छत्तीसगढ़ में सीएम बेटे के खिलाफ सीनियर बघेल, राम मंदिर का बोर्ड हटा बताया बौद्ध विहार

नंद कुमार बघेल के अनुसार लोग राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ थे। तुमाखुर्द के जिस जगह पर राम-लक्ष्मण की मंदिर बनाने की योजना राज्य सरकार ने बनाई थी लोगों ने वहां अशोक स्तंभ स्थापित कर बौद्ध विहार का शिलालेख लगा दिया है। तामेश्वर सिन्हा की खबर

आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके पिता नंद कुमार बघेल के बीच ठन गई है। एक तरफ सीएम पूरे राज्य में राम वनगमन परिपथ का निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैैं तो उनके खिलाफ अब उनके पिता नंद कुमार बघेल ने ही मोर्चा खोल दिया है।  छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अंतर्गत तुमाखुर्द गांव में सीनियर बघेल ने बीते 18 मई, 2020 को हाल ही में राज्य सरकार द्वारा लगाये गये राम मंदिर के बोर्ड को गांववालों की सहायता से हटाकर बौद्ध विहार का बोर्ड लगवा दिया तथा बुढ़ादेव आर्युर्वेद चिकित्सा अनुसंधान केन्द्र का शिलान्यास किया।

गौरतलब है कि तुमाखुर्द गांव में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम-लक्ष्मण का मंदिर बनाने के लिए जगह का चयन किया गया था। यह राज्य सरकार के द्वारा चिन्हित उन 52 स्थलों में एक है जहां मंदिर आदि का विकास कर पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है।  

राम-लक्ष्मण मंदिर के बदले बौद्ध विहार की स्थापना के संबंध में सीनियर बघेल ने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी किया। इसके मुताबिक, तुमाखुर्द गांव में बुढ़ादेव (गोंड परंपरा में बड़ा देव) आर्युर्वेद चिकित्सा अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की जाएगी। इसका शिलान्यास 18 मई को किया गया है। इस मौके पर मतदाता जागृति मंच के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण आदिवासी क्षेत्र के अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे। विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि बस्तर में जड़ी-बूटी अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की मांग गोंड आदिवासियों की मांग लंबे समय से रही है। 

गांव वालाें के साथ बुढ़ादेव बौद्ध विहार की स्थापना के समय नंद कुमार बघेल

सीनियर बघेल की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक गोंड आदिवासी, सिन्धु घाटी की सभ्यता के अंग थे परन्तु करीब पांच हजार साल पहले ब्राह्यणों के आगमन होते ही वे गुलाम बना दिए गये। 

ध्यातव्य है कि नंदकुमार बघेल पिछले दो दशकों से सांस्कृतिक जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इस क्रम में उन्होंने “ब्राह्मण कुमार रावण को मत मारो” शीर्षक किताब की रचना भी की। 

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नंद कुमार बघेल के अनुसार, बहुत सारे कार्यकर्ता और गोंड़ और अनुसूचित जनजाति के लोग राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ थे। तुमाखुर्द के जिस जगह पर राम-लक्ष्मण की मंदिर बनाने की योजना राज्य सरकार ने बनाई थी, वहां गांव के लोगों ने अशोक स्तंभ स्थापित कर बौद्ध विहार का शिलालेख लगा दिया है।

तुमाखुर्द के इस स्थल पर हाल ही में राम-लक्ष्मण की छोटी प्रतिमा रख दिया गया; स्थानीय आदिवासियों के मुताबिक यह पत्थर का स्तंभ उनके पुरखों का प्रतीक है

सीनियर बघेल के उपरोक्त पहल को लेकर लोग अब दो भाग में बंट गए हैं। मसलन, धमतरी जिले की बीजेपी की पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्यामा देवी साहू का कहना है कि “मुझे जानकारी नहीं थी कि राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ तुमाखुर्द गांव में आए थे। इस स्थल को लोग राम टेकरी कहते हैं। बाद में अचानक अयोध्या से कुछ शोधकर्ता आए और उन लोगों ने बताया कि यहां राम और लक्ष्मण आए थे। तभी मेरी पहल पर इस जगह को राम वनगमन पथ योजना के तहत चिन्हित किया गया था। लेकिन बीते 18 मई को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता वहां आए और ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्होंने बौद्ध विहार का बोर्ड टंगवा दिया। इस संबंध में मैंने अपनी तरफ से स्थानीय प्रशासन से लिखित शिकायत दर्ज कराया है।”

वहीं, अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय सचिव आर. एन. धुर्वे ने बताया कि “मैं 18 मई को तुमाखुर्द गांव में उपस्थित था। नंद कुमार बघेल जी चाहते हैं कि जहां राम वन गमन पथ बताकर मंदिर बनाने को सरकार आतुर है, वहां बुढ़ादेव आर्युर्वेद चिकित्सा अनुसंधान केन्द्र की स्थापना हो। नंदकुमार बघेल भी मानते हैं कि बस्तर के अमूल्य जड़ी-बूटियों का उपयोग चिकित्सा में किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने कहा है कि स्थानीय प्रशासन के साथ बातचीत कर आने वाले समय मे इस दिशा में कार्य किया जा सकता है। यह सभी के हित में होगा। वैसे भी हमारा हिंदू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। फिर सरकार के पास इसका कोई प्रमाण नहीं है कि तुमाखुर्द में कभी राम-लक्ष्मण यहां आए थे।”

(संपादन : नवल/अमरीश)

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