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सम-सामयिकी

झारखंड : सरना-सनातन एकता का नारा झूठा
आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना है कि सरना धर्म कोड की मांग सिर्फ जनगणना कोड की नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण, भूमि अधिकार, जल, जंगल, जमीन पर नियंत्रण और पहचान की है। बता रहे...
संसद में यूं गूंजी ओबीसी महिलाओं के अधिकार की आवाज
पंजाब के होशियारपुर के सांसद डॉ. राजकुमार छब्बेवाल ने कहा कि सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने भारत में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। लेकिन भारत सरकार की ओर से उन्हें...
जंतर-मंतर पर धरने में शामिल ओबीसी महिलाओं ने कहा– ‘साडा हक, इत्थे रख’
धरने में शामिल महिला प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक महिला आरक्षण में ओबीसी जो बहुसंख्यक समूह है, की महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता है, तब तक यह अधूरा है और...
बिहार में मंडलवादी राजनीति के अस्तित्व पर सवाल
मंडल राजनीति का मूल उद्देश्य केवल सत्ता में भागीदारी नहीं था, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संरचना में बुनियादी बदलाव लाना था। यह केवल जातीय प्रतिनिधित्व की राजनीति नहीं, बल्कि वर्ण-जाति के उन्मूलन के साथ वर्ग...
लखनऊ में समता अधिकार सम्मेलन में जुटे बहुजन आंदोलन के प्रतिनिधि
वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस सरकार में सबसे बड़ा हमला...
राजा राममोहन राय नहीं, फुले थे नवजागरण के अग्रदूत
राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती, रानाडे, भंडारकर, आगरकर आदि के कार्य उतना सामाजिक परिवर्तन के लिए वांछित नहीं...
रूपम मिश्रा की कविता को लेकर विवाद की परतें
इस मामले के दो सिरे हैं। पहला सिरा सीपीआईएमएल से जुड़ा है। सीपीआईएमएल के इलाहाबाद क्षेत्र में रामजी...
मुस्लिम नेतृत्व की तीसरी पीढ़ी : उम्मीदें और विडंबनाएं
1980 के दशक में हिंदू पिछड़ों की राजनीतिक उभार भी नई परिघटना थी, इसलिए उसके अधिकतर नेता भी...
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