हिंदुत्ववादी राजनीति को मुसलमानों के मुसलमानों की तरह सोचने से कोई दिक्कत नहीं है। उसे दिक़्क़त बस मुसलमानों के नागरिक की तरह सोचने से है। इस तथ्य की ऐसे भी तस्दीक की जा सकती है...
एक सवाल से अगर स्त्री के बॉडी काउंट एक से अधिक हुए तो उसके चरित्र पर धब्बा लग जाता है और वहीं पुरुष का एक से जितना अधिक, मर्दानगी का तमगा उतना बड़ा होता है।...
अपने संबोधन में डॉ. परकला प्रभाकर ने कहा कि असम में जहां केवल स्पेशल रिवीजन (एसआर) हुआ, वहां सीमित स्तर पर नाम हटे, लेकिन जिन राज्यों में एसआईआर लागू हुआ, वहां बड़े पैमाने पर मतदाताओं...
स्वीकार करना होगा कि कांचा आइलैय्या शेपर्ड की पुस्तक ‘शूद्र विद्रोह : ताकि बन सके आत्मनिर्भर भारत’ बहुजन समाज के एक ऑर्गैनिक बौद्धिक का श्रमशील समाज के दृष्टिकोण से प्रस्तुत एक मौलिक चिंतन है। इसे...