दलित-बहुजनों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे भंवर मेघवंशी, न्यायिक सेवा से जोड़ने का काम कर रहा सीईडीई

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के निवासी व दलित लेखक भंवर मेघवंशी इन दिनों दलित-बहुजन युवा उद्यमियों को सोशल मीडिया के जरिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। वहीं दलित युवा विधि जानकार अनुराग भास्कर युवाओं को न्यायिक सेवा में जोड़ने के लिए अभियान चला रहे हैं। पढ़ें गत सप्ताह की दलित-बहुजन से जुड़ी खास खबरें

बहुजन साप्ताहिकी

राजस्थान : अस्मिता से अस्तित्व की ओर

दलित-बहुजन युवाओं के रोजी-रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में दलित लेखक व विचारक भंवर मेघवंशी ने पहल की शुरुआत की है। उन्होंने फेसबुक पर ऐसे उद्यमियों के बारे में लोगों को बताना शुरू किया है जो दलित-बहुजन हैं। अपने प्रयास के बारे में पूछने पर उन्होंने फारवर्ड प्रेस से बातचीत में बताया कि इस तरह के प्रयास के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब कई लोग सामने आ रहे हैं जो कहीं न कहीं अपने स्तर से स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने इसे “अस्मिता से अस्तित्व की ओर” कहा है। मेघवंशी ने बताया कि इस तरह का प्रयास वे पहले से करते रहे हैं। वर्ष 2017 में जयपुर में उन्होंने डॉ. एम. एल. परिहार के साथ मिलकर “भीम बिजनेस एक्सपो” का आयोजन किया था। इस आयोजन में राजस्थान के अलग-अलग जिलों से दलित-बहुजन उद्यमी शामिल हुए थे। दलित-बहुजन युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने व प्रोत्साहित करने के लिए डॉ. परिहार ने एक किताब भी लिखी, जिसका शीर्षक है– “दलितों बिजनेस की ओर बढ़ो”।

मेघवंशी ने बताया कि वे बुद्ध बिजनेस नेटवर्क, आंबेडकर बिजनेस काउंसिल और डिक्की आदि संस्थानों से जुड़े रहे हैं। दलित-बहुजन उद्यमियों की सहायता के लिए इन संस्थाओं के माध्यम से आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आज दलित-बहुजनों को सामाजिक न्याय के साथ ही आर्थिक न्याय की भी आवश्यकता है। इससे उनके अस्तित्व को मजबूती मिलेगी और तब जीवन के हर क्षेत्र में उपस्थिति और प्रभावी होगी।

विधि का अध्ययन करने वाले दलित-बहुजन युवाओं के साथ है सीईडीई

न्यायिक व्यवस्था में दलित-बहुजनों की भागीदार बहुत कम है। इसके लिए उन्हें विशेष प्रकार के शिक्षण व प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इस संबंध में एक पहल शुरू की गई है। इसे कम्युनिटी फॉर दी इरेडिकेशन ऑफ डिस्क्रिमिनेशन इन एजुकेशन एंड एंप्लॉयमेंट (सीईडीई) के रूप में ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए दलित-बहुजन युवाओं को विधि विषय से संबंधित जानकारियों के अलावा प्रोफेशनल के रूप में अपने आपको कैसे विकसित करें, इसके बारे में बताया जाता है। 

दलित लेखक भंवर मेघवंशी व युवा दलित विधि विश्लेषक अनुराग भास्कर

इस संबंध में युवा विधि विश्लेषक अनुराग भास्कर ने बताया कि संविधान लागू होने के सात दशक बाद भी शासन-प्रशासन व न्यायिक क्षेत्र में दलितों, आदिवासियों, ओबीसी, घुमंतू जातियों, अल्पसंख्यकों, ट्रांसजेंडर समुदायों, विकलागों और पूर्वोत्तर के लोगों की भागीदारी बहुत कम है। सीईडीई की शुरूआत विधि व वकालत के पेशे में युवओं को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है। इसके तहत राष्ट्रव्यापी वकीलों, विधि विशेषज्ञों का एक नेटवर्क तैयार किया गया है जो युवाओं की मदद करते हैं। इसके अलावा केंद्रीय स्तर पर एक फेलोशिप भी चलाया जा रहा है जिसके तहत हम हाशिए पर रहने वाले युवाओं का चयन करते हैं और उन्हें उच्च अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

मध्य प्रदेश में ओबीसी के पदों पर सवर्णों की नियुक्ति, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने लिया संज्ञान

मध्य भारत के राज्य मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के संबंध में बड़ी धांधली का मामला प्रकाश में आया है। दरअसल, नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत केंद्र संपोषित योजना के तहत राज्य में स्टेट हेल्थ मिशन के द्वारा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के 2850 पदों पर बहाली की जा रही है। इस संबंध में ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को एक शिकायत भेजी गई थी कि इसमें ओबीसी आरक्षण को लागू नहीं किया जा रहा है और ओबीसी के लिए आरक्षित पदों पर सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों की बहाली की जा रही है। एनसीबीसी ने इस संबंध में गत 3 जून को एक निर्देश जारी किया है। इस आशय की जानकारी ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन से संबद्ध विनायक प्रसाद साह ने दी है। उन्होंने बताया कि एनसीबीसी ने राज्य सरकार को दस दिनों के भीतर पूरे मामले में जवाब मांगा है।

झारखंड में रूपा तिर्की के लिए न्याय की मांग

गत 3 मई, 2021 को झारखंड के साहिबगंज में एक आदिवासी महिला पुलिस अधिकारी रूपा तिर्की की संदिग्ध मौत की जांच की मांग को लेकर आवाज तेज होने लगी है। इस संबंध में पूर्व सांसद सालखन मूर्मू ने बताया है कि रूपा तिर्की की संदिग्ध मौत झारखंड की जनमानस के लिए गंभीर दुख, चिंता और संदेह का मामला बना हुआ है। आम जनता, सामाजिक-राजनीतिक संगठन रूपा तिर्की को न्याय देने और सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार इस गंभीर मामले पर चुप्पी साध कर पूरे मामले को किसी षड्यंत्र के तहत रफा-दफा करने की कोशिश में प्रतीत होती है। रूपा तिर्की के मामले पर उनके परिजनों ने मान्य झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा दिया है। मूर्मू ने आरोप लगाया है कि एक गैर आदिवासी जो कि बारहेट विधानसभा क्षेत्र से विधायक व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विधायक प्रतिनिधि भी है, के दबाव में मामले को दबाया जा रहा है। मूर्मू ने बताया कि वे इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इसके पहले 12 जून 2020 को भोगनाडीह, साहिबगंज ज़िला में महान वीर शहीद सिदो मुर्मू के वंशज रामेश्वर मुर्मू की संदिग्ध मौत के मामले पर भी झारखंड सरकार ने सीबीआई जांच के नाम पर ठगने का काम किया है। 

भोपाल में विश्वकर्मा समाज ने ब्रह्मभोज पर लगायी रोक

मध्य प्रदेश के विश्वकर्मा (लोहे का औजार बनाने वाले शिल्पकार) समुदाय के लोगों ने मृत्यु के उपरांत ब्रह्मभोज पर रोक लगाने का ऐलान किया है। इसी क्रम में मेवाड़ समाज सुधार समिति के अध्यक्ष श्याम विश्वकर्मा ने बताया कि उनके चाचा की तेरहवीं के दिन उन्होंने भोज नहीं कराने का निर्णय लिया। उनके निर्णय को समुदाय के लोगों ने समर्थन दिया और एक स्वर में कहा कि इस तरह का भोज ब्राह्मणवादी पाखंड का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समुदाय ने यह भी निर्णय लिया है कि शादी-विवाह के मौके पर होने अत्यधिक खर्च के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

(संपादन : अनिल)


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