h n

द्रौपदी मुर्मू : भाजपा की बिसात का अपराजेय मोहरा

शायद, ममता बनर्जी की अपने लिए एक केंद्रीय जगह बनाने की महत्वाकांक्षा को विपक्ष की कीमत चुकानी पड़ी। हालांकि संख्या पहले विपक्ष के पक्ष में थी, लेकिन यह स्पष्ट है कि यशवंत सिन्हा को विपक्ष के वोट भी नहीं मिल सकते क्योंकि अधिकांश क्षेत्रीय दल उन्हें वोट देने से पहले दो बार सोचेंगे। बता रहे हैं विद्या भूषण रावत

बहस-तलब 

द्रौपदी मुर्मू को भाजपा और गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घाेषित किया है। जबकि विपक्ष ने उनके मुकाबले में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा है। फिलहाल जो परिस्थितियां हैं, वे इस संभावना को मजबूती प्रदान करती हैं कि मुर्मू भारत की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनेंगी। इस संभावना और इससे जुड़े राजनीतिक-सामाजिक पहलुओं पर विचार करने से पहले कुछ बातें हाल के घटनाक्रम की। हालांकि इन्हें भी इसी कड़ी में जोड़कर देखा जाना चाहिए।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : द्रौपदी मुर्मू : भाजपा की बिसात का अपराजेय मोहरा

लेखक के बारे में

विद्या भूषण रावत

विद्या भूषण रावत सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं। उनकी कृतियों में 'दलित, लैंड एंड डिग्निटी', 'प्रेस एंड प्रेजुडिस', 'अम्बेडकर, अयोध्या और दलित आंदोलन', 'इम्पैक्ट आॅफ स्पेशल इकोनोमिक जोन्स इन इंडिया' और 'तर्क के यौद्धा' शामिल हैं। उनकी फिल्में, 'द साईलेंस आॅफ सुनामी', 'द पाॅलिटिक्स आॅफ राम टेम्पल', 'अयोध्या : विरासत की जंग', 'बदलाव की ओर : स्ट्रगल आॅफ वाल्मीकीज़ आॅफ उत्तर प्रदेश' व 'लिविंग आॅन द ऐजिज़', समकालीन सामाजिक-राजनैतिक सरोकारों पर केंद्रित हैं और उनकी सूक्ष्म पड़ताल करती हैं।

संबंधित आलेख

मध्य प्रदेश : बालाघाट में 19 आदिवासी बच्चों की मौत
जिन गांवों में बच्चों की मौत हो रही है, वहां सड़क, स्वास्थ्य, पानी जैसी अन्य सुविधाओं का घोर अभाव है। बच्चे कुपोषित हैं। लोगों...
बिहार में सामंती उत्पीड़न और दलित-पिछड़े मजदूरों पर बढ़ते हमले
रोहतास में चंद्रेश्वर चौधरी की हत्या के बाद नवादा में एक गरीब महिला मजदूर द्वारा अपनी मजदूरी मांगना यदि उसके खिलाफ ऐसी बर्बर यौन...
‘जातिगत जनगणना जातियों के नाम की गणना नहीं’
“अगर यह सुनिश्चित किया जाना है कि ओबीसी से संबंधित आंकड़े वैज्ञानिक और विश्वसनीय हों तो हम गणना के बाद लाखों जातियों में से...
पिछड़े वर्ग की चेतना की कीमत पर जातिगत जनगणना करा रही सरकार
गत 14 अगस्त, 2026 को जारी अधिसूचना में जातियों के नाम पूछे जा सकते हैं, लेकिन वह जाति समूह के किस वर्ग में आते...
जातिगत जनगणना : हाथी नहीं, हाथी की पूंछ
गजट के जरिए जारी अधिसूचना के प्रश्न संख्या 10 में केवल “अनुसूचित जाति (अ.जा.)/अनुसूचित जनजाति (अ.ज.जा.)/जाति” का कॉलम है। अलग से ओबीसी/अन्य पिछड़ा वर्ग...