एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर की बात ग़लत : सूरजभान कटारिया

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने एससी-एसटी के लिए आरक्षण में क्रीमीलेयर का प्रावधान किए जाने की बात हाल ही में कही है। इसका विरोध पार्टी के अंदर भी हुआ है। यदि ऐसा हुआ तो दलित-बहुजनों का समाज बंटेगा। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूरजभान कटारिया से कुमार समीर की बातचीत के प्रमुख अंश :

परदे के पीछे

(अनेक ऐसे लोग हैं, जो अखबारों की सुर्खियों में भले ही निरंतर न रहते हों, लेकिन उनके कामों का व्यापक असर सामाजिक व राजनीतिक जीवन पर रहता है। बातचीत के इस स्तंभ में हम ‘पर्दे के पीछे’ कार्यरत ऐसे लोगों के विचारों को सामने लाने की कोशिश करते हैं।

इस कड़ी में आज प्रस्तुत है भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूरजभान कटारिया का साक्षात्कार। 

स्तम्भ में प्रस्तुत विचारों के इर्द-गिर्द प्रकाशनार्थ टिप्पणियों (700-1500 शब्द) का स्वागत है। हम चुनी हुई प्रतिक्रियाओं को प्रकाशित करेंगे – प्रबंध संपादक, ईमेल : managing.editor@forwardpress.in)


तुगलकाबाद में जल्द बनेगा रविदास मंदिर

  • कुमार समीर

कुमार समीर (कु.स.) : सामाजिक दृष्टि से देखा जाए तो आरक्षण के बावजूद दलित-बहुजनों का समुचित विकास नहीं हो पाया है। अभी भी बहुलांश इसके लाभ से वंचित हैं। सभी को मौका मिले इसके लिए उपवर्गीकरण के सुझाव पर आपका क्या कहना है?

सुरज भान कटारिया (एस.बी. कटारिया) – जी हां, संवैधानिक आरक्षण के बावजूद मौजूदा समय में दलित वर्ग की स्थिति दयनीय है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी ने संविधान में पहले दस वर्षों तक आरक्षण की बात कही, परंतु राजनीतिकरण के कारण दस साल से फिर दस साल करते करते यह आज तक लागू है लेकिन दलित समाज में कोई खास बदलाव नहीं आया है, वह वहीं का वहीं है। हां, राजनीति में कुछ परिवारों का जरूर बोलबाला बढ़ा, किंतु अन्य क्षेत्रों उद्योग, व्यापार में इस वर्ग की मौजूदगी व स्थिति ना के बराबर है। दलित समाज के बुद्धिजीवियों को इस पर सोचना चाहिए और राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर चिंतन करना चाहिए।

कु.स. : दलित समाज का एक तबका उत्तर प्रदेश में मायावती से नाराज चल रहा है। कमोबेश हर राज्य में नाराजगी देखने को मिल रही है। क्या दलित समाज को नए नेतृत्व की दरकार है?

एस.बी. कटारिया : सन 2019 के लोकसभा चुनाव में दलित-बहुजन समाज ने एकजुट होकर मोदी सरकार को वोट दिया, समर्थन दिया। दलित राजनीति का केंद्र उत्तर प्रदेश में 2019 ही नहीं 2014 में भी मोदी को वोट दिया और बहुजन समाज पार्टी (सपा) उत्तर प्रदेश की 17 आरक्षित सीटों सहित सभी सीटें हारी। बिहार में रामविलास पासवान की लोजपा ने 2014 व 2019 में भी सफल प्रदर्शन किया। पहली बार महाराष्ट्र के रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के नेता रामदास अठावल मोदी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बने। देश के सबसे बड़े पद राष्ट्रपति सहित हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार में दलित राज्यपाल नियुक्त हुए। यह दलित सशक्तिकरण के मुख्य उदाहरण हैं।

कु.स. : जाति आधारित जनगणना पर आपकी क्या राय है?

एस.बी कटारिया : सरकार 2021 में जाति आधारित जनगणना कराने जा रही है। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आधुनिक तकनीक से इसे कराने की घोषणा की थी ताकि साफ हो जाए कि किस जाति की वास्तविक संख्या क्या है।

सूरजभान कटारिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अनुसूचित जाति मोर्चा, भाजप

कु.स. : अति पिछड़ी जातियों की एक बड़ी समस्या भूमिहीनता की है। बिहार सहित कई अन्य राज्यों में दलित भूमिहीनों को भूमि देने की योजनाएं हैं। क्या राष्ट्रीय स्तर पर कोई पहल की जा सकती है?

एस.बी कटारिया : दलितों की स्थिति लगभग सभी जगह एक जैसी भूमिहीन ही है। जहां थोड़ी बहुत है भी वहां स्थानीय दंबगों के कारण जमीन पर वास्तविक अधिकार से वंचित हैं। कृषि भूमि के अलावा आवासीय भूमि के वास्तविक आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कई भाजपा शासित राज्यों में दलितों के लिए आवासीय योजनाओं के साथ कृषि भूमि के लिए कार्य हो रहा है, लेकिन सच यह भी है कि केंद्र व राज्यों में इसको लेकर ठोस नीति नहीं बनी है, इस पर काम करने की बहुत जरूरत है।

कु.स. : नई तकनीकों के आने के कारण पारंपरिक पेशे खत्म हो रहे हैं। इसका सीधा असर शिल्पकार जातियों पर पड़ रहा है। शिल्पकार समाज जिनमें लोहार, कुम्हार आदि जातियां शामिल है, को बदलती जरूरतों के हिसाब से सशक्त बनाने की जरूरत क्या आप महसूस नहीं कर रहे हैं?

एस.बी कटारिया : नयी तकनीकी व्यवस्था का परिणाम है कि लोहे का काम करने वाले लोहार की बजाय यह काम अब टाटा करने लगा है। वह बड़ा लोहार हो गया है। इसी तरह चमड़े का काम करने वाले चमार की जगह यह काम बाटा करने लगा है। वह बड़ा चमार हो गया है। सफाई का ठेकेदार सुलभ इंटरनेशनल जैसी संस्थाएं हो गयी हैं जबकि  पारंपरिक पेशे से हमारी जातिगत व्यवस्थाएं जुड़ी हुई थीं। बदलाव आया है लेकिन रोजाना सीवर सफाई के दौरान दलित वाल्मीकि वर्ग से आने वाले सफाईकर्मियों की हो रही मौत बड़ा सवाल है। इसका तोड़ निकालना जरूरी है।

कु.स. : सरकार की कौशल विकास केंद्र योजना एक महत्वपूर्ण योजना थी जिनमें शिल्पकार समाज के लोगों का कौशल विकास संभव था लेकिन अब यह योजना फेल होती दिख रही है। आखिर इसकी क्या वजह है?

एस.बी कटारिया : हमारी सरकार के द्वारा कौशल विकास केंद्र योजना में वास्तविक रूप में शिल्पकारों के लिए काफी कुछ था, इसमें मांग बढ़ने के कई अवसर थे, लेकिन अपेक्षित तरीके से कार्य नहीं हो पाया। इस योजना में कई खामियां सामने आयी हैं। मोदी सरकार जल्द ही कौशल विकास केंद्र के लिए नई सुदृढ़ योजना ला रही है जिसके माध्यम से समाज में नया सकारात्मक संदेश जाएगा।

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कु.स. : आजकल सरकारी नौकरियों से अधिक निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर हैं लेकिन अभी तक सरकार द्वारा निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है?

एस.बी कटारिया : दलित उद्यमियों का मुख्य संगठन ‘डिक्की’ से जुड़कर दलित वर्ग के लोग लघु उद्यमी बन रहे हैं। मोदी सरकार ने इसके लिए प्रयास किया और साथ ही छोटे संस्थानों में दलितों की भागीदारी हो, इस दिशा में काम आगे बढ़ाया है। निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग काफी समय से चल रही है। जब छोटे लघु उद्यमी स्वयं रोजगार की ओर बढ़ेंगे तो शायद आरक्षण से ऊपर उठकर सोचा जा सकता है। इसके लिए मोदी सरकार प्रयासरत है।

कु.स. : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने एससी व एसटी के आरक्षण में क्रीमीलेयर का प्रावधान जोड़ने की बात कही है। इससे आप कितना सहमत हैं?

एस.बी कटारिया : मनोहर लाल खट्टर ने एससी/एसटी के आरक्षण में क्रीमीलेयर की बात पिछले दिनों की है। इसका कई जगहों पर पार्टी संगठन में भी विरोध हुआ है और यह विषय अभी शैक्षिक संस्थाओं तक ही है। मेरा मानना है कि इससे समाज बटेगा, यह नहीं होना चाहिए। सरकार इस पर पुर्नविचार करेगी।

कु.स. : संत रविदास के ऐतिहासिक मंदिर को टूटने से बचाया जा सकता था। इस पूरे प्रकरण पर आपका क्या कहना है?

एस.बी कटारिया : संत गुरु रविदास के तुगलकाबाद स्थित 600 वर्ष पुराने मंदिर को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर तोड़ा गया। यह दुर्भाग्यपुर्ण था, देश-दुनिया में खासकर रविदासी समाज ने इस पर रोष जताया। केंद्र सरकार से हम सभी ने इस मामले का हल निकालने के लिए आग्रह किया और केंद्र सरकार ने राजनीति से ऊपर उठकर समाजहित में न्यायालय से पुनः रविदास मंदिर को बनबाने का रास्ता तैयार किया। वहां जल्द रविदास मंदिर, सरोवर व संत समाधि स्थापित होगी।

(संपादन : नवल)


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