आरक्षण भीख नहीं, बहुजनों का अधिकार : सावित्री बाई फुले

भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने आगामी 16 दिसंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रैली का आह्वान किया है। उनके हालिया बयानों से यह कयास लगाया जा रहा है कि वह अपने दल से विद्रोह करेंगी। इस संबंध में फारवर्ड प्रेस ने उनसे बातचीत की और यह जानने का प्रयास किया कि आखिर वे सरकार से नाराज क्यों हैं। पढ़ें इस साक्षात्कार के संपादित अंश

भाजपा की गुलाम नहीं, बहुजन समाज की बेटी हूं…

यह पहला अवसर नहीं है, जब उत्तर प्रदेश के बहराइच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने अपनी ही पार्टी की सरकार से नाराजगी व्यक्त की है। वे तब भी मुखर थीं, जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में बदलाव का फैसला सुनाया गया था। इसके अलावा पदोन्नति में आरक्षण को लेकर भी उन्होंने पुरजोर तरीके से दलितों का पक्ष लिया। एक बार फिर वे बगावत के मूड में हैं। इसकी वजह क्या है और उनकी रणनीति क्या होगी, आदि सवालों को लेकर फारवर्ड प्रेस ने विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है इस साक्षात्कार के संपादित अंश

मौजूदा आरक्षण व्यवस्था पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है। इससे आप कितना संतुष्ट है ?

देखिए, संतुष्टि या असंतुष्टि की बात तो तब करें, जब व्यवस्था फुलप्रूफ हो। यहां तो व्यवस्था में ही खोट नजर आ रहा है।

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