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जाति-आधारित जनगणना के लिए महाराष्ट्र में राज्यव्यापी अभियान प्रारंभ

पूरे देश में ओबीसी समुदाय की सही आबादी के आंकड़े, साथ ही उनकी शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति-आधारित जनगणना बिल्कुल ज़रूरी है। जब तक ओबीसी समुदाय के बारे में आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए जाते, तब तक इस समुदाय को न्याय नहीं मिलेगा। पढ़ें, यह खबर

बीसी महासंघ ने महाराष्ट्र में गत 15 मई, 2026 से जाति-आधारित जनगणना की मांग को लेकर राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसका मकसद जाति-आधारित जनगणना करवाना है। यह अभियान अभी कोंकण क्षेत्र के कई तालुकों में चल रहा है, जिनमें शाहपुर, कल्याण, ठाणे, वाडा और पालघर शामिल हैं।

गत 16 मई को ठाणे में आयोजित एक रैली में बोलते हुए महासंघ के महासचिव सचिन राजुरकर ने केंद्र सरकार से जाति-आधारित जनगणना कराने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो महासंघ दिल्ली को जाम कर देगा।

सचिन राजुरकर ने जोर देकर कहा कि पूरे देश में ओबीसी समुदाय की सही आबादी के आंकड़े, साथ ही उनकी शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति-आधारित जनगणना बिल्कुल ज़रूरी है। जब तक ओबीसी समुदाय के बारे में आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए जाते, तब तक इस समुदाय को न्याय नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार हमारी मांगों को नज़रअंदाज़ करती है, तो राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ शीतकालीन सत्र के दौरान दिल्ली में एक ज़ोरदार आंदोलन शुरू करेगा। केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान इस बारे में एक घोषणा की थी।

बैठक को संबोधित करते सचिन राजुरकर

लेकिन 22 जनवरी, 2026 को भारत सरकार को लिखे एक पत्र में, जनगणना आयुक्त ने मकान-सूचीकरण चरण के लिए 33 सवालों की सूची दी थी; जबकि इस सूची के 12वें आइटम में विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से संबंधित परिवारों के मुखिया का उल्लेख है, यह केवल बाकी को ‘अन्य’ के रूप में वर्गीकृत करता है। इस अंतर ने ओबीसी समुदाय के भीतर भ्रम पैदा कर दिया है और जनगणना आयुक्त को एक आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी करके इस भ्रम को दूर करना चाहिए।

इस अभियान में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश भांगरथ, कोंकण विभाग के अध्यक्ष एकनाथ तरमाले, अरुण मडके, ठाणे जिला अध्यक्ष अशोक विशे, कंचन विशे, सुनील पाटिल, बुलढाणा जिला अध्यक्ष सूरज बोलेकर, सुरेश कापरे, भानुदास भोईर, किशोर कुदव, रमेश वनारसे, अनिल निचिते, भगवान ठाकुर, युवराज ठाकरे, हरिभाऊ पाटिल, नरेश अकारे, गोविंद पाटिल, शिवाजी पाटिल, नीलेश गंधे, रमेश मुकादम, परशुराम पितांबरे, जनार्दन पाटिल, अरुण पाटिल, रवींद्र घोडविंडे, शोभाताई म्हात्रे, काजल घोलप, प्रकाश पवार, मिलिंद मडके, दिलीप पवार, वसंत भेरे, कुमार वेखंडे, शिवाजी बेलावले, मधुकर शिंदे, रमेश तरमाले और ओबीसी समुदाय के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

(संपादन : नवल/अनिल)

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एफपी डेस्‍क

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