकर अफ़वाहों का बाजार गर्म रहा। यह सिलसिला दोपहर तब जाकर रुका जब बाबा ने हरिद्वार पहुंचने के बाद पतंजलि योगपीठ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने बच कर निकलने की पूरी कहानी सुनाई। वास्तव में बाबा रामदेव को महिलाओं का सलवार पहन कर भागना पड़ा था, जिसका मीडिया में ख़ूब मज़ाक बना थ। मगर जल्दी ही रामदेव इस मजाक से उबर गए।

  • कांग्रेस के खिलाफ चलाया था राष्ट्रव्यापी अभियान

  • अब नरेंद्र मोदी और भाजपा से कर रहे किनारा

मोदी को सबसे पहले बताया था भावी प्रधानमंत्री

2014 के आम चुनाव से ठीक पहले देश भर में बाबा रामदेव ने नरेंद्र मोदी का जमकर गुणगान किया और यूपीए सरकार की जमकर आलोचना करते रहे।

4 जून 2013 को समाचार चैनल एबीपी के सवालों का जवाब देते हुए बाबा रामदेव ने कहा था, “नरेंद्र मोदी में तीन ऐसी बातें हैं जिनके चलते मैं उनका समर्थन कर रहा हूं। मोदी देश में स्थायी और मज़बूत सरकार दे सकते हैं।”

“वे एक ऐसे शख्स हैं जो काले धन, भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दों पर सहमत हैं। इसके अलावा जितने भी सर्वे हुए हैं, उनमें वे सबसे आगे चल रहे हैं। मैंने लाखों किलोमीटर की यात्रा की है, लोगों का समर्थन उनको मिल रहा है।”

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए वोट मांगते बाबा रामदेव

बता दें कि 4 जून 2013 में ही रामदेव, नरेंद्र मोदी को देश का अगला प्रधानमंत्री बताने लगे थे, जबकि मोदी को भाजपा ने चुनाव समिति का चेयरमैन भी नहीं बनाया था। मोदी को चुनाव समिति के चेयरमैन की ज़िम्मेदारी नौ जून 2013 को मिली थी।

वह एक ऐसा दौर था कि जब बाबा रामदेव, मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक हर मंच से उनको ईमानदार, राष्ट्रवादी और काले धन के ख़िलाफ़ खड़ा होने वाला नेता बताने से थकते नहीं थे। इतना ही नहीं 29 दिसंबर 2013 को रामदेव ने बैंगलोर प्रेस क्लब में ‘वोट फ़ॉर मोदी’ नाम से डोर-टू-डोर कैंपेन चलाने की घोषणा की थी।

नफा-नुकसान का आकलन करते रहे हैं रामदेव

अब ऐसी क्या मजबूरी हो गई कि बाबा रामदेव मोदी से दूरी बनाने की कोशिश में लगे हैं। जाहिर तौर पर उन्हें एहसास हो गया है कि मोदी का आभा मंडल बिखर रहा है। कहना ना होगा कि बाबा रामदेव योग गुरू से ज्यादा व्यापारी हैं और हर व्यापारी का कदम हमेशा नफा की तरफ बढ़ता है, नुकसान की ओर नहीं। रामदेव ने अपने गणित में देख लिया है कि अब मोदी के साथ रिश्ता उन्हें नुकसान की ओर ले जाएगा, अत: वे अभी से ही अपना मार्ग बदल रहे हैं।

हालांकि 4 जून, 2018 को भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह से बाबा रामदेव ‘संपर्क फॉर समर्थन अभियान’ में मिले थे। इसके बाद अमित शाह ने मीडिया में बयान दिया था कि “बाबा रामदेव से मुलाकात का मतलब हम लाखों लोगों से मिल रहे हैं, उन्होंने अगले चुनाव के दौरान पूरा समर्थन देने का वादा किया है।” दूसरी तरफ पिछले 16 सितंबर को एनडीटीवी के युवा कॉन्क्लेव में बाबा रामदेव ने कहा कि वे सर्वदलीय भी हैं और निर्दलीय भी।

फिर राजनेता तो नहीं बनना चाहते रामदेव? 

राजनीतिक नजरिए से देखा जाय तो कहीं बाबा रामदेव ऐसे बयान देकर दबाव बनाने की भूमिका तो नहीं बना रहे हैं, या कुछ और खिचड़ी पकाने के प्रयास में हैं। क्योंकि 2010 में बाबा रामदेव ‘भारत स्वाभिमान’ के नाम से एक राजनीतिक पार्टी भी बना चुके थे। इसके गठन की घोषणा करते वक्त उन्होंने अगले आम चुनाव में प्रत्येक सीट से अपना उम्मीदवार उतारने की बात कही थी, लेकिन एक साल के अंदर ही उन्होंने अपना इरादा बदल कर भारतीय जनता पार्टी का साथ देने का मन बना लिया था।

कहीं पुन: वह महत्वाकांक्षा जागृत तो नहीं हो रही है। क्योंकि उन्होंने अभी तक अपने लिए भावी रिश्ते को चिन्हित नहीं किया है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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