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उत्तर प्रदेश चुनाव : वर्तमान के आलोक में राजनीतिक बिसात और बहुजन समाज

हाल में मायावती का यह बयान भी गौरतलब है, जिसमें उन्होंने कहा है, कि अगर वे सत्ता में आती हैं, तो परशुराम की विशाल मूर्ति लगवाएंगीं। इससे जाहिर होता है कि उनकी प्राथमिकता में बहुजन समाज नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज है। वहीं सपा सुप्रीमो भी ऐसा ही राग अलाप रहे हैं। बता रहे हैं कंवल भारती

चंद माह बाद होने वाले उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज की राजनीतिक स्थिति क्या होगी और किस दल की सरकार बनेगी, ये अब अनसुलझे सवाल नहीं लग रहे हैं। प्रदेश के राजनीतिक हालात जितने आज साफ-साफ दिखाई दे रहे हैं, इससे पहले कभी दिखाई नहीं दिए थे। परिणाम जानने के लिए अब माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है। अगर मैं परिणाम बता दूं, तो शायद इस लेख को पढ़ने की रूचि आपके अंदर खत्म हो जाए। आपकी जिज्ञासा बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि वर्तमान समय की दलीय स्थिति का जायजा ले लिया जाय।

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लेखक के बारे में

कंवल भारती

कंवल भारती (जन्म: फरवरी, 1953) प्रगतिशील आम्बेडकरवादी चिंतक आज के सर्वाधिक चर्चित व सक्रिय लेखकों में से एक हैं। ‘दलित साहित्य की अवधारणा’ ‘स्वामी अछूतानंद हरिहर संचयिता’ आदि उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। उन्हें 1996 में डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार तथा 2001 में भीमरत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

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