यह कौतूहल जरूर होता है कि हिंदुओं के संपूर्ण पौराणिक वाङ्मय में जिन्हें अनार्य, राक्षस, असुर, दस्यु, दास, यहां तक कि मानवेतर वानर शब्द से नवाजा गया और जिन्हें आज भी उनके मूल नाम ‘आदिवासी’...
स्टालिन इसलिए भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे कि उन्होंने राज्य को नीट से छूट और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में तीन भाषा वाली पॉलिसी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने पुरजोर मांग की कि शिक्षा राज्य का विषय...
यह मानने में हिचक नहीं होनी चाहिए कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश की पृष्ठभूमि भी संस्थागत है। यह उनकी सीमा है। इसीलिए उनमें वह व्यापक सामाजिक नजरिया विकसित नहीं हो सका है जो कि लोकतंत्र के...
संस्कृत तथा धर्म-शास्त्रों में प्रवीण होने के बावजूद धोंडीराम अपने सत्यशोधक होने के लक्ष्य से भटके नहीं थे। सन् 1896 में उनकी एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी, जिसका शीर्षक उन्होंने ‘वेदाचार’ रखा था। उनकी यह...