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समाज और संस्कृति

आजीवक दर्शन : जिसकी पहचान भुला दी गई थी (पहला भाग)
लगभग सभी धर्म राजसत्ता से सांठ-गांठ कर, शक्ति-केंद्रों में बदलते चले गए। जैन तथा बौद्ध धर्म ने भी यही किया। आजीवक पिछड़ते गए। सच तो यह है कि इस स्पर्धा में वे कभी थे ही...
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, दूसरा भाग)
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, यह अजीब बात है कि भारत में व्यापारी समुदाय को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई। कागज़ी मुद्रा में सुधार या स्वतंत्र कोषागार...
सावित्रीबाई फुले : भारत में अंग्रेजी शिक्षा की जननी
सावित्रीबाई का अंग्रेजी भाषा को मां का दर्जा देना एक बहुत बड़ा कदम था। उन्होंने यह तब किया जब वे पेशवाओं के ब्राह्मणवाद के गढ़ रहे पूना में रह रही थीं और उस नगर में...
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, पहला भाग)
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, “मुग़ल बादशाहों ने कभी भी अपने सिक्कों की गुणवत्ता कम नहीं की। सिक्का ढालने की तकनीक में कमियों को ध्यान में रखते हुए भी, उनके साम्राज्य के सबसे दूर-दराज़ इलाकों में...
करम परब : जंगल, खेत और रिश्तों को जोड़ने वाला आदिवासी उत्सव
करम परब को केवल करम वृक्ष की पूजा या एक रात के नाच-गाने तक सीमित करके नहीं समझा...
महिलाओं की आज़ादी से क्यों डरते हैं पुरुष?
आम तौर पर पुरुषों को सिद्धांत और अवधारणा के स्तर पर महिलाओं की आज़ादी से कोई शिकायत या...
एक दिन द्वारका भारती के शहर होशियारपुर में
बीते 4 सितंबर, 2026 को होशियारपुर की यात्रा का मकसद पंजाब में दलित साहित्य के प्रतिनिधि साहित्यकार द्वारका...
‘जयंती-2’ : आरक्षण-विरोधी समय में सामाजिक न्याय आंदोलन की सिनेमाई अभिव्यक्ति
फिल्म में पायल की कहानी आरक्षण पर सीधे बहस किए बिना भी उस बहस की बुनियाद पर सवाल...
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