सरस्वती नहीं, सावित्री

हिंदू देवी सरस्वती की पूजा में अभ्यस्त रहे इस देश में नई जागरूकता की बानगी पेश कर रहे हैं बहुजन। भारत की पहली शिक्षिका क्रान्तिसूर्य सावित्रीबाई फुले की जयंती को सर्वशिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है

नई दिल्ली : हिंदू देवी सरस्वती की पूजा में अभ्यस्त रहे इस देश में नई जागरूकता की बानगी पेश कर रहे हैं बहुजन। भारत की पहली शिक्षिका क्रान्तिसूर्य सावित्रीबाई फुले की जयंती को सर्वशिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। इस वर्ष 3 जनवरी को उनकी 184वीं जयन्ती देश भर में मनाई गयी। सावित्री बाई फुले ने 1848 में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था, जहां लड़कियों को पढ़ाने के क्रम में उनपर पत्थर और कीचड़ तक फेके गये थे। 184वीं जयंती की कुछ झलकियाँ :

 

प्रसिद्ध मराठी लेखिका नूतन मालवी ने अपनी इस मराठी किताब ‘विद्येची स्फूर्तीनायिका सरस्वती की सावित्री?’ में सवाल उठाया है कि विद्या की स्वत: स्फूर्त नायिका कौन है — सरस्वती या सावित्री?

 

 

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2015 अंक में प्रकाशित )


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