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वार्षिकी – पूरे साल दलितों और आदिवासियों के ख़िलाफ़ होता रहा अत्याचार

केंद्रीय गृह मंत्रालय की एजेंसी एनसीआरबी हर साल आपराधिक आंकड़े जारी करती है। लेकिन आपराधिक आंकड़े केवल आंकड़े नहीं होते हैं और हर अपराध की सामाजिक पृष्ठभूमि होती है। सुशील मानव बता रहे हैं इस साल देश भर में घटित कुछ खास आपराधिक घटनाओं के बारे में

गत 3 दिसंबर, 2023 को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में साल 2022 में दलितों के खिलाफ़ अपराध के 57,582 मामले और आदिवासियों के ख़िलाफ़ 10,064 मामले दर्ज किए गए। यह साल 2021 की तुलना में क्रमशः 13.1 प्रतिशत और 14.3 प्रतिशत अधिक है। अकेले उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ़ अपराध के 15,368 मामले दर्ज़ किए गए। इससे पहले बसपा सांसद गिरीश चंद्र के एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने मार्च, 2023 में संसद में बताया था कि साल 2018-2022 के दरमियान दलितों के ख़िलाफ़ अपराध के 1,89,945 मामले दर्ज़ हुए हैं। इनमें से 49,613 मामले सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में दर्ज़ किए गए। 

अब साल 2023 की बात करें तो इस साल दलित-आदिवासी उत्पीड़न की ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें अपराधियों ने बर्बरता और अमानवीयता की सारी हदों को पार कर लिया। 

मणिपुर में कुकी (आदिवासी) स्त्रियों पर अत्याचार ने देश को झकझोरा

मणिपुर की राजधनी इंफाल में रहने वाले कुकी समुदाय के लोगों की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करने के लिए उनके खिलाफ़ मैतेई लिपुन, अरामबाई तेंगोल जैसे संगठनों की सशस्त्र अगुवाई में एक हिंसक अभियान चलाया गया, जोकि 3 मई, 2023 से लगातार जारी है। इस हिंसा में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है। 350 के करीब चर्च इस प्रायोजित हिंसा के भेंट चढ़ गए। पांच हजार घर जला दिए गए, पचासों लोग अभी भी लापता हैं। 70 हजार से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित होने के विवश हुए। दर्जनों कुकी महिलाओं ने सुरक्षा शिविरों में बच्चों को जन्म दिया। सैकड़ों बीमार लोगों को इलाज नहीं मिलने से वे मर गये। छात्रों का पूरा शैक्षणिक सत्र चौपट हो गया। हजारों लोगों की आजीविका, दुकानें आदि खाक हो गईं।

आदिवासी दलित महिलाओं को नंगा किया गया

इसी हिंसा के बीच 19 जुलाई, 2023 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसे देख पूरा देश सन्न रह गया। इस वीडियो में अत्याधुनिक हथियारों से लैस मैतेई लिपुन, अरामबाई तेंगोल जैसे संगठनों के लोग दो कुकी महिलाओं को नंगा करके सड़कों पर परेड करवाते देखे गए। वीडियो में उनके अंगों के साथ छेड़छाड़ दिखाया गया। फिर भीड़ उन महिलाओं को लेकर एक खेत में उतर जाती है जहां उनमें से एक के साथ सामूहिक यौन बलात्कार को अंजाम दिया जाता है। ऐसी घटनाएं भी सामने आईं, जिनमें महिलाओं के सामने ही उसके करीबी पुरुष रिश्तेदारों को गोलियों से भून दिया गया। यह घटना 4 मई को कांगपोकपी जिले में घटित हुई। पीड़ित महिलाएं बी-फाइनोम गांव की रहने वाली थीं। जिस महिला के साथ बलात्कार को अंजाम दिया गया, उसका पति पूर्व सैनिक है और देश के लिए कारगिल की लड़ाई लड़ चुका है। बाद में पीड़िता के बयान से मालूम हुआ कि गांव में भीड़ के चंगुल से बचकर वो तीन महिलाएं और 5 पुरुष जंगल में भागे थे, जहां से नोंगपोक सेकमई पुलिस स्टेशन की पुलिस टीम ने उन्हें अपने साथ लिया। बाद में पुलिस स्टेशन से वापिस लौटते समय भीड़ ने पुलिस से उन महिलाओं और पुरुषों को नियंत्रण में ले लिया और उनके साथ बर्बर घटना का अंजाम दिया और पुलिस तमाशबीन बनी रही।

बिहार और मध्य प्रदेश में बर्बरता की शिकार हुई दलित महिला 

गत 23 सितंबर की रात बिहार की राजधानी पटना के खुसरुपुर थाना क्षेत्र के मोसिमपुर गांव में एक महादलित महिला को नंगा करके पीटा गया और उसके ऊपर पेशाब किया गया। दरअसल महिला ने दो साल पहले गांव के ही सूदखोर प्रमोद सिंह यादव से 1500 रुपए उधार लिया था, जिसे उसने कुछ दिन बाद ही ब्याज के साथ उसे वापिस भी कर दिया। इन दो सालों में कोई बात नहीं हुई। घटना के चार दिन पहले से लगातार हर दिन प्रमोद यादव महिला के घर जा जाकर पैसे की मांग करने लगा। उसने 2 साल पहले लिए और लौटा दिये गए उधार की रक़म को 1500 से बढ़ाकर 15 हजार कर दिया और ब्याज जोड़कर 20 हजार रुपए की मांग करने लगा, जिसे देने से इंकार करने पर इस घटना को अंजाम दिया गया।

गुजरात के बनासकांठा जिले के मोटागांव में फैशनेबुल कपड़े पहनने और धूप का चश्मा लगाने के कारण एक दलित व उसकी मां को मारा-पीटा गया

वहीं बीते 27 अगस्त को मध्य प्रदेश के सागर जिले के बड़ोदिया गांव में बेटी की यौन उत्पीड़न के केस में समझौता नहीं करने पर एक दलित स्त्री को निर्वस्त्र किया गया। उसकी दूसरी बेटी को पीटा गया और बेटे नितिन अहिरवार को पीट-पीटकर मार डाला गया। क़रीब सौ की संख्या में पहुंचे हमलावरों ने पीड़िता के देवर के घर पर हमला बोला। मामले में 9 अभियुक्तों विक्रम सिंह ठाकुर, कोमल सिंह, आज़ाद सिंह, इस्लाम ख़ान, गोलू उर्फ सुशील कुमार सोनी, अनीश ख़ान, फ़रीम ख़ान, अभिषेक रैकवार, अरबाज़ ख़ान के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ करके गिरफ्तार किया गया। 

दरअसल 2019 में नाबालिग दलित लड़की का यौन उत्पीड़न करने पर परिवार की ओर से चार लोगों के ख़िलाफ़ पीटने, धमकी देने और यौन उत्पीड़न का केस दर्ज़ करवाया गया था। तभी से आरोपी परिवार पीड़ित परिवार पर समझौते के लिए दबाव बना रहा था। ठाकुर परिवार के सदस्य सरपंच और पार्षद हैं और संपन्न हैं। इसलिए भी पुलिस पीड़ित पक्ष की शिक़ायत पर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई से बच रही थी।

मध्य प्रदेश के सीधी में सामने आई आदिवासी युवक के ऊपर पेशाब करने की घटना

नशे में धुत एक व्यक्ति द्वारा आदिवासी युवक पर पेशाब करने का वीडियो वायरल हुआ। पेशाब करने वाला प्रवेश शुक्ला भाजपा युवा मोर्चा सीधी का उपाध्यक्ष और भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला का प्रतिनिधि था। दमन की इंतेहा देखिए कि प्रवेश शुक्ला ने जिस आदिवासी युवक पर पेशाब किया था, उसका वीडियो वायरल होने के बाद उस युवक को डरा-धमकाकर 3 जुलाई को एक झूठा हलफ़नामा तैयार करवा लिया जिसमें लिखा था कि वायरल हो रहा वीडियो फ़र्जी और ग़लत है और दूसरे लोग उस पर प्रवेश शुक्ला के ख़िलाफ़ एफआईआर लिखवाने का दबाव डाल रहे हैं। 

प्रारंभ में पुलिस ने भी पीड़ित युवक के बयान का हवाला देकर दावा किया कि उसके साथ इस तरह की घटना नहीं हुई और वह कोई रिपोर्ट नहीं लिखवाना चाहता। लेकिन विधानसभा चुनाव नज़दीक होने के चलते भाजपा की सरकार को प्रवेश शुक्ला के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी ही पड़ी। 

ऐसी ही घटना नवंबर के आखिरी सप्ताह में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के असरोपुर गांव के निवासी दलित बृजेश कुमार के 14 वर्षीय बेटे के साथ घटित हुई। वह अपने दोस्त को साइकिल से पास के आमी गांव छोड़ने गया था। वापिस लौटते समय उसे सवर्ण जाति के दबंगों ने रोक लिया और जातिसूचक अपशब्द बोलते हुए मारने लगे। इस क्रम में उसे मारते-मारते एक तालाब किनारे ले गए और तालाब में डुबोकर मारने की कोशिश की। उसके मुंह पर पेशाब किया और तालाब का कीचड़ मुंह में भर दिया। हालांकि इस घटना में पीड़ित किशोर की जान बच गई। जब पीड़ित पक्ष ने इस मामले शिकायत थाने से की और आदित्य सिंह, बबलू सिंह, निलेश दुबे समेत पांच लोगों के खिलाफ़ रिपोर्ट दर्ज़ की तब दूसरे पक्ष ने भी एक एफआईआर दर्ज कराया और पीड़ित किशोर पर आरोप लगाया कि उसने सवर्ण जाति की एक लड़की के साथ छेड़खानी की थी।   

उत्तर प्रदेश के ही मेरठ जिले के मेडिकल थाना क्षेत्र में दंबगों ने दलित छात्र के मुंह पर पेशाब किया और मुंह में पिस्तौल घुसेड़कर जातिसूचक गालियां दीं। दबंगों ने इस घटना का वीडियो बनाया और उसे वायरल कर दिया। पीड़ित छात्र अगले दिन सुबह में बदहवास हालत में घर लौटा। पिता ने 16 तारीख को तहरीर पुलिस को दी। 

पेशाब करने की एक घटना 1 नवंबर, 2023 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में भी घटित हुई।

मज़दूरी मांगने पर बर्बरता 

सिर्फ़ सवर्ण ही नहीं, पिछड़ी जातियों के लोगों में भी यह मानसिकता घर कर गई है कि दलित बेगारी करने के लिए पैदा हुआ है। ऐसे में जब दलित लोगों ने अपनी मजदूरी की मांग की तो उन्हें यातनाएं दी गईं। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के बलरामपुर में 4 दिन की मज़दूरी करने के बाद 1200 रुपए मज़दूरी मांगने पर एक दलित लड़के की हत्या कर दी गई। मृतक 18 वर्षीय विनय कुमार 25 अगस्त को दोपहर 3 बजे साइकिल पर सवार होकर दिग्विजय यादव के यहां अपनी मज़दूरी मांगने गया था। शाम को परिवार को ख़बर मिली कि विनय अस्पताल में भर्ती है। परिजन अस्पताल पहुंचे तो वो मृत पड़ा था। उसके शरीर और सिर पर कई जख्म और चोट के निशान थे।

ऐसी ही घटना 23 नंवबर को गुजरात के मोरबी में हुई। राणीबा इंडस्ट्रीज की मालकिन विभूति पटेल ने एक दलित युवक नीलेश दलसानिया द्वारा 15 दिन की मजदूरी मांगने पर उसके मुंह में जूता ठूंसकर बेल्ट से पीटा और उसे दांतों से सैंडिल उठाने के लिए मज़बूर किया। कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी द्वारा मामले को सोशल मीडिया पर उठाने के बाद इस मामले में विभूति पटेल, उनके भाई ओम पटेल, राज पटेल, परीक्षित, डीबी रबारी के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ किया गया।  

दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा

सदियों से चली आ रही दलित महिलाओं पर यौन हिंसा की घटनाएं इस साल भी ख़ूब हुईं। राजस्थान के बाड़मेर में 6 अप्रैल 2023 को एक दलित महिला को बलात्कार के बाद ज़िंदा जला दिया गया। घटना दिन के उजाले में तब हुई जब दोपहर में 35 वर्षीया झम्मा देवी घर में अकेले थी। शकूर खान नामक पड़ोसी ने घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार किया और केमिकल डालकर आग लगा दी। महिला की चीख-पुकार सुनकर लोग बचाने दौड़े। लेकिन महिला 60 प्रतिशत जल गई थी। बाद में जोधपुर में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रुधौली नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड 14 में 20 सितंबर की रात अपने ही घर में अपनी आंखों के सामने अपनी पत्नी का बलात्कार होते देखने के बाद पति-पत्नी दोनों ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। मृतक दलित का नाम नवल किशोर (30 वर्ष) और उनकी पत्नी का नाम आरती (27 वर्ष) था।                                

वहीं 31 अक्टूबर को बांदा जिले के पतौरा गांव में एक आटा मिल में 40 वर्षीय दलित महिला के साथ गैंगरेप के बाद हत्या करके उसका शव क्षत-विक्षत कर दिया गया। एक पड़ोसी द्वारा सतर्क करने पर जब महिला की बेटी मिल पहुंची तब मिल बंद था। किसी तरह जब मालिक ने इसे खोला तो बेटी ने देखा कि उसकी मां का कटा सिर और बायां हाथ तथा क्षत-विक्षत शव से कुछ दूर पड़ा हुआ है। उसने वहां पांच-छः लोगों को देखा। जिनमें से दो तुरंत भाग गये, जो बचे थे उनके नाम बउवा शुक्ला, राजकुमार शुक्ला और रामकृष्ण शुक्ला थे। शुरुआती जांच में नरैनी पुलिस ने महिला की मौत मिल में एक मशीन में फंसने से हुई दुर्घटना को माना।  

20 जून को राजस्थान के बीकानेर के खाजूवाला में पुलिस कांस्टेबल मनोज और कांस्टेबल भागीरथ ने दिनेश विश्नोई और अन्य युवकों के साथ मिलकर एक 20 वर्षीय दलित युवती के साथ गैंगरेप करके उसकी हत्या कर दी। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले और उसकी मौत गैंगरेप के कारण अधिक रक्तस्त्राव होने के चलते होना बताया गया। 

राजस्थान के ही करौली जिले में नादौती उपखंड में दलित युवती संग गैंगरेप के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई। फिर एसिड डालकर उसका चेहरा जला दिया गया ताकि उसकी पहचान न हो सके। और बाद में उसकी लाश कुएं में फेंक दिया।   

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के गांव बेहटा में 17 साल की दलित लड़की ने इसलिए खुदकुशी ली, क्योंकि पड़ोसी के ख़िलाफ़ दर्ज़ कराए गए बलात्कार के मामले को निपटाने के लिए पुलिस उसके परिवार पर दबाव बना रही थी। आरोपी भी दलित समुदाय के ही थे। 

राजस्थान के भरतपुर जिले के सेवर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक 41 वर्षीय दलित महिला अपना चश्मा ठीक करवाने बाज़ार गई। चश्मे की दुकान पर मौजूद दो सगे भाई उसे काम कराने क बहाने अपने घर ले गये और उसके साथ गैंगरेप किया। और घटना के बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

ऊंची जाति की लड़की से प्यार करने पर दलित युवक के पिता की हत्या

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के मुंशीगंज थानाक्षेत्र के रामदौरपुर गांव में घनश्याम पाल की बेटी का दलित रामसजीवन के बेटे सुनील कोरी के साथ चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जब उनकी बेटी बालिग हुई तो सुनील उसे लेकर कहीं भाग गया और कुछ दिनों बाद वापिस आकर दोनों गांव में ही रहने लगे। यह बात घनश्याम को रास नहीं आई। उसने अपने बेटे सचिन और साढ़ू लवकुश के साथ मिलकर सुनील कोरी की हत्या की साजिश रची। 10 दिसंबर की रात जब तीनों घर पहुंचे तो सुनील की जगह उसके पिता रामसजीवन मिले तो तीनों ने उनके पर बांका (कटार जैसा एक हथियार, जिसका इस्तेमाल लकड़ी काटने के लिए किया जाता है) से हमला कर दिया। इस हमले में रामसजीवन की मौत हो गई।   

अच्छे कपड़े पहनने पर पीटा गया

यह घटना  27 जून, 2023 की है। गुजरात के बनासकांठा जिले के मोटागांव में फैशनेबुल कपड़े पहनने और धूप का चश्मा लगाने के कारण एक दलित युवक जिगर शेखालिया को राजपूत जाति के लोगों ने लाठी-डंडों से पीटा। बीच-बचाव करने पहुंची युवक की मां को भी उन्होंने पीटा और उसके कपड़े फाड़ दिए। घटनावाले दिन सुबह के समय एक आरोपी ने पीड़ित को धमकाते हुए कहा था कि इन दिनों बहुत ऊंची उड़ान भर रहा है। 

चोरी का आरोप लगाकर बर्बरता 

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के श्रीरामपुर तहसील के हरेगांव में 25 अगस्त को बकरी और कबूतर चुराने के आरोप में चार दलित लड़कों को पेड़ से उल्टा लटकाकर पीटा गया। पीड़ितों में दो नाबालिग थे। 27 अगस्त को घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। बाद में पीड़ित शुभम मगदे की शिक़ायत पर युवराज गलांडे, मनोज बोडके, पप्पू पारखे, दीपक गायकवाड़, दुर्गेश वैद्य और राजू बोराग के ख़िलाफ़ धारा 307, 364 और एससी/एसटी एक्ट में मुक़दमा दर्ज़ किया गया। 

वहीं, 26 अगस्त की रात महाराष्ट्र के ही जालना जिले की बदनापुर तहसील के जवासखेड़ा गांव में सिद्धार्थ मांडले नामक 25 वर्षीय दलित व्यक्ति की हत्या कर दी गई। कथित तौर पर दोपहिया वाहन चुराने का शक होने पर सिद्धार्थ मांडले पर जानलेवा हमला किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में दरेगांव के हत्याभियुक्त आकाश जाधव, कैलाश जाधव, कुंडलिक तिरखे और तुलसीराम को गिरफ्तार किया गया। 

ज़मीन क़ब्ज़ाने के लिए पूरे परिवार की हत्या

बीते 16 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के संदीपन घाट थानाक्षेत्र के हररायपुर-मोइनुद्दीन गौस गांव में दलित समुदाय के होरीलाल सरोज, उनके दामाद शिवसरन सरोज और गर्भवती बेटी बृजकली की गोली मारकर और धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई। पट्टे की ज़मीन पर क़ब्ज़े के लिए पीएसी जवान सुरेश सिंह ने पथरहां गांव के पूर्व प्रधान अमर सिंह, जयकरन यादव, यादवेंद्र उर्फ गुड्डू, अरविंद सिंह यादव, अजीत सिंह, अमर सिंह, अमित सिंह, अनुज सिंह, तीरथ निषाद, जयकरन यादव, अनूप सिंह के साथ मिलकर तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।

जमीन पर कब्जे संबंधी मामले में ही बीते 5 अक्टूबर की रात कानपुर देहात जिले के शाहजहांपुर गांव में दो सगे भाईयों रामवीर विश्वकर्मा और सत्य नारायण विश्वकर्मा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोपी मोहन शुक्ला और उनके परिवार के लोग कुल्हाड़ी लेकर रामवीर के परिवार पर हमला कर दिया। बीच-बीचाव करने पहुंचे रामवीर के भाई सत्य नारायण पर भी हमलावरों ने ताबड़तोड़ हमला करके उनकी जान ले ली। 

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 17 अप्रैल को आदिवासी समुदाय से आने वाले 43 वर्षीय रामप्रसाद मीणा ने खुदकुशी कर ली। मरने से पहले उसने अपने मोबाइल में वीडियो बनाकर आरोप लगाया कि राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री महेश जोशी सहित कुछ बिल्डर उसे प्रताड़ित कर रहे थे और अपनी ज़मीन पर मकान नहीं बनाने दे रहे थे। राम प्रसाद मीणा चांदी टकसाल इलाके में काले हनुमान मंदिर के पास रहते थे और अपने पट्टे की भूखंड पर मकान तामीर (चौखट की ऊंचाई तक) करवा रखा था। हेरिटेज नगर निगम के अधिकारी आगे के निर्माण में अड़ंगा डाल रहे थे। इसके लिए मौके पर एक गार्ड भी तैनात कर दिया था। लिंटर डालने के समय निगम की विजिलेंस टीम ने पहुंचकर काम रुकवा दिया। मज़दूर वापिस लौट गए। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो दुखी होकर रामप्रसाद मीणा ने खुदकुशी कर ली।

17 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अर्तरा थाना क्षेत्र के डाडिनपुरवा गांव में खेत की नाली को लेकर हुए विवाद में रिंकू त्रिपाठी ने दलित समाज के राजाभैया (40 वर्ष) और उनके भतीजे विपिन (17 वर्ष) को पिता के लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर घायल कर दिया। हालांकि पुलिस ने तहरीर में लाइसेंसी बंदूक की जगह तमंचा लिखा है। उत्तर प्रदेश में 2017 से 2021 के दरमियान 3021 हत्याएं ज़मीन को लेकर हुई हैं।

जूठी प्लेट छू जाने पर हत्या

यह घटना 17 नवंबर को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद के लोनी अंकुर विहार पुश्ता रोड स्थित सीजीएस वाटिका गेस्ट हाउस में एक शादी समारोह में तब घटित हुई जब एक वेटर पंकज कुमार के हाथ से जूठी प्लेट छू जाने से दूल्हे के मौसेरे भाई ऋषभ के कपड़े गंदे हो गए। इससे गुस्सा होकर ऋषभ उसे गालियां देते हुए मारने लगा। तभी मनोज गुप्ता भी वहां पहुंचा और दोनों ने मिलकर वेटर पंकज की पीट-पीटकर हत्या कर दी। गेस्ट हाउस मनोज गुप्ता का ही था। अतः उसने वहां काम करने वाले अजय अमित से पंकज की लाश को गढ़ी कटैया के जंगल में फेंकवा दिया। 

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उतहैस क्षेत्र के सथरा गांव में एक दलित बच्चे द्वारा हैंडपंप से पानी भरना उसके पिता की मौत का कारण बन गया। 30 नवंबर की दोपहर 12 साल का केशव घर के पास लगे सरकारी नल से पानी भर रहा था, उसी समय गांव के ही सूरज राठौर के बच्चे भी पानी भरने पहुंचे। पहले पानी भरने को लेकर विवाद हुआ। बच्चों के विवाद में बड़े उतर आए और गाली गलौज के साथ धक्का-मुक्की होने लगी। गांववालों ने मामला शांत करवा दिया। शाम 7 बजे जब केशव का पिता कमलेश अपने खेत से वापिस लौट रहे थे तब सूरज राठौर ने अपने साथियों के साथ लाठी डंडों से उन्हें मार-मारकर अधमरा कर दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।   

गिलास में पानी पीने पर जातिसूचक गालियां

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सुरहुरपुर में दिलीप कुमार प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। वह अनुसूचित जाति (चमार) से आते हैं। सरकारी शासनादेश के तहत वो 4 मई को परिवार सर्वेक्षण के लिए सुरहुरपुर गांव के घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रहे थे। शाम चार बजे वह रामजनम उर्फ जमुना सिंह के घर पहुंचे और सर्वे के बारे में बताया। इस पर रामजन्म सिंह ने उनसे कहा कि तुम पहले भी मेरे घर आये हो और चमार होकर मेरे गिलास में पानी पी लिए थे। इस पर दिलीप कुमार ने कहा कि वह पुरानी बात है, जाने दीजिए आप सर्वेक्षण में सहयोग कीजिए। इस पर रामजनम सिंह ने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। प्रधानाध्यापक ने एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज़ करवाया, लेकिन आरोपी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

मंदिर में घुसने पर पीटा गया

9 जनवरी की रात उत्तराखंड के मोरी ब्लॉक के सालरा गांव में एक दलित युवक को मंदिर में घुसने पर बुरी तरह पीटा गया। सालरा गांव स्थित कौंल मंदिर में 15 गांवों के लोग पूजा करने आते हैं। सालरा के पड़ोसी गांव बैनोल निवासी 22 वर्षीय दलित युवक आयुष क़रीब आठ बजे रात मंदिर में पहुंचा और ध्यान लगाकर बैठ गया। तभी उनके गांव के कुछ सवर्ण मंदिर पहुंचे और दलित जाति का बताकर उन्हें बुरी तरह पीटा गया और जलाने का प्रयास किया गया। आरोप लगाया गया कि वह मंदिर में तोड़-फोड़ करते हुए गर्भगृह तक जा पहुंचा था। गंभीर हालत में युवक को देहरादून मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 

अकारण उत्पीड़न

मध्य प्रदेश के धार जिले के मांडव क्षेत्र के रहने वाले दो आदिवासी भाई इंदौर में एक फैक्ट्री में मज़दूरी करते हैं। 7 जुलाई को काम करने के बाद दोनों बाइक पर सवार होकर घर वापिस जा रहे थे। इसी दौरान तेज बारिश हुई और बारिश के कारण फैक्ट्री के पास इनकी बाइक गिर गई। बाइक गिरने पर दोनों भाईयों को सुमित चौधरी, जयपाल सिंह बघेल और प्रेम सिंह परमार ने मिलकर बंधक बनाकर नजदीक ही स्थित गार्डरूम में ले गये। और वहां क़रीब आठ घंटे तक दोनों भाईयों को पीटते रहे। बाद में पिटाई का वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। 

21 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के लालंगंज थाना क्षेत्र के सहिरा गांव में दलित युवक धर्मराज का शव मिला। पोस्टमार्टम के बाद प्रशासन ने शव को बलपूर्वक जला दिया। मृतक के सिर और सीने में गंभीर निशान थे। उसकी एक आंख फोड़ दी गई थी और दोनों पैर भी तोड़ दिये गये थे। पुलिस ने अपनी थ्योरी में इसे पांच फीट की ऊंचाई से कूदकर आत्महत्या साबित करने की कोशिश की। इतना ही नहीं पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज़ कराने पहुंचे मृतक के पिता के साथ गाली गलौज और दुर्व्यवहार किया।    

(संपादन : राजन/नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

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