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मोदी फिर अलापने लगे मुस्लिम विरोधी राग

नरेंद्र मोदी की हताशा का आलम यह है कि वे अब पाकिस्तान का नाम भी अपने भाषणों में लेने लगे हैं। गत 3 मई को गुजरात के आनंद में उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ बोलते हुए पाकिस्तान को भी घसीट लिया। बता रहे हैं अभय कुमार

गत 13 मई को लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान संपन्न हुआ। अब केवल तीन चरण का मतदान बचा है, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिस तरह मुस्लिम विरोधी प्रचार का सहारा लेकर चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है, यह देश के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। भाजपा किसी भी तरह यह साबित करने के लिए बेचैन है कि विपक्ष मुसलमानों की पार्टी है तथा दलित, आदिवासी और ओबीसी विरोधी है। और फिर दावा किया जा रहा है कि भगवा पार्टी हिंदुओं की एकमात्र और सबसे बड़ी हितैषी पार्टी है। 

जाहिर तौर पर मुसलमानों का डर दिखाकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ दलितों, आदिवासियों और पिछड़ी जातियों का वोट हासिल करने की उनकी कोशिश है। इस बार ताे ऐसा लग रहा है कि भाजपा मुसलमानों को निशाना बनाने का अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ने जा रही है। इसकी वजह भाजपा खेमे में हताशा है और आलम यह है कि देश के प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव जीतने के लिए समाज में जहर घोलने की कोशिशें कर रहे हैं।

पिछले कुछ हफ्तों से अखबारों के पन्ने नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों की कवरेज से भरे हुए हैं। टीवी चैनल भी उनके भाषणों और बयानों को बार-बार प्रसारित कर रहे हैं। उनके ज्यादातर भाषणों में एक खास पैटर्न उभर कर सामने आ रहा है कि कैसे यह साबित करें कि कांग्रेस ने दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के अधिकारों को छीनने की साजिश रची है। वे यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस मुसलमानों के बीच आरक्षण बांटने को उत्सुक है। उनके बे-बुनियादी बात पर कार्रवाई करने के बजाय केंद्रीय चुनाव आयोग मूकदर्शक बना बैठा है। वैसे आयोग ने कर्नाटक भाजपा के एक बेहद सांप्रदायिक विज्ञापन को सोशल मीडिया से हटाने का आदेश जारी किया, लेकिन लोगों की अपेक्षा है कि चुनाव आयोग को और अधिक सक्रिय होना चाहिए। 

जबकि इसके बरअक्स मोदी एक के बाद एक रैलियों में मुसलमानों पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। उदाहरण के लिए गत 23 अप्रैल को राजस्थान के टोंक जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि अगर कांग्रेस और उसका गठबंधन सत्ता में आया, तो वे दलितों और ओबीसी समुदाय के आरक्षण को लूटकर उनका हक मार कर एक खास समूह को दे देंगे। ‘एक खास समूह’ से उनका इशारा मुसलमानों की ओर था। इसके पीछे मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पूर्व में एक भाषण को आधार बनाया था। डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक तमाम वंचितों का है, जिनमें मुसलमान भी शामिल हैं। वैसे भी देखा जाय तो मुस्लिम समुदाय में 80 प्रतिशत से ज्यादा पसमांदा हैं, जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं और वर्ण-व्यवस्था के दमन से बाहर होने के प्रयास में पूर्व में इस्लाम कबूल किया था। अभी भी समाज उनको शूद्र और दलित के रूप में देखता है।

तीसरी बार नामांकन पत्र भरने बनारस पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक निजी न्यूज चैनल को इंटरव्यू देते हुए। इस दौरान उन्हाेंने भावुकता का भी प्रदर्शन किया

इसके पहले राजस्थान के बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो बहुसंख्यक समुदाय में मुसलमानों का डर पैदा करने की पूरी कोशिश की जाएगी। यह लोगों की संपत्ति हड़प लेगी और इसे उनलोगों में बांट देगी, जिनके पास अधिक पैसा है और जो लालची हैं। वे बच्चे पैदा करके देश की जनसांख्यिकी को बदलने की भी कोशिश कर रहे हैं। जाहिर तौर पर उनके निशाने पर मुसलमान ही थे।

कुछ ऐसी ही बातें मोदी ने 7 मई को मध्य प्रदेश की एक रैली में फिर कही थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि चारा घोटाले के आरोपी ने मुसलमानों को पूरा आरक्षण देने की बात कही थी। मोदी के आरोप सिर्फ आरक्षण तक ही सीमित नहीं रहे हैं। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने गोधरा के हमलावरों को बचाने की कोशिश की। जबकि वर्ष 2002 में गुजरात दंगों के दौरान हजारों नागरिक मारे गए, जिनमें अधिकांश मुस्लिम थे। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मोदी दंगा पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहे। उस समय अटल बिहार वाजपेयी की केंद्र सरकार में समर्थक दलों ने मोदी को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी, लेकिन आखिरी वक्त में लालकृष्ण आडवाणी और संघ परिवार की एक बड़ी लॉबी ने ऐसा नहीं होने दिया। 

मोदी की हताशा का आलम यह है कि वे अब पाकिस्तान का नाम भी अपने भाषणों में लेने लगे हैं। गत 3 मई को गुजरात के आनंद में उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ बोलते हुए पाकिस्तान को भी घसीट लिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नेता भी कांग्रेस की जीत की दुआ कर रहे हैं। इस तरह मोदी ने मुस्लिमों, पाकिस्तान और कांग्रेस को एक पंक्ति में लाने की कोशिश की और भाजपा को देशभक्त और ‘हिंदू नवाज’ बता रहे थे।

जबकि अपने संबोधन में मोदी कभी यह नहीं बता रहे कि उन्होंने दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के लिए क्या किया है। जाहिर तौर पर मुख्यधारा की मीडिया भी उनके ही सुर अलाप रही है। इसके विपरीत वास्तविकता यह है कि कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में मुस्लिम शब्द ही नहीं। अलबत्ता उसमें अल्पसंख्यक वर्ग जरूर शामिल है, जिसमें मुसलमानों के साथ ही ईसाई, सिक्ख, जैन और बौद्ध धर्मावलंबी सभी शामिल हैं। 

खैर, अभी बहुत अधिक दिन नहीं हुए जब उनकी एक मददगार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी, अजित पवार गुट) ने फरवरी में एक प्रस्ताव पारित कर मुसलमानों के लिए आरक्षण की बात कही थी। हालांकि उसके इस प्रस्ताव को प्रतीकात्मक भी माना जा रहा है, लेकिन फिर भी मोदी में अजित पवार पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं है, क्योंकि महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और अजित पवार के गुट वाली एनसीपी की सरकार है। 

मुस्लिम आरक्षण को लेकर भय पैदा करने वाली भाजपा आज उस ऐतिहासिक तथ्य पर बात भी नहीं करना चाहती कि सरदार पटेल, जिन्हें वह अपना नायक मानती है, ने संविधान सभा के सलाहकार आयोग का नेतृत्व करते हुए मुसलमानों सहित तमाम अल्पसंख्यकों के आरक्षण की बात कही थी। यह और बात है कि जब संविधान का मसौदा तैयार किया गया था तब मुसलमानों के हाथ से आरक्षण छीन लिया गया था। 

याद रखें कि ब्रिटिश काल में मुसलमानों को राजनीतिक आरक्षण मिलता था, जो आज आज़ाद भारत में पाप माना जाता है। आज आलम यह है कि भारतीय मुसलमान राजनीति में अलग-थलग पड़ गए हैं। 

(संपादन : राजन/नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

अभय कुमार

जेएनयू, नई दिल्ली से पीएचडी अभय कुमार संप्रति सम-सामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन करते हैं।

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