कवि सवाल करता है कि ‘फिर चमारीखेड़ा के नाम में ऐसा क्या चुभ गया, जो लोगों को रास नहीं आता’। तथाकथित ऊंची जाति वालों को यह नाम लगातार चुभता रहा, क्योंकि उन्हें अपने गांव का...
जसिंता केरकेट्टा की बीस कहानियों का संग्रह ‘औरत का घर’ इस विरोधाभास को बख़ूबी उजागर करता है कि एक ओर आदिवासी समाज ‘दिक्कू’ व्यवस्था का शिकार रहा है, तो दूसरी ओर वह अपनी महिलाओं पर...
इस पुस्तक का केंद्रीय संदेश यही है कि महात्मा की उपाधि से अधिक महत्वपूर्ण यह देखना है कि वह मनुष्य किसके पक्ष में खड़ा था, किस व्यवस्था को चुनौती दे रहा था और उसकी मुक्ति...
‘हड़प्पा: गॉड्स सिटी ऑफ़ सिविलाईजेशन’ – कांचा आइलैय्या शेपर्ड का कथा साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश एक साहसिक कदम है। यह एक उद्घोषणा है कि दमितों को भी यह अधिकार है कि वे अपनी सभ्यतागत...