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दुर्गा पाठ के बदले संविधान पाठ की सलाह देने पर दलित प्रोफेसर बर्खास्त

डॉ. मिथिलेश कहते हैं कि “हम नौकरी में हैं तो क्या अपना विचार नहीं रख सकते। उन्हें बस अपना वर्चस्व स्थापित करना है और उन्हें अपने ख़िलाफ़ किसी भी तरह की असहमति स्वीकार नहीं है। जो भी व्यक्ति या विचार उनके ख़िलाफ़ है उसे वो इसी तरह प्रताड़ित कर रहे हैं, रास्ते से हटा दे रहे हैं।” पढ़ें, सुशील मानव की खबर

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, वाराणसी में राजनीति विज्ञान के अतिथि अध्यापक डॉ. मिथिलेश गौतम को बर्खास्त कर दिया गया है। उन्हें यह सजा फेसबुक पर उनके द्वारा की गई एक टिप्पणी के आलोक में दी गई है, जिसमें उन्होंने नवरात्र के दौरान दुर्गा के पाठ के बजाय संविधान का पाठ करने की सलाह दी थी।

डॉ. मिथिलेश गौतम ने गत 28 सितंबर, 2022 को शाम करीब सात बजे अपने फेसबुक एकाऊंट के वॉल पर एक पोस्ट में लिखा– “महिलाओं के लिए नवरात्र के दौरान नौ दिनों का व्रत रखने के बजाय भारत के संविधान और हिंदू कोड बिल को पढ़ना बेहतर है। उनका जीवन भय और ग़ुलामी से मुक्त होगा। जय भीम।” 

जाहिर तौर पर डॉ. मिथिलेश ने ऐसा कुछ भी नहीं लिखा, जिसे अनुचित कहा जाय। लेकिन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रशासन को उनका यह पोस्ट नागवार गुजरा और उसने अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर उन्हें बर्खास्त कर दिया है। 

डॉ. मिथिलेश का बयान

डॉ. मिथिलेश कहते हैं कि आज जिस तरह का समय और माहौल है, उसमें दलित अध्यापकों की नौकरी सुरक्षित नहीं है। वे आगे कहते हैं कि “हम नौकरी में हैं तो क्या अपना विचार नहीं रख सकते। उन्हें बस अपना वर्चस्व स्थापित करना है और उन्हें अपने ख़िलाफ़ किसी भी तरह की असहमति स्वीकार नहीं है। जो भी व्यक्ति या विचार उनके ख़िलाफ़ है उसे वो इसी तरह प्रताड़ित कर रहे हैं, रास्ते से हटा दे रहे हैं।” 

बता दें कि प्रोफ़ेसर मिथिलेश कुमार गौतम ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ही छात्र रहे हैं और यहीं से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। पिछले साल सितंबर में उनका नियोजन काशी विद्यापीठ में ही राजनीति विभाग में अतिथि अध्यापक के रूप में हुआ। वे बताते हैं कि काशी विद्यापीठ में बतौर दलित छात्र भी उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा था। और यहां के कई लोग (दक्षिणपंथी अध्यापक और छात्रनेता) नहीं चाहते थे कि वे काशी विद्यापीठ से बतौर अध्यापक जुड़ें। अध्यापकों तक को यह दिक़्क़त थी कि एक दलित छात्र अध्यापक बनकर उनके समानांतर कैसे आ गया। इसीलिये उनके ज्वानिंग के महज तीन चार महीने बाद ही जनवरी 2022 में एबीवीपी से जुड़े छात्रों और पर्दे पीछे से कुछ अध्यापकों ने प्रोफ़ेसर मिथिलेश के ख़िलाफ़ कुलपति से शिक़ायत की थी। 

डॉ. मिथिलेश गौतम व महात्मा गांधी कांशी विद्यापीठ का प्रवेश द्वार की तस्वीर

इस बारे में प्रोफ़ेसर मिथिलेश बताते हैं कि तब उनके ऊपर आरोप था कि वे कैंपस में समाजिक सरोकार, जन सरोकार के मुद्दे पर होने वाले कार्यक्रमों और प्रदर्शनों में सहभागी होते हैं। 

हालांकि प्रोफेसर मिथिलेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद त्यागी पर विश्वास जताते हैं और कहते हैं कि वे इस मामले में सही फैसला लेंगे।

शिक़ायत से पहले ही ज़ारी हो गया बर्खास्तगी का पत्र

दरअसल, 28 सितंबर, 2022 को फेसबुक पोस्ट को देख उनके विरोधियों ने फिर उनके ऊपर शिकंजा कसा। रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय प्रोफ़ेसर मिथिलेश गौतम को बर्खास्त करने के लिये कितनी अधीर थी इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पहले बर्खास्तगी का आदेश पत्र ज़ारी टाइप किया और फिर अपने संरक्षित छात्रनेता से प्रोफेसर के खिलाफ़ शिकायत पत्र भेजवाया। खुद काशी विद्यापीठ की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय का बयान है कि छात्रों ने 29 सितंबर को शिक़ायत पत्र सौंपा है। जबकि प्रोफेसर मिथिलेश को बर्खास्त करने के आदेश से संबंधित पत्र में 28 सितंबर की तारीख उल्लेखित है। फिर 28 सितंबर वाले आदेशपत्र की फोटोकॉपी पर 29 सितंबर की तारीख के साथ अगले दिन आदेश ज़ारी किया गया है। 

एबीवीपी के छात्रनेता कर रहे डॉ. मिथिलेश गौतम का विरोध 

आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी के छात्रनेता ने 29 सितंबर, 2022 को पत्र लिखकर विद्यापीठ प्रशासन से डॉ. मिथिलेश के उपर उल्लेखित सोशल मीडिया पोस्ट की शिकायत की थी। सिर्फ़ इतना ही नहीं गणेश राय नामक इस एबीवीपी छात्र नेता ने ‘दुर्गा ने महिषासुर का वध कैसे किया?’ शीर्षक एक निबंध के पर्चे प्रोफेसर मिथिलेश के नाम से छपवाकर कैंपस के अंदर और कैंपस के बाहर बांटकर उनके खिलाफ़ माहौल बिगाड़ने का षडयंत्र किया है। जबकि वह पर्चा अरुण कुमार यादव आंबेडकरवादी ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में साझा किया था। 

प्रोफेसर मिथिलेश पर बर्खास्तगी की कार्रवाई

28 व 29 सितंबर को ज़ारी बर्खास्तगी पत्र में ‘कार्यालय आदेश’ के अंतर्गत लिखा गया आदेश कुछ यूं है कि– “डॉ. मिथिलेश कुमार गौतम, अतिथि अध्यापक राजनीतिशास्त्र विभाग द्वारा हिंदू धर्म के विरुद्ध सोशल मीडिया पर की गयी पोस्ट के संबंध में विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा दिनांक 29.09.2022 को शिक़ायती पत्र दिया गया। डॉ. गौतम द्वारा किये गये कृत्य के फलस्वरूप विश्वविद्यालय परिसर के छात्रों में आक्रोश व्याप्त होने तथा विश्वविद्यालय का वातावरण खराब होने परीक्षा एवं प्रवेश बाधित होने के दृष्टिगत मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि विश्वविद्यालय परिनियामवली के परिनियम खंड 14.04-(01) के बिन्दु संख्या (ख) एवं (ड.) के अधीन डॉ. मिथिलेश कुमार गौतम अतिथि प्रवक्ता को राजनीतिशास्त्र विभाग को तत्काल प्रभाव से पदच्युत करते हुये विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा को देखते हुये परिसर में प्रवेश प्रतिबन्धित किया जाता है।”

इस आदेश पत्र पर रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय के हस्ताक्षर हैं। विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय ने डॉ. मिथिलेश के सोशल मीडिया बयान को आपत्तिजनक करार देते हुये कहा है कि किसी भी व्यक्ति को धर्म के बारे में ऐसी टिप्पणी करने या महिलाओं के बारे में ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने जो कहा, वह उचित नहीं है और एक शिक्षक को ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिये। 

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और पौराणिक मिथक शिव पर एक बयान देकर खुद पहले एबीवीपी के निशाने पर फिर यूनिवर्सिटी प्रशासन के निशाने पर रहे डॉ. विक्रम कहते हैं, “डॉ. मिथिलेश ने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है। ये बाते पहले हमारे महापुरुषों लोहिया, वी. पी. मंडल, रमाशंकर विद्रोही, शाहू जी महराज, जोतीराव फुले, पेरियार और आंबेडकर कह चुके हैं। उन्होंने उन्हीं की बातों को दोहराया है। डेमोक्रेसी में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है। आखिर महिलाओं को संविधान पढ़ने को कहना कहां से ग़लत है। संविधान हमारे देश के नागरिकों को नीति नियम और क़ानून देता है अपने अधिकारों की रक्षा के लिये। उसे जानना या उसे जानने के लिये पढ़ने को कहना कैसे ग़लत है?” 

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

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