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और मौलाना मदनी ने हिंदुत्ववादियों के नीचे से खींच लिया सनातनी ग़लीचा

मदनी का मतलब बहुत साफ़ था। अगर सब उस एक परमेश्वर को मान लें, जो अल्लाह भी है, ओम भी है और गॉड भी है, तो सारे झगड़े और भेदभाव खत्म। एक मानवीय और सामाजिक सद्भाव पैदा होगा। बता रहे हैं कंवल भारती

आरएसएस ने सोचा भी नहीं होगा कि जमीयत-उलेमा-ए-हिंद उससे भी एक नंबर आगे निकल जाएगा, और जिस हिंदू-हिंदू का राग वह अपने जन्म से अलापता आ रहा है, जमीयत उसकी हवा निकाल देगा। आरएसएस के नेता सदा ही इस झूठ को बोलते रहते हैं कि भारत हिंदू देश है और जो भी यहां रहता है, वह हिंदू है। इस झूठ को भाजपा के नेता भी कभी बोलने से नहीं चूकते। इसी बीते 15 फ़रवरी, 2023 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कह दिया कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और यहां का हर नागरिक हिंदू है। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई मजहब या संप्रदाय नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक शब्दावली है, जो हर नागरिक पर फिट बैठती है। इसके साथ ही एक और बड़ा झूठ योगी ने यह भी बोला कि “भारत का कोई व्यक्ति हज के लिए जाता है तो उसका संबोधन हिंदू से होता है। वो हिंदू नाम से जाना जाता है। वहां भारत से जाने वाले शख्स को न तो मुस्लिम और न ही हाजी कहा जाता है। वहां उसको हिंदू नाम से संबोधित किया जाता है, तो किसी को परेशानी नहीं होती। इस परिप्रेक्ष्य में भारत हिंदू राष्ट्र था, है और आगे भी रहेगा।”[1]

मैंने कई हाजियों से जानना चाहा कि क्या योगी सच बोल रहे हैं? क्या वास्तव में हज के दौरान भारतीयों को हिंदू बोला जाता है? सभी ने इसे झूठा बयान करार दिया। किसी भी हाजी ने योगी की बात की पुष्टि नहीं की।

जब दिमाग को हिंदुत्व के सिवा कुछ सूझता ही न हो, तो ऐसे दिमाग में बुद्धि कैसे निवास कर सकती है? बुद्धि निवास करती तो अनाप-शनाप बोलते ही क्यों? सही-सही बोलते कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, और यहां का हर नागरिक भारतीय है। जब पाकिस्तान का नागरिक पाकिस्तानी कहा जाता है, मुस्लिम नहीं, चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या सिख; जब बांग्लादेश के नागरिक को बांग्लादेशी बोला जाता है, मुस्लिम नहीं और अमरीका के नागरिक को अमरीकन कहा जाता है, ईसाई नहीं, तो भारत के नागरिक को हिंदू क्यों कहा जाएगा, भारतीय क्यों नहीं कहा जाएगा?

हालांकि, वे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत का नागरिक अपने ही देश में नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी मुल्क में कुछ भी आवेदन करता है, तो वह नागरिकता के कालम में अपनी नागरिकता भारतीय ही लिखता है, हिंदू नहीं लिखता। स्वयं योगी ने भी विधायकी के लिए परचा भरा था, तो अपनी नागरिकता भारतीय ही लिखी है, हिंदू नहीं। सारी दुनिया हमारे देश को भारत या इंडिया नाम से संबोधित करती है, हिंदू नाम से नहीं। हिंदू एक धर्म है, पर वह देश कदापि नहीं हो सकता। लेकिन भगवा दिमाग वाले अपने भाषणों में हिंदू का ही राग आलापते हैं और इसलिए कि उन्हें अपना हिंदू रंग मुसलमानों पर चढ़ाना है, जो वे कभी नहीं चढ़ा सकेंगे।

मौलाना अरशद मदनी

और इसका करारा जवाब अभी हाल ही में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने जोरदार ढंग से दे दिया। जमीयत का एक बड़ा सम्मेलन इसी 12 फ़रवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुआ, जिसका मकसद सब धर्मों के बीच सद्भावना बढ़ाना था। इसलिए उसमें गैर-इस्लामी धर्मों के नेता भी शामिल हुए थे। पर, जमीयत के नेता मौलाना अरशद मदनी के बयान से हिंदू धर्मगुरु भड़क गए। मुस्लिम नेता ने ‘सनातन’ नाम के उस भगवा ग़लीचे को, जिसे आरएसएस और ब्राह्मणों ने अपने नीचे बिछा रखा था, बड़े सलीके से खींच लिया। हुआ यह कि मौलाना अरशद मदनी ने यह कहकर हिंदुत्ववादियों को स्तब्ध कर दिया कि मुसलमान जिसे ‘अल्लाह’ कहते हैं, उसी को हिंदू ‘ओम’ कहते हैं। इसलिए अल्लाह और ओम दोनों एक हैं। उन्होंने कहा, “मैंने बड़े-बड़े धर्मगुरुओं से पूछा कि जब न राम थे, न ब्रह्मा थे, तो मनु किसे पूजते थे? उन गुरुओं ने कहा कि जब कुछ नहीं था, तो मनु ओम को पूजते थे, जो रंग-रूप हीन है, हर जगह मौजूद है। मैंने कहा कि इन्हीं को तो हम अल्लाह, तुम ईश्वर, फ़ारसी में खुदा और अंग्रेजी में गॉड कहते हैं। इसका मतलब मनु यानी आदम, ओम यानी अल्लाह को पूजते थे।”[2]

इतना सुनते ही हिंदू धर्मगुरु भड़क गए। यहां तक कि जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि भी, क्योंकि इस बयान ने आरएसएस और ब्राह्मणों की सारी सनातनी थियोरी उलटकर रख दी। मदनी ने एक तीर से दो निशाने साधे। पहला निशाना एकेश्वरवाद का है, जिसे इस्लाम में तौहीद कहा जाता है। मौलना मदनी ने भगवान श्रीराम का जिक्र ही नहीं किया, जो हिंदुओं के परम आराध्य हैं। मदनी ने उस परमात्मा की ओर ध्यान आकर्षित कर दिया, जो श्रीराम से भी सर्वोच्च है। मदनी का मतलब बहुत साफ़ था। अगर सब उस एक परमेश्वर को मान लें, जो अल्लाह भी है, ओम भी है और गॉड भी है, तो सारे झगड़े और भेदभाव खत्म। एक मानवीय और सामाजिक सद्भाव पैदा होगा। फिर कोई किसी से क्यों लड़ेगा?

लेकिन मौलाना मदनी की बात पर हिंदू इसलिए भड़के, क्योंकि उस परमात्मा को हिंदू मानते ही नहीं। हिंदुत्ववादियों का एक परमात्मा से काम ही नहीं चलता, क्योंकि परमात्मा उनको वोट नहीं दिला सकता। परमात्मा के नाम पर ध्रुवीकरण के लिए उन्मादी राजनीति नहीं की जा सकती। परमात्मा के नाम पर काशी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में ईदगाह के खिलाफ हिंदुओं को आक्रामक नहीं बनाया जा सकता, मस्जिद गिराकर मंदिर नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि परमात्मा का कोई रंग-रूप ही नहीं है। हिंदुओं का काम तो श्रीराम से चलता है, कृष्ण से चलता है, हनुमान और हिंसक देवियों से चलता है। परमात्मा से हिंदुत्व का साम्राज्य स्थापित नहीं किया जा सकता, वह स्थापित होता है देवी-देवताओं से। फिर वे ओम को अल्लाह के समकक्ष कैसे स्वीकार कर सकते हैं?

मौलाना मदनी का दूसरा निशाना हिंदुत्ववादियों के लिए धीरे से दिया गया बहुत जोर का झटका है। उन्होंने हिंदुत्ववादियों को यह बता दिया कि अगर कोई सनातन धर्म है, तो वह इस्लाम है, हिंदूधर्म नहीं। चूंकि इस्लाम के पहले नबी भारत में अवतरित हुए, और भारत इस्लाम का जन्मस्थान है, तो भारत का हर नागरिक मुस्लिम है, हिंदू नहीं है। मौलाना मदनी ने हिंदू राष्ट्र के तथाकथित गुब्बारे में पिन चुभोकर एक ही झटके में उसकी सारी हवा निकाल दी।

आरएसएस के नेता समझते हैं कि कहानियां गढ़ने की सारी कला सिर्फ वे ही जानते हैं, और दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति भी वे ही हैं। पर अपनी प्राचीनता और श्रेष्ठता की कहानियां गढ़ने में इस्लाम के धर्मगुरु भी कम नहीं हैं। उन्होंने तो यहां तक कहानियां गढ़ ली हैं कि इस्लाम के पैगंबर हजरत मुहम्मद ही वह अंतिम कल्कि अवतार हैं, जिनकी भविष्यवाणी पुराणों में की गई है। मुहम्मद मुस्लिम ने अपनी किताब ‘सरवरे आलम’ में पुराणों के हवाले से साबित किया है कि कल्कि का अवतार मुहम्मद साहब के रूप में ही अरब के मक्का में हुआ था और अब कोई और अवतार नहीं होगा। इस संबंध में इलाहाबाद के धर्मशास्त्राचार्य डॉ. वेदप्रकाश उपाध्याय ने भी इस विषय पर अपनी दो पुस्तकें ‘कल्कि अवतार और मुहम्मद साहब’ एवं ‘नराशंस और अंतिम ऋषि’ लिखी हैं।[3] ये इस्लामी कहानियां हिदुत्ववादियों को एक जवाब है। जब मुहम्मद के रूप में कल्कि अवतार हो चुका, तो हिंदुओं को मुहम्मद को अवतार और इस्लाम को अपना धर्म मानना चाहिए। यह आक्रामक हिंदुत्व को बहुत ही शांत जवाब है।

संदर्भ

[1] अमर उजाला, मुरादाबाद संस्करण, 16 फ़रवरी 2023
[2] वही, 13 फ़रवरी 2023
[3] इन दोनों पुस्तकों के प्रकाशक हैं : सारस्वत वेदान्त प्रकाश संघ, ब्रह्मपुरी, नारा, सिराथू, इलाहाबाद।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

कंवल भारती

कंवल भारती (जन्म: फरवरी, 1953) प्रगतिशील आंबेडकरवादी चिंतक आज के सर्वाधिक चर्चित व सक्रिय लेखकों में से एक हैं। ‘दलित साहित्य की अवधारणा’, ‘स्वामी अछूतानंद हरिहर संचयिता’ आदि उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। उन्हें 1996 में डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार तथा 2001 में भीमरत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

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