आदिवासी समाज के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं के प्रति अंधविश्वास, पितृसत्ता और सामाजिक भेदभाव गहराई से मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में यदि कोई आदिवासी महिला अपने अधिकारों के लिए कब्रिस्तान तक पहुंचकर कब्र...
अगर डांगावास (14 मई, 2015, राजस्थान), खैरलांजी (27 सितंबर, 2006, महाराष्ट्र) और लक्ष्मणपुर बाथे (1 दिसंबर, 1997) जैसे नरसंहार और प्रताड़नाएं दलित साहित्य का हिस्सा नहीं हैं, तो फिर वह साहित्य किस काम का? पढ़ें,...
सन् 1930 के आरंभिक वर्षों तक संतराम बी.ए. एक ऐसे समाज सुधारक के तौर पर हमारे सामने प्रस्तुत होते हैं, जो हिंदू धर्म के दायरे में रहकर ही अस्पृश्यता की समस्या का समाधान खोज रहे...
यह संभव है कि क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन जैसे ऊंची जाति के सांवले व्यक्तियों के साथ कुछ मौकों पर ऐसा व्यवहार किया जाता हो जो उनकी दृष्टि में उनके दर्जे या प्रतिष्ठा के अनुरूप न हो।...