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समाज और संस्कृति

‘मिमी’ : केवल एक सरोगेट मदर की कहानी नहीं
वैसे तो फ़िल्म सरोगेसी के मुद्दे को केंद्र में रखकर बनायी गयी है, मगर कहानी के भीतर न जाने कितने ही और मुद्दे बारीकी से ही सही अलग-अलग मौकों पर दिखायी पड़ते हैं। खासतौर पर...
बहस-तलब : जबरन विवाह, नस्लभेद और जातिभेद आधुनिक गुलामी के मुख्य हथियार
आज के दौर में पेरियार की बातें इसलिए भी सही साबित हो रही हैं क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिसे जबरन विवाह कहा जाता है, वह हमारी संस्कृति का हिस्सा है और यहां सिविल मैरिज करनेवाले...
उत्तर भारत की महिलाओं के नजरिए से पेरियार का महत्व
ई.वी. रामासामी के विचारों ने जिस गतिशील आंदोलन को जन्म दिया उसके उद्देश्य के मूल मे था – हिंदू सामाजिक व्यवस्था को जाति, धर्म और ईश्वर की आस्था के बिना एक नए समाज में परिवर्तित...
यूपी : दलित जैसे नहीं हैं अति पिछड़े, श्रेणी में शामिल करना न्यायसंगत नहीं
सामाजिक न्याय की दृष्टि से देखा जाय तो भी इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने से दलितों के साथ अन्याय होगा। मंडल आयोग के एकमात्र दलित सदस्य एल. आर. नायक ने अन्य...
विज्ञान की किताब बांचने और वैज्ञानिक चेतना में फर्क
समाज का बड़ा हिस्सा विज्ञान का इस्तेमाल कर सुविधाएं महसूस करता है, लेकिन वह वैज्ञानिक चेतना से मुक्त...
पुस्तक समीक्षा : स्त्री के मुक्त होने की तहरीरें (अंतिम कड़ी)
आधुनिक हिंदी कविता के पहले चरण के सभी कवि ऐसे ही स्वतंत्र-संपन्न समाज के लोग थे, जिन्हें दलितों,...
बहस-तलब : आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पूर्वार्द्ध में
मूल बात यह है कि यदि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाता है तो ईमानदारी से इस संबंध...
साक्षात्कार : ‘हम विमुक्त, घुमंतू व अर्द्ध घुमंतू जनजातियों को मिले एसटी का दर्जा या दस फीसदी आरक्षण’
“मैंने उन्हें रेनके कमीशन की रिपोर्ट दी और कहा कि देखिए यह रिपोर्ट क्या कहती है। आप उन...
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