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द्रौपदी मुर्मू के बहाने हिंदू राष्ट्र के एजेंडे का विस्तार

संघ परिवार के द्वारा संचालित केंद्र की भाजपा सरकार दुनिया को ऐसा महसूस करवाना चाहती है कि वे भारत के वंचित, शोषित, पीड़ित और हाशिए के लोगों के सबसे बड़े हितैषी है। जबकि सच इसके बिल्कुल विपरीत है। बता रहे हैं गोल्डी एम. जॉर्ज

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो जाएगा और चुनाव आयोग के मुताबिक 18 जुलाई, 2022 का दिन राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्धारित है। मैदान में अब मुख्य रूप से दो उम्मीदवार हैं। एक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू और दूसरे विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा। हालांकि राष्ट्रपति उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही उड़ीसा के मयूरभंज में एक शिवमंदिर में मुर्मू द्वारा झाड़ू लगाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का चयन केवल प्रतिनिधित्व का प्रतीक भर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मूल राजनीतिक और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषणा करने की परियोजना की साफ़ साफ़ उद्घोषणा है।

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लेखक के बारे में

गोल्डी एम जार्ज

गोल्डी एम. जॉर्ज फॉरवर्ड प्रेस के सलाहकार संपादक रहे है. वे टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज से पीएचडी हैं और लम्बे समय से अंग्रेजी और हिंदी में समाचारपत्रों और वेबसाइटों में लेखन करते रहे हैं. लगभग तीन दशकों से वे ज़मीनी दलित और आदिवासी आंदोलनों से जुड़े रहे हैं

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