मेघालय : 2004 से बंद है ओबीसी प्रमाण पत्र

मेघालय में 2004 तक ओबीसी प्रमाण पत्र निर्गत किये जाते थे। लेकिन बाद में यह बंद कर दिया गया है। इसके विरोध में मेघालय के एक ओबीसी संगठन ने ज्ञापन सौंप कर सवाल उठाया है। फारवर्ड प्रेस की खबर :

पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। खासकर आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद इस वर्ग के लोगों को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। राज्य में 2004 के बाद ओबीसी प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किये जा रहे हैं। इसे लेकर मेघालय के ओबीसी संगठन ने सरकार के समक्ष मांग रखा है।

उनका सवाल यह है कि जब राज्य में ओबीसी वर्ग के लोग नहीं हैं, तब किस आधार पर 2004 तक राज्य में ओबीसी प्रमाण पत्र निर्गत किये गये?

इन सवालों को लेकर ऑल मेघालय बैकवर्ड क्लासेज ऑरगेनाइजेशन (एएमओबीसीओ) ने बीते 2 नवंबर 2018 को एक ज्ञापन समाज कल्याण विभाग के सचिव और आयुक्त टी. दिनकर को सौंपा।

मेघालय : 2004 के बाद नहीं जारी किये जा रहे ओबीसी प्रमाण पत्र

शिलांग टाइम्स द्वारा प्रकाशित खबर के अनुसार एएमओबीसीओ के अध्यक्ष आर. जी. प्रधान ने ज्ञापन के जरिए कई मांगों को सरकार के समक्ष रखा है। इनमें एक मांग ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किये जाने से संबंधित है। उन्होंने बताया है कि 2004 से मेघालय में ओबीसी प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किये जा रहे हैं।

बताते चलें कि 12 अप्रैल 2018 को सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सूचनाओं के अनुसार मेघालय सहित देश के कई राज्यों में ओबीसी वर्ग का अस्तित्व नहीं रह गया है। इन राज्यों में मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और लक्षद्वीप शामिल हैं। वहीं मणिपुर और सिक्किम में ओबीसी वर्ग की सूची में क्रमश: 4 और 8 जातियों को शामिल किया गया है।

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आर. जी. प्रधान ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 28 अक्टूबर 2013 को जारी पत्र में बताया गया कि मेघालय में ऐसा कोई जाति अथवा समुदाय नहीं है जो ओबीसी वर्ग से संबंध रखता हो। प्रधान ने बताया कि जब राज्य में ओबीसी वर्ग में शामिल कोई जाति ही नहीं है तो फिर 2004 के पहले ओबीसी प्रमाण कैसे निर्गत किये गये। इसका मतलब यह है कि मेघालय में ओबीसी समाज के लोग हैं और सरकार उनके हितों की अनदेखी कर रही है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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