यौन स्वतंत्रता, कानून और नैतिकता

भारत के कानून यहां के पितृसत्ता को संपोषित करने वाले सामाजिक व्यवस्था के माकूल ही हैं। यौन स्वतंत्रता का अधिकार केवल पुरूषों को है। महिलाओं के हिस्से में है कानून और नैतिकता की विधिक व सामाजिक जिम्मेदारी

न्याय क्षेत्रे-अन्याय क्षेत्रे

वर्तमान भारतीय समाज का राजनीतिक नारा है ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ‘, मगर सामाजिक-सांस्कृतिक आकांक्षा है ‘आदर्श बहू‘। वैसे भारतीय शहरी मध्य वर्ग को ‘बेटी नहीं चाहिए‘, मगर बेटियाँ हैं तो वो किसी भी तरह की बाहरी (यौन) हिंसा से एकदम ‘सुरक्षित‘ रहनी चाहिए। हालांकि रिश्तों की किसी भी छत के नीचे, स्त्रियां पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं हैं। यौन हिंसा, हत्या, आत्महत्या, दहेज प्रताड़ना और तेज़ाबी हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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