लगभग सभी धर्म राजसत्ता से सांठ-गांठ कर, शक्ति-केंद्रों में बदलते चले गए। जैन तथा बौद्ध धर्म ने भी यही किया। आजीवक पिछड़ते गए। सच तो यह है कि इस स्पर्धा में वे कभी थे ही...
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, यह अजीब बात है कि भारत में व्यापारी समुदाय को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई। कागज़ी मुद्रा में सुधार या स्वतंत्र कोषागार...
सावित्रीबाई का अंग्रेजी भाषा को मां का दर्जा देना एक बहुत बड़ा कदम था। उन्होंने यह तब किया जब वे पेशवाओं के ब्राह्मणवाद के गढ़ रहे पूना में रह रही थीं और उस नगर में...
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, “मुग़ल बादशाहों ने कभी भी अपने सिक्कों की गुणवत्ता कम नहीं की। सिक्का ढालने की तकनीक में कमियों को ध्यान में रखते हुए भी, उनके साम्राज्य के सबसे दूर-दराज़ इलाकों में...