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मेले में ‘सावित्रीनामा’ का हुआ लोकार्पण, अब ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध

फारवर्ड प्रेस द्वारा प्रकाशित यह किताब सावित्रीबाई फुले के समग्र साहित्य का मूल मराठी से हिंदी अनुवाद है। इसे अब फ्लिपकार्ट और अमेजन के जरिए खरीदा जा सकता है

गत 5 मार्च, 2023 को नौ दिनों तक चले विश्व पुस्तक मेले का समापन हो गया। इस पुस्तक मेले की अनुगूंज देश भर के साहित्यिक और बौद्धिक गलियारे में सुनाई दी। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इस मेले में फारवर्ड प्रेस के अलावा सम्यक प्रकाशन, अखड़ा, गौतम बुक सेंटर, दास प्रकाशन, बुद्धम् पब्लिकेशन ने भी भाग लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में पाठकों ने दलित-बहुजन विमर्श पर आधारित विभिन्न किताबों को देखा और खरीदारी की। 

इस दौरान फारवर्ड प्रेस की दो नई किताबें लोकार्पित की गईं। इनमें से एक किताब ‘सावित्रीनामा : सावित्रीबाई फुले का समग्र साहित्यकर्म (जोतीराव फुले के भाषण सहित)’ और दूसरी अंग्रेजी किताब ‘मसावात की जंग : अ बैटल फॉर इक्वलिटी’ है। पहली किताब में सावित्रीबाई फुले के गद्य और पद्य शामिल हैं, जिनका मूल मराठी से हिंदी में अनुवाद उज्ज्वला म्हात्रे ने किया है। दूसरी किताब पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर द्वारा 2001 में लिखित किताब का अंग्रेजी अनुवाद है। 

फारवर्ड प्रेस के स्टॉल पर सूरज एंगड़े

बताते चलें कि सावित्रीनामा किताब अब बिक्री के लिए अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। पाठक इसे घर बैठे खरीद सकते हैं। वहीं अंग्रेजी किताब ‘मसावात की जंग : अ बैटल फॉर इक्वलिटी’ यथाशीघ्र बिक्री के लिए उपलब्ध होगी।

‘सावित्रीनामा का लोकार्पण करते गणमान्य’

बीते 1 मार्च को मेले में फारवर्ड प्रेस के स्टॉल पर अनेक गणमान्य लोगों ने ‘सावित्रीनामा’ का लोकार्पण किया। इनमें पंजाबी-हिंदी के कवि बल्ली सिंह चीमा, सामाजिक कार्यकर्ता सह लेखिका लता प्रतिमा मधुकर, लेखक संपत सरल, लेखक सुभाषचंद्र कुशवाहा, दलित चिंतक व लेखक भंवर मेघवंशी, युवा कथाकार संदीप मील, व लेखक-पत्रकार डॉ. सिद्धार्थ, पत्रकार सुमित चौहान और सामाजिक कार्यकर्ता ए. आर. अकेला आदि शामिल रहे। इस मौके पर सभी गणमान्यों ने सावित्रीबाई फुले की रचनाओं की प्रासंगिकता बढ़ने की बात कही।

प्रसिद्ध आदिवासी विमर्शकार व साहित्यकार वंदना टेटे

वहीं 4 मार्च को प्रसिद्ध युवा दलित विमर्शकार सूरज एंगड़े ने भी फारवर्ड प्रेस के स्टॉल पर ‘मसावात की जंग : अ बैटल फॉर इक्वलिटी’ का लोकार्पण किया।

पूरे मेले के दौरान फारवर्ड प्रेस दलित-बहुजन पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बना रहा। मेले के दौरान अनेकानेक लेखकों व चिंतकों यथा वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, प्रसिद्ध आदिवासी विमर्शकार व साहित्यकार वंदना टेटे, दलित लेखक संघ की पूर्व अध्यक्ष अनिता भारती, कथाकार योगिता यादव, प्रसिद्ध समालोचक वीरेंद्र यादव, लेखक व पत्रकार महेश यादव, साहित्यकार राकेश रेणु, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंदी के अध्येता प्रो. राजेश पासवान, पत्रकार सैयद जैगम मुर्तजा आदि ने फारवर्ड प्रेस की किताबों का अवलोकन किया।


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, संस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

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एफपी डेस्‍क

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