समतामूलक समाज के लिए सृजन के संकल्प के साथ संपन्न हुई आंबेडकर जयंती

बीते 14 अप्रैल को डॉ. आंबेडकर की 130वीं जयंती के अवसर पर गाजियाबाद में चार किताबों का विमोचन किया गया। इस मौके पर युवा बहुजन चित्रकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई

मौका था डॉ. आंबेडकर की 130वीं जयंती का। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के विजयनगर इलाके के माता कॉलोनी में बने एक मध्यम आकार के पार्क में गहमागहमी थी। पार्क के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने डॉ. आंबेडकर की सुनहरे रंग की भव्य प्रतिमा के नीचे लोग मोमबत्तियां जला रहे थे। बगल में फूल रखे थे। सभी डॉ. आंबेडकर की चरणों में फूल चढ़ाते और नमन करते। ऐसा करने वालों में सभी आयु वर्ग के लोग थे। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक।

प्रतिमा के ठीक दाएं तरफ कनात लगे थे और एक मंच बना था। मंच के दाएं ओर ध्यान में लीन बुद्ध की आकर्षक पेंटिंग। इसके चित्रकार नरेंद्र सिंह गौतम स्वयं भी कार्यक्रम में मौजूद थे। वहीं मंच के बाएं ओर चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। एक चित्र जो सभी का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर रहा था, उसमें दिखाया गया कि एक ब्राह्मण के मुख में सारे लोग कैसे समाते जा रहे हैं। लोग इस चित्र के जरिए एक-दूसरे को बताते नजर आए कि ब्राह्मणों ने कैसे इस देश में सांस्कृतिक और सामाजिक वर्चस्व हासिल किया तथा आज भी वे कैसे ताकतवर बने हुए हैं। लोगों की बातचीत के केंद्र में डॉ. आंबेडकर की किताब जाति का विनाश और हिंदू धर्म की पहेलियां रहीं। 

कार्यक्रम के दौरान फारवर्ड प्रेस द्वारा प्रकाशित पुस्तक “हिंदू धर्म की पहेलियां” का हुआ विमोचन

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती समारोह समिति के द्वारा किया गया था। समिति के सदस्य हर आने वाले का ध्यान रख रहे थे। मंच से कोरोना को लेकर बार-बार उद्घोषणा की जा रही थी कि भौतिक दूरी का ध्यान रखें तथा मुंह पर मास्क जरूर लगाएं। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत बुद्ध वंदना से हुई। इसके लिए बौद्ध धर्मावलंबी मंच के दायें ओर बुद्ध की प्रतिमा के नीचे बैठ गए। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। मास्टर भीम सिंह ने बुद्ध के संदेशों का वाचन किया तथा हिंदी में उसका भावार्थ भी बताया। 

बुद्ध के संदेशों के बाद चार किताबों का विमोचन किया गया। इनमें फारवर्ड प्रेस, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित “हिंदू धर्म की पहेलियां : बहुजनो! जानो ब्राह्मणवाद का सच” पहली किताब रही। इस किताब के लेखक डॉ भीमराव आंबेडकर हैं। इसका अनुवाद अमरीश हरदेनिया द्वारा किया गया है तथा इसका संपादन व संदर्भ टिप्पणियां डॉ. सिद्धार्थ ने किया है। विमोचनकर्ताओं में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध समाजसेवी भीष्मपाल, दलित लेखक रघुवीर सिंह, चित्रकार नरेंद्र सिंह गौतम, डॉ. सिद्धार्थ, फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार और सामाजिक कार्यकर्ता उषा मधुर आदि शामिल रहे। कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी सामाजिक कार्यकर्ता जनार्दन चौधरी की थी। विमोचन के बाद दलित सामाजिक कार्यकर्ता नन्हे लाल ने किताब के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह किताब हिंदू धर्म में व्याप्त खामियों की पोल तो खोलती ही है, इस बात का प्रमाण भी है कि डॉ. आंबेडकर बहुजन समाज के हितों के प्रति कितने गंभीर थे। यह किताब उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लिखी। वे चाहते थे कि बहुजन समाज जितनी जल्दी हो, हिंदू धर्म की वर्चस्ववादी नीतियों को समझे और इसकी गुलामी से खुद को आजाद करे।

बहुजन युवा चित्रकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी ने लोगों का मन मोहा

दूसरी किताब, जिसका विमोचन इस मौके पर किया गया, वह सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित “आधुनिक परिदृश्य में बौद्ध धर्म” थी। इसके लेखक रघुवीर सिंह हैं। इस किताब के बारे में विस्तार से बताते हुए डॉ. सिद्धार्थ ने रघुवीर सिंह के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि बौद्ध धर्म को आज के संदर्भ में समझने के लिए इसके मौलिक सिद्धांतों को समझने की आवश्यकता है। 

मंचासीन अतिथियों ने तीसरी किताब के रूप में डॉ. सिद्धार्थ द्वारा लिखित व अगोरा प्रकाशन, वाराणसी द्वारा प्रकाशित किताब “बहुजन नवजागरण और प्रतिरोध के विविध स्वर” का विमोचन किया। इस किताब के बारे में कार्यक्रम का संचालन कर रहे जर्नादन चौधरी ने कहा कि किताब में बहुजन नायक-नायिकाओं के जीवन एवं उनके योगदानों के बारे में बताया गया है। सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित व रघुबीर सिंह द्वारा लिखित किताब “आधुनिक परिदृश्य में आंबेडकरवाद” चौथी किताब रही, जिसका विमोचन किया गया।

किताबों के विमोचन के बाद क्रांति ज्योति माता सावित्रीबाई फुले चित्रकला प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस प्रदर्शनी के तहत ‘सम्यक आर्ट एकेडमी, गाजियाबाद’ के विख्यात चित्रकार नरेंद्र सिंह गौतम, सुश्री हिहानी गौतम, सुश्री कोमल, युवा चित्रकार मोहित की तस्वीरें रखी गई थीं। वहीं रायलदीप पब्लिक स्कूल भीम नगर, गाजियाबाद और एल आर पब्लिक स्कूल, भीम नगर, विजय नगर सहित अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं की पेंटिंग का भी प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर चित्रकार हिहानी गौतम की लाॅकडाऊन विभिषिका से पीड़ित प्रवासी मजदूरों के दर्द को उकेरती पेंटिंग का अनावरण किया गया। 

युवा चित्रकार हिनानी गौतम द्वारा बनाई गई विशेष पेंटिंग का लोकार्पण

कार्यक्रम के अगले चरण में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय था “निजीकरण से बढ़ती गुलामी और बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर”। वक्ता के रूप में फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार ने कहा कि निजीकरण की परिभाषा में सांस्कृतिक और सामाजिक वर्चस्ववाद शामिल है। इससे मुकाबले के लिए आवश्यक है कि सभी दलित-बहुजन फिर चाहे वे आदिवासी हों, दलित हों या फिर ओबीसी, सभी एक-दूसरे के बीच सांस्कृतिक एकता स्थापित करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक एकता के बगैर राजनीतिक एकता स्थायी नहीं हो सकती।

विचार गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए वर्कर्स यूनिटी चैनल के प्रमुख संपादक संदीप राव ने निजीकरण के बढते खतरे के बारे में तफसील से जानकारी दी और लोगों को सचेत किया कि यदि समय रहते इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई तो भारत में सारे संसाधन हमेशा-हमेशा के लिए द्विजवादी ताकतें जो पूंजीवाद को मजबूत करने में सबसे आगे हैं, उनके हाथों में चली जाएंगे। विचार गोष्ठी को राजनीतिक विश्लेषक हर्ष मेहता, कवि सुरेन्द्र सिंह संतोषी सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

कार्यक्रम में उत्तर रेलवे, दिल्ली के मंडल वाणिज्य प्रबंधक अजय कुमार हांडा, नोएडा प्राधिकरण के डिप्टी डायरेक्टर (हॉर्टिकल्चर) राजेन्द्र कुमार, पंजाब एंड सिंध बैंक, मेरठ के ब्रांच मैनेजर अनिल कुमार, विख्यात न्यूरोलॉजिस्ट डा. राकेश कुमार, देशबंधु कॉलेज के प्रोफेसर चंद्रशेखर, आयोजन समिति के सदस्य लख्मीचंद सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन डॉ. आंबेडकर के इस विचार के साथ किया गया कि बंधुत्व के लिए स्वतंत्रता और समानता जरूरी है।

(संपादन : अनिल)


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