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समाज और संस्कृति

सावित्रीबाई फुले : भारत में अंग्रेजी शिक्षा की जननी
सावित्रीबाई का अंग्रेजी भाषा को मां का दर्जा देना एक बहुत बड़ा कदम था। उन्होंने यह तब किया जब वे पेशवाओं के ब्राह्मणवाद के गढ़ रहे पूना में रह रही थीं और उस नगर में...
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, पहला भाग)
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, “मुग़ल बादशाहों ने कभी भी अपने सिक्कों की गुणवत्ता कम नहीं की। सिक्का ढालने की तकनीक में कमियों को ध्यान में रखते हुए भी, उनके साम्राज्य के सबसे दूर-दराज़ इलाकों में...
करम परब : जंगल, खेत और रिश्तों को जोड़ने वाला आदिवासी उत्सव
करम परब को केवल करम वृक्ष की पूजा या एक रात के नाच-गाने तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता है। यह उस समाज की सामूहिक स्मृति है, जिसकी खेती जंगल से शुरू होती है...
महिलाओं की आज़ादी से क्यों डरते हैं पुरुष?
आम तौर पर पुरुषों को सिद्धांत और अवधारणा के स्तर पर महिलाओं की आज़ादी से कोई शिकायत या परेशानी नहीं होती। मगर वे महिलाओं की आज़ादी से डरते इसलिए हैं क्योंकि उसके चलते उन्हें अपने...
एक दिन द्वारका भारती के शहर होशियारपुर में
बीते 4 सितंबर, 2026 को होशियारपुर की यात्रा का मकसद पंजाब में दलित साहित्य के प्रतिनिधि साहित्यकार द्वारका...
‘जयंती-2’ : आरक्षण-विरोधी समय में सामाजिक न्याय आंदोलन की सिनेमाई अभिव्यक्ति
फिल्म में पायल की कहानी आरक्षण पर सीधे बहस किए बिना भी उस बहस की बुनियाद पर सवाल...
लुंबिनी : प्राचीन भारत का ऐतिहासिक-सांस्कृतिक साक्ष्य
यह असोक स्तंभ साफ तौर पर घोषणा करता है– “हिद बुधे जाते शाक्यमुनि ति।” अर्थात् यहां शाक्यमुनि (बुद्ध)...
आइए, मंडल कमीशन की रिपोर्ट को समझें (अंतिम भाग)
डॉ. आंबेडकर ने यह चेतावनी दी थी कि हम संविधान के माध्यम से जिस राजनीतिक लोकतंत्र को स्थापित...
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