होलिका दहन के खिलाफ आगे आये बुद्धिजीवी

बिहार के हिसुआ में होली के अवसर पर होलिका दहन मनाये जाने के खिलाफ आगे आये बुद्धिजीवी, एक रपट :

पिछले 15 मार्च को हिसुआ के गया रोड में विद्युत् उपकेन्द्र के समीप स्थित एक भवन में मानववादी विचार मंच के तत्वावधान में होलिका शहादत दिवस मनाया गया। समारोह को संबोधित करते हुए अर्जक संघ के वरिष्ठ नेता उपेन्द्र पथिक ने कहा कि ‘हमें गलत इतिहास बता कर पर्व के नाम पर हमारा अब तक शोषण होता रहा है। किसी महिला की हत्या पर जश्न मनाना न्यायोचित नहीं है। महामना बुद्ध, कबीर, रैदास, सम्राट अशोक, फुले, डॉ आंबेडकर, रामस्वरूप वर्मा, जगदेव प्रसाद आदि हमारे आदर्श पुरूष व मार्गदर्शक हैं। हमारे पुरखों को असुर, राक्षस, दैत्य कहा गया। ‘उमेश बौध ने भी कई ऐतिहासिक दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि, ‘पिछड़े दलितों का सामाजिक-सांस्कृतिक आर्थिक और राजनीतिक शोषण किया गया है।’ समारोह को अन्य लोगों के अलावा धर्मेन्द्र पासवान, रामवृक्ष मोची, चंदन चौधरी, ललन मांझी, मनोज यादव, राम नारायण चौधरी, अरविन्द मांझी, संजय यादव, मनोज कुमार आदि वक्ताओं ने कहा कि ‘होलिका, महिषासुर समेत कई पिछड़े, दलित राजाओं की हत्या पर पर्व मनाना हमारे लिए उचित नहीं है। हमें गलत इतिहास को सही रूप में लिखने की आवश्यकता है।’

कार्यक्रम में मंच पर बुद्धिजीवी

 

स्थानीय अखबारों में ने भी इस खबर को दी तरजीह

 

रंजीत यादव की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह का संचालन मोसाफिर कुशवाहा ने किया।


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