डीयू में बने एससी, एसटी व ओबीसी सेल

यूजीसी के द्वारा सख्त निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक यूनिवर्सिटी/कॉलेज/संस्थान में एससी, एसटी सेल बने। लेकिन देखने में आया है कि अधिकांश कॉलेजों में सेल की स्थापना नहीं की गई है

दिल्ली विश्वविद्यालय में एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने एससी, एसटी और ओबीसी के लिए विशेष सेल का गठन किए जाने की मांग की है।

गौर तलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों और विभागों में शैक्षिक सत्र 2018–19 के अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, सर्टिफ़िकेट कोर्स के अलावा एमफिल और पीएचडी जैसे कोर्सों के लिए एडमिशन की तिथि घोषित हो चुकी है। अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए पहली एडमिशन लिस्ट 19 जून को आनी है। प्रो. हंसराज ने कुलपति प्रो. योगेश कुमार से मांग की है कि आरक्षित वर्गों से आने वाले छात्र/छात्राओं के लिए विशेष सेल का गठन की जाय ताकि उनकी समस्याओं का निराकरण हो सके।

प्रो. हंसराज सुमन, सदस्य, एकेडमिक काऊंसिल, दिल्ली विश्वविद्यालय

प्रो सुमन के अनुसार यूजीसी के द्वारा सख्त निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक यूनिवर्सिटी/कॉलेज/संस्थान में एससी, एसटी सेल बने। लेकिन देखने में आया है कि अधिकांश कॉलेजों में सेल की स्थापना नही की गई है। सेल छात्रों के एडमिशन, स्कॉलरशिप, जातीय भेदभाव, शिक्षा संबंधी किसी तरह का भेदभाव किया जाता है तो सेल में अपना केस दर्ज कराया जा सकता है।

प्रो. सुमन के मुताबिक कई सालों से देखने में आया है कि कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के फर्जी जाति प्रमाण पत्र पाए गए। वे भी तभी संभव हो पाया कि जब संदेह हुआ कि इन कॉलेजों के जाति प्रमाण पत्रों की जांच हो,और फर्जी जाति प्रमाण पत्र पाए जाने पर उनका एडमिशन रदद् कर दिया गया और कुछ दंड नहीं दिया गया। कॉलेजों में भी एडमिशन के समय एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के जाति प्रमाण पत्रों की ठीक से जांच नहीं की जाती है।


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