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अस्थि कलश के जरिए अटल को महान बना रही भाजपा

मीडिया के समर्थन और सवर्ण नेताओं के प्रोत्साहन के बावजूद भी सवर्ण बंद विफल रहा। दलित-ओबीसी एकता तोड़ने में सवर्ण नाकामयाब रहे। एसटी-एसटी एक्ट के विरोध में ओबीसी समुदाय सवर्णों के साथ है, इस दावे की पोल खुल गई। हां कुछ बहुजन नेताओं पर हमले बोल कर सवर्णों ने अपनी घृणा का इजहार जरूर किया। अरूण कुमार की रिपोर्ट :

पूँजीवादी ब्राह्मणवाद के नायक हैं अटल बिहारी वाजपेय

(अटल बिहारी वाजपेयी : 25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018)

अटल बिहारी वाजपेयी को भाजपा दधिचि की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास कर रही है। उनके अस्थि अवशेषों को चार हजार कलशों में भरकर देश के अलग-अलग हिस्सों में समारोहपूर्वक विसर्जित किया जा रहा है। जाहिर तौर पर उनकी यह कोशिश उन्हें महान बनाने की है। लेकिन सच यह है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिसके लिए उन्हें याद किया जाए। अलबत्ता प्रधानमंत्री के रूप में उनके द्वारा लिये गये निर्णयों को कारण जनता पर जो प्रतिकूल असर पड़ा, इसके लिए उन्हें जरुर याद किया जाएगा।

पूरा आर्टिकल यहां पढें सवर्ण बंद : ओबीसी ने सवर्णों का साथ नहीं दिया

 

लेखक के बारे में

अलख निरंजन

अलख निरंजन दलित विमर्शकार हैं और नियमित तौर पर विविध पत्र-पत्रिकाओं में लिखते हैं। इनकी एक महत्वपूर्ण किताब ‘नई राह की खोज में : दलित चिन्तक’ पेंग्विन प्रकाशन से प्रकाशित है।

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