h n

काल्पनिक राम ने नहीं, अयोध्या की जनता ने दिया भाजपा के खिलाफ जनादेश

समाजवादी पार्टी ने फैजाबाद (अयोध्या) सामान्य लोकसभा क्षेत्र से दलित समुदाय से आनेवाले अवधेश प्रसाद को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत हासिल की। उनकी इस जीत की पृष्ठभूमि के बारे में बता रहे हैं सुशील मानव

उत्तर प्रदेश की फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हार गई है। भाजपा प्रत्याशी और निवर्तमान् सांसद लल्लू सिंह (4,99,722 मत) को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद रावत (5,54,289 मत) ने 54,567 मतों के अंतर से हरा दिया है। सिर्फ़ अयोध्या ही नहीं, इसके 100 किलोमीटर इर्द-गिर्द की बस्ती, श्रावस्ती, जौनपुर, बाराबंकी, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी आदि तमाम सीटें भी भाजपा हार गई है। यह वही अयोध्या है, जहां 22 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाज़े बाजे के साथ राम मूर्ति स्थापना का भव्य आयोजन करके 19वें आम लोकसभा चुनाव के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की आधारशिला रखी और जो “राम को जो लाये हैं हम उनको लाएंगे” नारे के साथ आम चुनाव में उतरी थी। नरेंद्र मोदी ने तब चुनावी सभा में कहा था कि यदि इंडिया गठबंधन सत्ता में आया तो वो राम मंदिर पर बाबरी ताला लगवा देंगे, राम मंदिर पर बुलडोज़र चलवा देंगे और राम लला को फिर से टेंट में भेज देंगे।

भाजपा को उम्मीद थी कि वह राम लहर का फायदा उठाकर चुनाव जीत लेगी। इसी राम लहर को देखते हुए चुनाव से ठीक पहले जदयू नेता नीतीश कुमार भाजपा खेमे में चले गए थे, लेकिन नतीजे आने के बाद जिस तरह से भाजपा अयोध्या की सीट हार गई है, उसने अयोध्या को दूर से देख रहे लोगों को हैरान कर दिया है।

पासी समुदाय (दलित) से आनेवाले नवनिर्वाचित सांसद अवधेश प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी यह जीत इस मायने में ऐतिहासित जीत है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें सामान्य सीट से उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा और लोगों ने जाति और समुदाय की परवाह किए बिना उनका समर्थन किया है, जिताया है। भाजपा की असाधारण हार में बेरोज़गारी, महंगाई, भूमि अधिग्रहण और संविधान में बदलाव की बातें गूंज रही हैं।

मध्य में अवधेश प्रसाद, नवनिर्वाचित सांसद, सपा, फैजाबाद (अयोध्या)

स्वतंत्र पत्रकार गौरव गुलमोहर बिल्कुल शुरुआत से ही अयोध्या की सीट पर नज़र बनाए हुए हैं। वह जनवरी में राम मंदिर उद्घाटन से लेकर चुनाव नतीजे आने तक कई बार अयोध्या की यात्रा कर चुके हैं और फिलवक्त भी वो अयोध्या में ही डेरा डाले हुए हैं। गौरव गुलमोहर अयोध्या से बताते हैं कि “अयोध्या में मंदिर और मस्जिद कभी कोई मुद्दा नहीं रहा बल्कि यहां तीन दशकों से लगातार मंदिर और मस्जिद को मुद्दा बनाया जाता रहा है। इस बार 22 जनवरी को जब मैं सरकार के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आया तो देखा अयोध्या में सब शामिल रहे लेकिन उस कार्यक्रम से अयोध्या और अयोध्या के आस-पास के आम लोग गायब रहे। आज परिणाम में भी अयोध्यावासियों ने वही दोहराया है।”

फिर क्या मुद्दा था अयोध्यावासियों के लिए इस चुनाव में? इस सवाल के जवाब में गौरव गुलमोहर कहते हैं कि इस चुनाव में अयोध्या यानी फ़ैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र में महंगाई, बेरोज़गारी और संविधान व आरक्षण को बचाने के लिए मतदान हुआ है। इसमें अहम कारण, चुनाव के दौरान भाजपा सांसद और उम्मीदवार लल्लू सिंह का वह वीडियो है, जिसमें उन्होंने संविधान में बदलाव के लिए 400 पार सीट की बात की थी। यह वीडियो आम जनता में तेजी से वायरल हुआ और लल्लू सिंह के हारने की प्रमुख वजह बनी।

बता दें कि चुनाव के समय भाजपा उम्मीदवार और तत्कालीन सांसद लल्लू सिंह ने एक चुनावी सभा में कहा था कि – “कोई काम करना है तो इसके लिए कई नियम बदलने होंगे, संविधान बदलना होगा, सरकार तो 272 में भी चल जाती है। लेकिन 272 की सरकार संविधान में संशोधन नहीं कर सकती है। उसके लिए दो तिहाई से अधिक की सीट चाहिए होगी या नया संविधान बनाना हो तो भी।”       

अयोध्या में ज़मीन अधिग्रहण का मुद्दा भी चुनावी मुद्दा बना। नवनिर्मित घाट से राम मंदिर तक की सड़क को चौड़ा करने के लिए सड़क के दोनों ओर और बड़ी संख्या में घरों-दुकानों पर बुलडोज़र चलाकर ज़मीदोज़ कर दिया गया, जिससे लोगों की रोटी-रोजी छिन गई और उनका सदियों का पुश्तैनी आशियाना उजड़ गया। स्थानीय लोगों का कहना था कि – “राम हमारे आराध्य हैं, लेकिन आप हमारी रोटी-रोज़ी छीन लोगे, घर बार उजाड़ दोगे तो हम अपना परिवार लेकर कहां जाएंगे, क्या करेंगे।”

सपा उम्मीदवार अवधेश कुमार ने इस मुद्दे को पकड़ा। उन्होंने स्थानीय लोगों की इस पीड़ा को न सिर्फ़ देखा बल्कि आश्वासन भी दिया कि जीतने पर वो उन लोगों को फिर से बसाने का काम करेंगे, जिन्हें भाजपा सरकार ने राम मंदिर की सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर ध्वस्त कर दिया। साथ ही जिनकी ज़मीने छीनी गई हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा।

गौरतलब है कि मंदिर उद्घाटन से लेकर चुनाव के बीच अयोध्या के स्थानीय लोगों के कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें स्थानीय लोग रो रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो में एक सैलून चलाने वाला व्यक्ति एक ग्राहक की दाढ़ी बनाते हुए रो रहा है। पत्रकार उस व्यक्ति से पूछता है आपने अपनी मांग रखी कहीं? आंसू पीते हुए वो कहता है कि जहां जाइए पैसा ही चलता है। पत्रकार फिर पूछता है कोई सुनने वाला नहीं है? और सैलून चालक उस्तरा में लगा फोम अपनी कलाई पर पोछते हुए ‘नहीं’ के मुद्रा में सिर हिलाता है। पत्रकार अगला सवाल पूछता है– आपके परिवार ने भी कारसेवा की होगी राम मंदिर बनाने के लिए? अपने आंसू पोंछते हुए वह व्यक्ति कहता है– हां, मेरे बाबा और पापा ने की थी।

एक अन्य वीडियो में एक महिला का आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह रोते हुए कहती है– “घर नहीं तोड़ा जा रहा, उजाड़ दिया जा रहा है, उठा उठाकर फेंक दिया जा रहा है। आप विकास कर रहे हैं। ये कैसा विकास कर कर रहे हैं? राम को बसाने के लिए लोगों को उजाड़ दे रहे हो।” एक दूसरी महिला कहती है कि ग़रीबों को और ग़रीब बना दीजिए, ये तो नहीं कहा है न राम ने। और न राम मांगने आए हैं कि बनवाओ पूरे में हम रहेंगे।”

गौरतलब है कि 2.77 एकड़ विवादित ज़मीन पर हिंदू पक्ष को मालिकाना अधिकार सौंपे जाने के बाद 67 एकड़ और ज़मीन का अधिग्रहण किया गया। इसके लिए अहिराना मोहल्ला, दुराही कुंआ क्षेत्र, कटरा मोहल्ला, मौर्या मोहल्ला, कौशल्या घाट, राज घाट, रैन बसेरे जैसे कई मोहल्लों के लगभग 4 हजार मकानों-दुकानों को राम जन्मभूमि पथ, भक्ति पथ और राम पथ के लिए ज़मींदोज़ करके उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया। इसके अलावा अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट और विकास के नाम पर शॉपिंग कॉम्पलेक्स आदि बनाने के लिए सरकार द्वारा 821 एकड़ ज़मीन का ज़बरदस्ती अधिग्रहण किया गया, जिसका स्थानीय किसानों ने कड़ा विरोध किया था।

(संपादन : राजन/नवल/अनिल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, संस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

संबंधित आलेख

बांसगांव लोकसभा क्षेत्र से मेरी हार में ही जीत की ताकत मौजूद है : श्रवण कुमार निराला
श्रवण कुमार निराला उत्तर प्रदेश के बांसगांव लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी रहे। हालांकि इस चुनाव में उन्हें केवल 4142 मत प्राप्त हुए। लेकिन...
उत्तर प्रदेश में गैर-जाटव दलितों के रूख से कांग्रेस के लिए बढ़ीं उम्मीदें
संविधान बचाने का मुद्दा इतना असरदार था कि दलित समाज की दो बड़ी जातियां – कोरी और धोबी – को इंडिया गठबंधन द्वारा एक...
दो कार्यकाल से ज्यादा न हो किसी एक व्यक्ति का प्रधानमंत्रित्व काल
इंदिरा गांधी ने अपनी दूसरी पारी में इमरजेंसी लगाई, मगर 1977 के चुनाव ने देश को बचा लिया। अपनी तीसरी पारी में वे हत्यारों...
छत्तीसगढ़ : इस कारण सतनामी समाज के लोगों का आक्रोश बढ़ा
डिग्री प्रसाद चौहान कहते हैं कि जैतखाम को बिहार के तीन गरीब मजदूरों द्वारा आरी से काटे जाने की बात पुलिस की मनगढ़ंत कहानी...
सामाजिक न्याय की जीत है अयोध्या का जनादेश
जीत का श्रेय समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने बहुत ही बड़ा क़दम उठाया और एक दलित समाज...