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पानी की बुंद-बुंद को तरसते बुंदेलखंड में आरक्षित सीटों का हाल

अपनी खास सांस्कृतिक, सामाजिक, भौगोलिक विशेषताओं के लिए जाना जानेवाला बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विस्तारित है। इस इलाके में बड़ी समस्या पानी की उपलब्धता की है। उत्तर प्रदेश में शामिल बुंदेलखंड की आरक्षित सीटों के बारे में बता रहे हैं सुशील मानव

उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड इलाके को दो संभागों में बांटा गया है। एक है– झांसी संभाग (झांसी, ललितपुर, जालौन) और दूसरा– चित्रकूट संभाग ( चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर)। तीसरे चरण में बुंदेलखंड इलाके के झांसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर जिलों कें 13 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है। इनमें उरई (जालौन), मऊरानीपुर (झांसी), महरौनी (ललितपुर), राठ (हमीरपुर) मिलाकर कुल 6 आरक्षित सीटें हैं। जबकि बुंदेलखंड पाठा क्षेत्र की बारा और नरैनी आरक्षित सीटों पर पांचवे चरण में मतदान होगा।

पहले बुंदेलखंड के सवालों पर एक नजर

नौजवान भारत सभा के जिला संयोजक भीमलाल बताते हैं कि बुदेलखंड के इलाकों में खनन माफियाओं के बोर डस्ट से जलाशय पट गए हैं। सिलिका सैंड की 4 राउंड धुलाई होती है, जिसमें पानी की काफी खपत होती है। इसके अलावा पहले सरकारी योजनाओं के तहत पहाड़ों पर मेड़बंदी करवाकर बारिश का पानी रोककर उनका भंडारण किया जाता था, अब मेड़बंदी नहीं करवाई जाती जिससे बारिश का पानी बह जाता है।

कपारी ग्रामसभा की पूर्व प्रधान रजवंता देवी बताती हैं कि क्षेत्र में जब जेपी प्लांट जब लगाया गया था तब जेपी पॉवर प्लांट के लिए लिए ही लोगों की जमीन अधिगृहित की गई थी, लेकिन बाद में प्लांट से निकलने वाली राख से सीमेंट बनाने का प्लांट भी कंपनी ने गुपचुप तरीके से लगा लिया। लोगों ने एकजुट होकर जब इसका विरोध किया तो तत्कालीन डीएम सुहास एल वाई ने सीमेंट प्लांट बंद करवाते हुए कहा कि प्लांट तो मैं बंद करवा दे रहा हूं, पर अब मैं यहां कितने दिन टिक पाउंगा, कह नहीं सकता। इसके कुछ दिन बाद ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के वर्तमान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने अवैध तरीके से बनाई गई जेपी सीमेंट प्लांट को फिर से चालू करवा दिया। 

वहीं संकल्प एनजीओ से जुड़े मूलचंद यादव बताते हैं कि कहने को तो जेपी पॉवर प्लांट और सीमेंट प्लांट में यमुना से पानी आता है, लेकिन हक़ीक़त इसके उलट है। वो बताते हैं कि कंपनी के अंदर 12 इंच व्यास के करीब डेढ़ हजार बोरिंग हैं, जिनकी गहराई 500-600 फीट तक है। भारी मात्रा में पानी के उपयोग के कारण जलस्तर बहुत नीचे चला जाता है और होता यह है कि इलाके के तमाम हैंडपम्प पानी छोड़ देते हैं। गर्मियों में जब पानी का संक़ट बढ़ जाता है तो पानी का टैंकर सिर्फ़ शहरी क्षेत्रों तक आता है, गांवों की परवाह नहीं की जाती है।

मऊरानीपुर विधानसभा में बेरोजगारी और पानी अहम सवाल

झांसी जिले में चार विधानसभा सीटें– झांसी सदर, बबीना, मऊरानीपुर और गोराठा है। मऊरानीपुर अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित है। कुल 4 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर  1.40 लाख दलित, 80 हजार यादव, 40 हजार ब्राह्मण, 40 हजार वैश्य, 30 हजार मुस्लिम, 25 हजार कुशवाह, 50 हजार अन्य मतदाता हैं। पिछली बार 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बिहारी लाल ने सपा की डॉ. रश्मि आर्य को 16971 वोट के अंतर से हराया था। 2022 विधानसभा चुनाव के लिये अपना दल (एस) ने रश्मि आर्या और सपा ने तिलक चंद्र अहिरवार, बसपा ने रोहित रतन और कांग्रेस ने भगवान दास कोरी को उम्मीदवार बनाया है। मुद्दों और समस्याओं की बात करें तो मउरानीपुर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। रोज़गार न होने के कारण युवाओं का बड़ी तादाद पलायन एक बड़ी समस्या है। गंदगी, पानी, सीवर जाम की समस्याएं आम हैं।

उरई विधानसभा में बदहाल कृषि 

जालौन जिले की 3 विधानसभा सीटें– माधौगढ़, कालपी, उरई है। उरई आरक्षित सीट है। उरई जिले का मुख्यालय भी हैं। उरई में कुल मतदाता 4,81,302 हैं। इनमें अनुमानित तौर पर सबसे ज़्यादा कोरी मतदाता 60 हजार, मुस्लिम मतदाता 50 हजार, निरंजन 50 हजार, लोधी 35 हजार, यादव 30 हजार व अन्य हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के गौरी शंकर (140,485 वोट) सपा के महेंद्र सिंह (61,606 वोट) को हराया था। बसपा के विजय चौधरी 57,541 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर थे। 2022 विधानसभा चुनाव के लिये कांग्रेस ने उर्मिला सोनकर खाबरी, भाजपा ने गौरीशंकर वर्मा, सपा ने दया शंकर वर्मा और बसपा ने सत्येंद्र प्रताप को टिकट दिया है। उरई कृषि उपज का व्यापारिक केंद्र है। यहां बेरोजगारी, गंदगी, पानी, सीवर जाम की समस्याएं आम हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के अलावा क्षेत्रीय अस्मिता अहम सवालों में शामिल हैं। सड़क और बिजली की दुर्दशा भी मुद्दों में शुमार हैं।

इलाहाबाद के बारा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल हरही गांव में सिर पर पानी ढोकर लाती एक महिला

राठ विधानसभा में गूंज रही ‘बेटी हमारी, बहु तुम्हारी’ 

हमीरपुर जिले में दो विधानसभा सीटें हैं– हमीरपुर सदर और राठ। राठ आरक्षित सीट है। 4 लाख मतदाताओं वाली इस सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां अनुमानित तौर पर 1 लाख राजपूत (लोधी) मतदाता और 80 हजार के क़रीब दलित मतदाता हैं। ब्राह्मण 40 हजार, कोरी 12 हजार, यादव 16 हजार, वैश्य 8 हजार, निषाद 13 हजार, मुस्लिम 20 हजार हैं। 

वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की मनीषा अनुरागी (147526 वोट) ने कांग्रेस के गयादीन  (42883) को हराया था। 2022 विधानसभा चुनाव के लिये भाजपा ने मनीषा अनुरागी को टिकट दिया है। कांग्रेस ने कमलेश वर्मा, बसपा ने प्रसन्न भूषण और  सपा ने चंद्रवती वर्मा को टिकट दिया है। सपा प्रत्याशी राजपूत चंद्रवती वर्मा गोहांड ब्लाक के इटौरा गंग गांव में दलित परिवार में जन्मी है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से बीपीएड चंद्रवती राष्टीय स्तर की स्विमिंग खिलाड़ी है। चंद्रवती वर्मा ने जालौन निवासी हेमन्त राजपूत से विवाह किया। चंद्रवती वर्मा का मायका दलित परिवार में है जबकि ससुराल राजपूत परिवार में है। राजपूत और दलित के बीच वैमनस्य वाली इस सीट पर अंतर्जातीय विवाह करने वाली सपा प्रत्याशी राजपूत चंद्रवती वर्मा के चलते पहली बार ‘बेटी हमारी, बहु तुम्हारी’ नारे से दोनों जातियों के बीच प्रेम और सौहार्द्र और नजदीकी बढ़ी है।

महरौनी विधानसभा में त्रिकोणीय संघर्ष

ललितपुर जिले में 2 विधानसभा सीटें हैं– ललितपुर व महरौनी। महरौनी आरक्षित सीट है। कुल 3,63,660 मतदाताओं वाली इस सीट पर सबसे ज्यादा वोट अहिरवार जाति के करीब 60 हजार मतदाता हैं। 50 हजार कुशवाहा, ब्राह्मण 20 हजार, ठाकुर 15 हजार, यादव 30 हजार, लोधी 48 हजार, कुर्मी 35 हजार, मुसलमान व खंगार पांच-पांच हजार मतदाता हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मनोहर लाल पंथ (159,291 मत) बसपा प्रत्याशी फेरन लाल अहीरवार (59,727 मत) को 99,564 मतों के भारी अंतर से हराया था। 2022 विधानसभा चुनाव के लिये बसपा ने महरौनी से किरन रमेश खटीक को, भाजपा ने मनोहर लाल पंथ, सपा ने राम विलास रजक और कांग्रेस ने बृजलाल खाबरी को उम्मीदवार बनाया है। 

नरैनी विधानसभा में मुकाबला बराबरी का

बांदा जिले में चार विधानसभा सीटें हैं– बांदा, तिन्दवारी, बबेरू और नरैनी। नरैनी आरक्षित सीट है। नरैनी निर्वाचन क्षेत्र में कुल 3 लाख 38 हजार 609 वोटर हैं मतदाता हैं, जिसमें 85 हजार दलित, 50 हजार ब्राह्मण, 33 हजार लोधी, 23 हजार यादव, 22 हजार कुर्मी, 20 हजार मुस्लिम, 20 हजार निषाद, 18 हजार ठाकुर, 15 हजार वैश्य, 10 हजार कुम्हार, 10 हजार पाल हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजकरण कबीर (92412 मत) ने कांग्रेस के भरत लाल दिवाकर (47405 मत) को हराया था। जबकि सपा सरकार के दौरान नेता प्रतिपक्ष रहे बसपा के कद्दावर नेता गयाचरण दिनकर को 44610 वोट के साथ तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। 2022 विधानसभा चुनाव के लिये भाजपा ने नगर पंचायत नरैनी की अध्यक्ष ओम मणि वर्मा को, सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष किरण वर्मा को, कांग्रेस ने एक शिक्षिका पवन देवी को और बसपा पूर्व मंत्री गया चरण दिनकर को टिकट थमाया है।

बारा विधानसभा में भाजपा की साख दांव पर

इलाहाबाद (प्रयागराज) जिले में कुल 12 विधानसभा हैं– फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, प्रतापपुर, हंडिया, मेजा, करछना, इलाहाबाद पश्चिम, इलाहबाद उत्तर, इलाहाबाद दक्षिण कोरांव और बारा। बारा आरक्षित सीट है और पाठा क्षेत्र के अंतर्गत आती है जहां पानी का संकट पलायन की वजह बनता है। क़रीब 3 लाख मतदाताओं वाली बारा विधानसभा के जातीय समीकरण को देखें तो यहां सबसे अधिक 1 लाख 20 हज़ार दलित-आदिवासी मतदाता है। 50 हज़ार पिछड़ी जाति व 50 हज़ार ब्राह्मण, 40 हज़ार मुस्लिम और इतनी ही अन्य जातियां है। 

2017 चुनाव में भाजपा उम्मीदवार डॉ. अजय कुमार (79202 वोट) ने सपा के अजय भारती (45165 मत) को 34053 मतों से हराया था। बसपा प्रत्यासी अशोक कुमार गौतम को 37052 मतों से संतुष्ट होना पड़ा था। बात 2022 चुनाव की करें तो कांग्रेस  ने मंजू संत और अपना दल ने वाचस्पति तथा सपा ने अजय मुन्ना को टिकट दिया है। जबकि बसपा ने मौजूदा विधायक और भाजपा छोड़कर बसपा में आये डा. अजय कुमार को टिकट दिया है। डा. अजय कुमार 2012 में सपा के टिकट पर विधायक बने थे।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

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