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साहित्‍य

वर्चस्ववादी विमर्शों के खिलाफ प्रति-विमर्श बयान करता एक लघु उपन्यास
‘हड़प्पा: गॉड्स सिटी ऑफ़ सिविलाईजेशन’ – कांचा आइलैय्या शेपर्ड का कथा साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश एक साहसिक कदम है। यह एक उद्घोषणा है कि दमितों को भी यह अधिकार है कि वे अपनी सभ्यतागत...
विज्ञान को समझने की पहली किताब ‘मिथकों से विज्ञान तक’
विज्ञान परिवर्तनवादी है। वह एक धारणा या एक मान्यता पर स्थिर नहीं है। गौहर रज़ा कहते हैं कि विज्ञान की शोध रुकती नहीं है, वह अपने निष्कर्षों को बार-बार परखता है। इस परख में विज्ञान...
इस्लाम, जाति-प्रथा और प्रेमचंद
सांप्रदायिक लेखक और नेता प्रायः राजनीतिक इतिहास को अनावश्यक रूप से प्राथमिकता देते हैं, जबकि सामाजिक और आर्थिक इतिहास को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और यहीं प्रेमचंद अपने समकालीन लेखकों से अलग और आगे नज़र...
पुस्तक पुनर्पाठ : सुनो कहानी ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’
महुआ माजी की यह कथा कोल्हान क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, और सरायकेला-खरसावां) के उन आदिवासी समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाती है, जो लंबे समय से यूरेनियम खनन और उससे निकलने वाले रेडियोधर्मी...
असुर समुदाय के अध्यात्म और जीवन-सौंदर्य को अभिव्यक्त करतीं सुषमा असुर की कविताएं
फौरी तौर पर तो यही लगता है कि सुषमा बुद्ध के मध्यमार्ग की बात कह रही हैं, लेकिन...
सुरेंद्र स्निग्ध की कहानियों में समाज और विमर्श
इस संग्रह की तीसरी और अंतिम श्रेणी की कहानियां सामाजिक संघर्षों पर आकर ठहरती हैं। जो लेखक के...
‘जीते जी इलाहाबाद’ में दलित-बहुजनों के सवालों को नहीं देख सकीं ममता कालिया
जहां एक तरफ़ इलाहाबाद के सामाजिक यथार्थ की बात करने से गुरेज़ किया गया है, वहीं लेखिका इस...
मैं भी चाहता हूं कि दलित साहित्य बहुजन साहित्य में परिणत हो : कंवल भारती
शिवमूर्ति ने ‘तिरिया चरित्तर’ लिखी, ‘सिरी उपमा जोग’ लिखी। शिवमूर्ति ने गांव के यथार्थ को नंगा कर दिया।...
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