आखिर उच्च विज्ञान संस्थानों में दलित-बहुजन की भागीदारी क्यों नहीं है?

आईआईएसईआर जैसे उच्च विज्ञान शिक्षण संस्थानों में आरक्षण को महत्व नहीं दिया जा रहा है। यही वजह है कि इन संस्थानों में दलित-बहुजनों की संख्या काफी कम है। इस संबंध में आरटीआई के ज़रिये मिली जानकारियां बानगी ही सही, परंतु महत्वपूर्ण हैं। नवल किशोर कुमार की खबर

कहना गैर वाजिब नहीं कि आज भी उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित-बहुजनों की भागीदारी न्यून है। सबसे अधिक खराब स्थिति उच्च विज्ञान शिक्षण संस्थानों की है जहां दलित-बहुजनों की भागीदारी इतनी कम है कि यह सवाल स्वाभाविक तौर पर सामने आता है कि क्या इन संस्थाओं पर केवल द्विज वर्गों का अधिकार है?

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