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समाज और संस्कृति

सहजीवन : बदलते समाज के अंतर्द्वंद्व के निहितार्थ
विवाह संस्था जाति-धर्म की शुद्धता को बनाये रखने का एक तरीका मात्र है, इसलिए समाज उसका हामी है और इसलिए वह ऐसे जोड़ों की मदद को तत्पर भी रहता है। समाज और रिश्तेदार रिश्ते को...
यात्रा संस्मरण : वैशाली में भारत के महान अतीत की उपेक्षा
मैं सबसे पहले कोल्हुआ गांव गयी, जहां दुनिया के सबसे प्राचीन गणतंत्र में से एक राजा विशाल की गढ़ी है। वहां एक विशाल स्नानागार था। उस जगह और उसके आसपास की जगह को एएसआई ने...
शैक्षणिक बैरभाव मिटाने में कारगर हो सकते हैं के. बालगोपाल के विचार
अपने लेखन में बालगोपाल ने ‘यूनिवर्सल’ (सार्वभौमिक या सार्वत्रिक) की परिकल्पना की जो पुनर्विवेचना की है, उसे हम विद्यार्थियों और शिक्षाविदों को समझना चाहिए। यह पुनर्विवेचना अंतर्विषयक बैरभाव का समाधान निकालने में भी सक्षम है।...
भारत में वैज्ञानिक परंपराओं के विकास में बाधक रहा है ब्राह्मणवाद
कई उद्धरणों से ब्राह्मणवादी ग्रंथ भरे पड़े हैं, जिनसे भलीभांति ज्ञात होता है कि भारतीय खगोल-विद्या व विज्ञान को पस्त करने में हर प्रकार के हथकंडे अपनाए गए। वैज्ञानिकों को हर प्रकार से हतोत्साहित करने...
ओबीसी महिला अध्येता शांतिश्री धूलीपुड़ी पंडित, जिनकी नजर हिंदू देवताओं की जाति पर पड़ी
जब उत्पादक समुदायों जैसे शूद्र, दलित और आदिवासी समाजों से गंभीर बुद्धिजीवी उभरते हैं तब जाति व्यवस्था में...
पेरियार की नजर में रावण
पेरियार के मुताबिक, ‘संक्षिप्त में कहा जा सकता है कि रामायण में सच बोलने वाले और सही सोच...
‘हमारे पुरखे रावेन को मत जलाओ’
गोंडी भाषा में ‘रावण’ शब्द नहीं है। यह रावेन है। इसका मतलब होता है नीलकंठ पंछी। यह नीलकंठ...
भारतीय समाज में व्याप्त पूर्व-आधुनिक सोच का असर
देश भर में दलितों, पिछड़ों और‌ आदिवासियों के नरसंहार तथा उनके साथ ‌भेदभाव एवं गैरबराबरी से इतिहास भरा...
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