संविधान में राजनीतिक न्याय अहम, महिला समानता की चिंता, हैदराबाद दलित सम्मेलन टला

संविधान ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से देश के नागरिकों को मजबूत किया है। लेकिन इसकी राह में कई बार चुनौतियां पेश आती हैं। लखनऊ में इन चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। देश के दूसरे अन्य शहरों और संस्थानों में और भी कई महत्वपूर्ण आयोजन आगामी दिनों में होने जा रहे हैं

संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर की चिंताएं

आगामी 26 नवंबर को संविधान दिवस[1] के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों के तहत बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ ने भारतीय संविधान और सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय: मुद्दे और चुनौतियां विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की है।

संविधान के बारे में बाबा साहब आंबेडकर की मुख्य चिंताओँ और सोच पर जोर देते हुए आयोजकों ने सेमिनार की अवधारणा में कहा है कि भारत एक लिखित संविधान और कानून के शासन द्वारा संचालित लोकतंत्र है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू किया जाना न केवल भारत के राजनीतिक इतिहास में, बल्कि भारत के सामाजिक निर्माण के इतिहास के लिहाज से भी उल्लेखनीय अवसर था। आंबेडकर के विचारों पर आधारित संविधान ने भारतीय समाज में लंबे समय से प्रचलित सामाजिक दासता, भेदभाव, वंचना को पहचाना और भेदभाव से मुक्त होने की ओर लोगों को अग्रसर किया। संविधान ने भारतीय उपमहाद्वीप में मानव कल्याण और विकास के नए रास्ते खोले। इससे न केवल नागरिकों/ लोगों को जीवन, स्वतंत्रता, समानता और न्याय का अधिकार मिला बल्कि वंचितों को सकारात्मक तरीकों से सुरक्षा भी प्रदान की।

फिर भी कहना गैरवाजिब नहीं कि संविधान लागू होने के लगभग 70 वर्षों के बाद भी, संविधान में निर्धारित कई लक्ष्यों को हासिल किया जाना बाकी है। संगोष्ठी में इस पृष्ठभूमि को परखना और संविधान के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक, आर्थिक और राजनीति पर विचार-विमर्श करना है।

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ।

सेमिनार के उप विषय हैं- 1. संविधान में परिकल्पित लक्ष्यों को प्राप्त करने में  भारत सरकार की भूमिका,  2. समानता का अधिकार बनाम समान सामाजिक मानक, 3. मुफ्त और अनिवार्य मौलिक अधिकार के परिप्रेक्ष्य में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का अधिकार, 4. सतत विकास लक्ष्य 2030 और भारतीय संविधान, 5. निरक्षरता और राजनीतिक न्याय, 6. राजनीतिक न्याय के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनौतियां, 7. सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों को पाने के लिए न्याय, 8. भारतीय संविधान के तहत कानून और सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक न्याय के नियम, 9. आरक्षण नीति के तहत सामाजिक आर्थिक न्याय पर परस्पर विरोधी दावे, 10. भारत में संवैधानिक नीति और पारिस्थितकीय न्यायशास्त्र, 11. भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों से संदर्भित संवैधानिक पहलू, 12. सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए लैंगिक समानता और समान अवसर, 13. भारत में भोजन और कुपोषण, 14. विज्ञान और तकनीकी युग में मौलिक स्वतंत्रता।


कार्यक्रम में भाग लेने के लिए देश के बौद्धिक तबके, अकादमिक जगत से जुड़े लोगों, शोधार्थियों, शिक्षकों और छात्रों का आह्वान किया गया है। इस बारे में अपना शोधपत्र या आलेख 20 नवंबर 2019 तक भेजा जा सकता है। ईमेल पता है : seminarlawbbau26@gmail.com। कार्यक्रम के संरक्षक संजय सिंह हैं जबकि निदेशक हैं सुदर्शन वर्मा। इस बारे में अनीस अहमद- 9453287957, डॉ. प्रदीप कुमार- 9451778682, डॉ. मुजीबुर रहमान- 7084459912 से संपर्क किया जा सकता है। एस.डी. शर्मा, डॉ. संजीव चड्ढा, डॉ. सूफिया अहमद (छात्र संयोजक) नीतेश चतुर्वेदी- 9628883947, इरशाद अहमद- 933528293 से भी संपर्क किया जा सकता है।

महिलाओँ के लिए समानता की चिंता

आदिवासी, दलित, पिछड़ों और महिलाओँ को लेकर चिंतन-मनन करने के मकसद से पी.डी. कॉमर्स एंड आर्ट्स कॉलेज, रायगढ़ छत्तीसगढ़ ने आगामी 22 नवंबर 2019 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। इसका विषय नारीवाद और महिला सशक्तिकरण: लिंग समानता के लिए राहें रखा गया है। इसे कॉलेज के अंग्रेजी और आईक्यूएसी विभाग ने आयोजित किया है।

संगोष्ठी की संयोजक हेमकुमारी पाटिल ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में महिलाओं के लिए समानता की अवधारणा को परिभाषित किया गया है। संविधान न केवल महिलाओं को समान अधिकार देता है, बल्कि राज्य को महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव के उपायों को अपनाने का अधिकार देता है। हाल के वर्षों में महिलाओं के सशक्तिकरण को महिलाओं की स्थिति के निर्धारण में केंद्रीय मुद्दे के रूप में मान्यता दी गई है, फिर भी एक तरफ संविधान में दिए गए लक्ष्य और दूसरी ओर जमीनी हकीकत के बीच एक व्यापक अंतर मौजूद है। राष्ट्रीय स्तर पर यह संगोष्ठी विद्वानों, प्रोफेसरों और छात्रों को महिला कल्याण से संबंधित मुद्दों और महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करने का एक प्रयास है। नारीवाद की भूमिका को उजागर करने और उपचार के उपायों को लेकर सुझाव देने के अलावा, संगोष्ठी का उद्देश्य विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और सामान्य रूप से लैंगिक समानता की दशादिशा का विश्लेषण करना है।


संगोष्ठी में महिला सशक्तिकरण के किसी भी पहलू चाहे वह सामाजिक, राजनीतिक हो, चाहे वह महिलाओं को सजग करने के मामले में हो, या फिर मीडिया के जरिए बनती छवि हो, इन सब पर संगोष्ठी में शोध आलेख पढ़े जा सकते हैं।

संगोष्ठी के रिसोर्स पर्सन्स हैं- डॉ. के.पी. सिंह, अंग्रेजी और विदेशी भाषा विभाग, (श्रीश्री विश्वविद्यालय, कटक, उड़ीसा), डॉ. सी. मिश्रा, प्रोफेसर, अंग्रेजी (आरबीआर एनईएस पीजी कॉलेज जशपुर), डॉ. संजय सिंह, प्रोफेसर, मानविकी विभाग, (ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़), डॉ. प्रसेनजीत पांडा, प्रोफेसर अंग्रेजी और विदेशी भाषा विभाग (गुरु घासीदास विश्व विद्यालय बिलासपुर)। अधिक जानकारी के लिए hemkpatel.raigarh@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। संयोजक का मोबाइल नंबर है- 8452055077

वाणिज्य और व्यवसाय की सफलता

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वाणिज्य और व्यवसाय प्रशासन विभाग ने 8 और 9 फरवरी 2020 में इनोवेशन एंड फ्यूचरिस्टिक प्रेक्टिसेस इन बिजनेस एंड मैनजमेंटविषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार व सम्मेलन आयोजित किया है। आयोजन समिति और संचालक और संयोजक ने बताया कि इस सेमिनार के जरिए नवाचार और भविष्य की संभावनाओँ को तलाशा जाएगा। निश्चित ही मौजूदा समय में व्यापार के संसार में जितनी ज्यादा गतिशीलता दिखती है वह अंदर से उतना ही अशांत भी है। इसे लेकर हितधारकों की अपेक्षाओं को भी संतुष्ट करने की आवश्यकता है। व्यवसाय चलाने वाली अग्रणी संस्थाओँ और प्रबंधकों को परिवर्तन और डिजाइन नीतियों और चुनौतियां का पूर्वानुमान लगाने और विकसित होने के लिए विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, व्यापार प्रतिनिधियों, उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और नीति निर्माताओं को एक मंच प्रदान करना है ताकि वे विचारों और विचारों का आदान-प्रदान कर सकें। आयोजक मानते हैं हमें उद्देश्यों पर फोकस करके आगे बढ़ने की जरूरत है।

इस संबंध में सभी क्षेत्रों खासकर व्यावसायिक शिक्षा के प्रबंधन से जुड़े उद्यमियों, छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों से आलेख और शोध पत्र मंगाए गए हैं। इसमें सबसे बेहतरीन शोध आलेख प्रस्तुत करने वाले को खासतौर से सम्मानित किया जाएगा। सम्मेलन के प्रमुख उपविषय हैं – मानव संसाधन प्रबंधन, मार्केटिंग मैनेजमेंट, वित्तीय प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, उद्यमिता-स्टार्टअप्स, कारपोरेट का सामाजिक उत्तरदायित्व, एनजीओ प्रबंधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कॉरपोरेट गवर्नेंस, ज्ञान प्रबंधन, एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट, अर्थशास्त्र, पर्यटन, ग्रामीण प्रबंधन, ग्रीन प्रेक्टिसेस, हेल्थकेयर प्रबंधन, कराधान व लेखा, समावेशी विकास, शहरी विकास और डिसिजन साइंस।

महत्वपूर्ण तिथियां – आलेख और शोधपत्र का सार जमा करने की अंतिम तिथि 5 दिसंबर 2019 है। 12 दिसंबर तक सार की स्वीकृति के बारे में सूचना भेजी जाएगी। पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 दिसंबर 2019 है। पूर्ण पेपर भेजने की अंतिम तिथि 10 जनवरी 2020 निर्धारित की गई है। शोध पत्र भेजने या अधिक जानकारी के लिए confmonirba@allduniv.ac.in पर संपर्क किया जा सकता है। सेमिनार के बारे में प्रो. ए.के. सिंघल- मोबाइल: 9335156634, डॉ. शेफाली नंदन. मोबाइल: 9919715535 पर भी संपर्क किया जा सकता है। डाक पता है-

सम्मेलन सचिवालय वाणिज्य और व्यवसाय प्रशासन विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज- 211002 उत्तर प्रदेश। पंजीकरण फॉर्म www.allduniv.ac.in वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।

ताकि गुणवान हो यूथ लीडरशिप

जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर ने 17-18 जनवरी को दो दिवसीय यूथ-2025, रिइमेंजिग लीडरशिप फॉर ए ग्लोबल लीडरशिप विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है। संस्थान का यह सातवां सम्मेलन हैं और दावा किया गया है कि इस सम्मेलन के जरिए देश और दुनिया को अब तक कई प्रतिभाएं मिली हैं।

सम्मेलन के विषय-बिंदु से ही साफ है कि अगले दशक के उद्योग और समाज को चलाने वाले हुनरमंद प्रबंधक और लीडर तैयार किए जा रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, लीडरशिप का इतिहास अनेक तरह के सिद्धांतों से पटा है। इनमें एक सिद्धांत “महान पुरुष” के होने से जुड़ा है जो कहता है कि कुछ शख्स ऐसे होते हैं जिनमें नेतृत्व करने की क्षमता स्वाभाविक रूप से होती है- यानी उनमें जन्मजात ही ऐसे आवश्यक लक्षण मौजूद होते हैं, जो आसानी से सबको अपने साथ कर लेते हैं। कुछ के लिए उनकी परिस्थिति है, जो उनको स्वाभाविक लीडर बना देता है। अभी जबकि व्यवसाय प्रौद्योगिकी नवाचारों में तेजी से वृद्धि हुई और उसका स्वरूप वैश्विक हो गया है, सिखाने वाले संगठन भविष्य के नेताओं की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन और फिर से कल्पना कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति विशेष में कैसे लीडरशिप के गुण विकसित की जा सकती है। व्हार्टन यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी इसके बजाय कि निर्देशों का पालन करें, वे लाभ और कामकाज में अधिक स्वामित्व चाहते हैं। इसी तरह ग्राहक महज खरीदार नहीं बल्कि  विपणन और विकास प्रक्रियाओं का हिस्सा बनना चाहते हैं। संस्थान या समाज को राह दिखाने वाले लीडर का भी नजरिया बदला है, जिसमें उसकी सोच बनी है कि कुछ भी कहीं बदलता है उसके लिए सीखने वालों को शीर्ष में बैठे लोगों से अंतर्दृष्टि मिलती है। इसका एक अर्थ यह है कि कोई भी अराजक और निरंकुश लीडर, चाहे जितना प्रतिभावान हो, वह सफल नहीं होगा। विनम्र, अनुकूलनीय, दूरदर्शी और घुलमिलकर रहने वाले दक्ष लोगों ने सुस्त लीडर को अलग-थलग कर दिया है। आंतरिक और बाहरी हितधारकों के रिश्ते मिल रहे हैं, नए सिरे से परिभाषित हो रहे हैं। यह बिना कारण नहीं है कि हेनरी मिंटबर्ग ने हिमायत की है कि, ‘उदात्त नेतृत्व’ के दिन चले गए हैं, और ‘सुलझे प्रबंधन’ का समय आ गया है। ऐसे में नेतृत्व के बारे में पुनर्कल्पना के तत्व क्या हैं? अशांत और अनिश्चित दुनिया में भविष्य को लेकर भी फिर से क्या कल्पनाएं की जा सकती हैं? युवा लीडर बनने के लिए क्या कर सकते हैं ताकि उनको विश्व स्तर पर मान्यता और पहचान मिले? निपुण प्रबंधकों को कैसे यकीन हो सकता है कि उनकी मेहनत से अर्जित ज्ञान और विशेषज्ञता से आगे कुछ नहीं है? इस अंतर्राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का उद्देश्य इस सबको देखना है। इन सवालों पर मंथन और नए का पता लगाना, ‘कमांड और कंट्रोल’ करने वाली की, नेतृत्व शैलियों को अभी भी गहनता से देखे जाने की जरूरत है।

संस्थान ने छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों से आलेख और प्रपत्र मंगाए हैं। डॉ. प्रभात पंकज, डॉ. कविता पाठक, डी.एन. पांडे, डॉ. हर्ष हलवे, डॉ. आशीष चंद्रा जैसी देशभर की जानी मानी हस्तियां इसमें शिरकत कर रहे हैं। इसके अलावा देश-विदेश से ह्यूस्टन विश्वविद्यालय, टेक्सास, हॉपकिंस विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के अलावा दिल्ली, हैदराबाद मुंबई के विषय जानकार लोग इसमें शामिल होंगे या फिर इसके संचालन को देखेंगे। सम्मेलन के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉ. अन्वय भार्गव- मोबाइल: 94149 26623, ईमेल: anvay.bhargava@jaipuria.ac.in, डॉ. रितिका महाजन- मोबाइल: 78302 93632, ईमेल: ritika.mahajan@jaipuria.ac.in रिधिमा भगत- मोबाइल: 76652 57777 ईमेल: ridhima.bhagat@jaipuria.ac.in पर संपर्क किया जा सकता है। बता दें कि आयोजक संस्था से जुड़े संस्थान कई सालों से इंदौर, नोएडा, लखनऊ और जयपुर में चल रहे हैं।

हैदराबाद का दलित सम्मेलन स्थगित

मुख्य अतिथि प्रोफेसर हेन्स वेसलर (उपासला विश्वविद्यालय, स्वीडन) को भारत के लिए वीजा ना मिलने के कारण हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित-आदिवासी अध्ययन एवं अनुवाद केंद्र और हिंदी विभाग के संयुक्त रूप से भारतीय दलित साहित्य के मुद्दे और चुनौतियां विषय पर 15 नवंबर 2019 को आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार को स्थगित करने की घोषणा की है। इस सम्मेलन में दक्षिण भारतीय भाषाओं में दलित साहित्य के मुद्दे एवं चुनौतियां (तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम के विशेष संदर्भ में) और भारतीय भाषाओं के मुद्दे एवं चुनौतियां (हिंदी, मराठी, गुजराती, बांग्ला, ओड़िया, उर्दू के विशेष संदर्भ में) पर विचार किया जाना था।

इसी कॉलम में हमने पिछले हफ्ते इस सम्मेलन को लेकर सूचना दी थी। आयोजक समिति के सेतु वर्मा ने कहा कि मुख्य अतिथि को समय पर वीजा नहीं मिल पाने के कारण उनका भारत आगमन संभव नहीं हो पाया, इसलिए 15 नवंबर को प्रस्तावित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार को स्थगित किया जा रहा है। सम्मेलन की आगामी संभावित तिथि क्या हो सकती है इस बारे में setukverma@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

ऊर्जा पर जादवपुर में विश्वसम्मेलन

जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता ने 14-15 फरवरी, 2020 को ऊर्जा और स्थायी विकास– 2020” विषय को लेकर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आय़ोजित किया है। जादवपुर विश्वविद्यालय ने इसे मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के साथ मिलकर आयोजित किया है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना में आयोजकों ने कहा है कि आज दुनियाभर में औद्योगिक और संचार प्रौद्योगिकियों की उन्नति के कारण बिजली की खपत में तेजी से वृद्धि हुई है। कई तरह के ऊर्जा स्रोतों से बिजली का उत्पादन हो रहा है। परिणामस्वरूप हुआ यह है कि हमारी उन्नत सभ्यता पर्यावरण की हिफाजत के लिए बड़ा सवाल बन गई है। इससे पृथ्वी की स्थिरता संदिग्ध हो चली है। सतत् विकास की अवधारणा ऊर्जा के ही निरंतर विकास पर टिक गई है। लेकिन यह भी है कि बिना बिजली के विकास करना संभव नहीं हो रहा है। विकास के लिए बिजली स्रोतों तक हमारी पहुंच हमारे जीवन की गुणवत्ता को माप रही है। हमारे जीवन की बड़ी धुरी ऊर्जा पर टिक गई है। हमारा विकास ऊर्जा पर निर्भर माना जा रहा है। यह कार्यक्रम इस मायने में एक ऐसा मंच दे सकता है, जहां शोधकर्ता, शिक्षाविद और औद्योगिक हितधारक स्थायी भविष्य के लिए ऊर्जा उपयोग करने के लिए अपनी चुनौतियों और मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

सम्मेलन के उप-विषय हैं मॉडलिंग, सिमुलेशन और ऊर्जा प्रणालियों का विकास, ऊर्जा अनुप्रयोगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हीट ट्रांसफर/ ऊर्जा का प्रसार, बैटरी और ऊर्जा का भंडारण, स्वच्छ ऊर्जा रूपांतरण के लिए प्रौद्योगिकी, हीटिंग, थर्मल भंडारण और भूतापीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा दक्षता, इमारतों में ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा की मांग, भविष्य के रुझान और इसके पर्यावरणीय प्रभाव, स्थिरता के लिए ऊर्जा शिक्षा, ऊर्जा प्रबंधन नीति, ऊर्जा नवाचार के लिए सामग्री अनुसंधान, ऊर्जा प्रणालियों का अनुकूलन, अक्षय और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा उत्पादन के उप-उत्पादों के लिए समाधान, सतत खपत, रिसाइक्लिंग और ताप का दबाव, परिवहन प्रौद्योगिकी और प्रबंधन, जल संरक्षण और प्रबंधन।

सम्मेलन के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2020 है। छात्र और शोधार्थी इस बारे में अधिक जानकारी के लिए प्रोफेसर हिमाद्री चट्टोपाध्याय से chimadri@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं। डाक पता है- प्रोफेसर हिमाद्री चट्टोपाध्याय (सम्मेलन सचिव) मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता 700032

(कॉपी संपादन : नवल/सिद्धार्थ)

[1] भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ। इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष 2015 में हुई।


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

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