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साहित्‍य

खड़ी बोली की कविता जगत को चुनौती देतीं राजेश पाल की कविताएं
कवि सवाल करता है कि ‘फिर चमारीखेड़ा के नाम में ऐसा क्या चुभ गया, जो लोगों को रास नहीं आता’। तथाकथित ऊंची जाति वालों को यह नाम लगातार चुभता रहा, क्योंकि उन्हें अपने गांव का...
आदिवासी स्त्रियों के साथ होने वाले शोषण की दास्तान
जसिंता केरकेट्टा की बीस कहानियों का संग्रह ‘औरत का घर’ इस विरोधाभास को बख़ूबी उजागर करता है कि एक ओर आदिवासी समाज ‘दिक्कू’ व्यवस्था का शिकार रहा है, तो दूसरी ओर वह अपनी महिलाओं पर...
दो महात्माओं की कहानी
इस पुस्तक का केंद्रीय संदेश यही है कि महात्मा की उपाधि से अधिक महत्वपूर्ण यह देखना है कि वह मनुष्य किसके पक्ष में खड़ा था, किस व्यवस्था को चुनौती दे रहा था और उसकी मुक्ति...
वर्चस्ववादी विमर्शों के खिलाफ प्रति-विमर्श बयान करता एक लघु उपन्यास
‘हड़प्पा: गॉड्स सिटी ऑफ़ सिविलाईजेशन’ – कांचा आइलैय्या शेपर्ड का कथा साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश एक साहसिक कदम है। यह एक उद्घोषणा है कि दमितों को भी यह अधिकार है कि वे अपनी सभ्यतागत...
विज्ञान को समझने की पहली किताब ‘मिथकों से विज्ञान तक’
विज्ञान परिवर्तनवादी है। वह एक धारणा या एक मान्यता पर स्थिर नहीं है। गौहर रज़ा कहते हैं कि...
इस्लाम, जाति-प्रथा और प्रेमचंद
सांप्रदायिक लेखक और नेता प्रायः राजनीतिक इतिहास को अनावश्यक रूप से प्राथमिकता देते हैं, जबकि सामाजिक और आर्थिक...
पुस्तक पुनर्पाठ : सुनो कहानी ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’
महुआ माजी की यह कथा कोल्हान क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, और सरायकेला-खरसावां) के उन आदिवासी समुदायों की...
असुर समुदाय के अध्यात्म और जीवन-सौंदर्य को अभिव्यक्त करतीं सुषमा असुर की कविताएं
फौरी तौर पर तो यही लगता है कि सुषमा बुद्ध के मध्यमार्ग की बात कह रही हैं, लेकिन...
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