रोजगार मेलों की आड़ में बंधुआ बनाए जा रहे आदिवासी युवा

मध्य प्रदेश सरकार का कौशल विकास व रोजगार निर्माण बोर्ड ऐसा ठेकेदार बनकर रह गया है, जो मजबूर आदिवासी युवाओं का शोषण कर रहा है। राजेश शर्मा की रिपोर्ट :

बैतूल : मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार रोजगार मेलों की आड़ में राज्य के आदिवासी युवाओं को बंधुआ मजदूरी की आग में झोंक रही है। शिवराज सरकार में राज्य कौशल विकास व रोजगार निर्माण बोर्ड ऐसा ठेकेदार बनकर रह गया है, जो मजबूर आदिवासी युवाओं का शोषण कर रहा है। समाजवादी जन परिषद ने रोजगार मेलों के नाम पर हो रहे इस शोषण के लिए शिवराज सरकार की तीखी आलोचना की है।

आदिवासियों के एक कार्यक्रम को संबाेधित करते शिवराज सिंह चौहान, फाइल फोटो

परिषद ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश के आदिवासी युवाओं को सस्ता मजदूर बनाया जा रहा है। रोजगार मेलों में चयनित युवाओं को मध्य प्रदेश से बाहर पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडू आदि राज्यों के कारखानों में शोषण के लिए भेजा जा रहा है। वहां इन युवाओं को महज पांच से छह हजार रुपए मासिक पगार दी जाती है। परिषद का कहना है कि आईटीआई पास युवाओं को कम से कम 18 हजार रुपए मासिक वेतन मिलना चाहिए। मध्य प्रदेश रोजगार बोर्ड जिला कलेक्टर के माध्यम से इन मेलों का आयोजन करता है। इन मेलों से सस्ता श्रम जुटाया जा रहा है, जिससे मजबूर युवाओं का शोषण हो रहा है। समाजवादी जन परिषद के पदाधिकारी अनुराग मोदी ने कहा कि हाल ही में बैतूल जिला मुख्यालय में आयोजित एक रोजगार मेले में शिवराज सरकार की पोल खुली है। यहां आयोजित मेले में तीन राज्यों की 11 कंपनियों ने भाग लिया। यदि मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास व रोजगार बोर्ड की तरफ से जारी सूचना पर्चों का अवलोकन किया जाए तो ये स्पष्ट होता है कि इन कंपनियों में युवाओं को महज छह हजार रुपए तक का वेतन मिलने की बात कही गई है। जिला रोजगार अधिकारी की तरफ से जारी इन पर्चों में उक्त वेतनमान का जिक्र साफ-साफ देखा जा सकता है। वहीं, रोजगार बोर्ड के अधिकारी हेमंत देशमुख के प्रेस बयान के अनुसार अकेले बैतूल जिला में ऐसे छह मेले आयोजित होंगे। इसके अलावा मध्य प्रदेश के हर जिला में इन मेलों का आयोजन होगा। समाजवादी जन परिषद का आरोप है कि इन मेलों में प्रदेश से सस्ता श्रम जुटाकर उन्हें बंधुआ मजदूर बनाया जाएगा। परिषद की प्रदेश अध्यक्ष स्मिता ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध करवाने के दावे करती आ रही है, लेकिन हकीकत में तस्वीर इसके विपरीत है। मध्य प्रदेश में डेढ़ दशक से शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है, परंतु बेरोजगार युवाओं को रोजी-रोटी कमाने के लिए अपने घर-गांव से हजारों किलोमीटर दूर जाकर बंधुआ मजदूर बनना पड़ रहा है।

मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रकाशित रोजगार मेला का पर्चा, जिसमें नियत वेतन का भी उल्लेख है

स्मिता ने आरोप लगाया कि शिवराज सरकार युवाओं को घर-द्वार पर रोजगार दिलाने में विफल रही है। परिषद के पदाधिकारी अनुराग मोदी का भी आरोप है कि रोजगार के नाम पर आदिवासी युवाओं का शोषण हो रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि आदिवासी युवाओं को राज्य में ही रोजगार का इंतजाम किया जाना चाहिए। साथ ही आईटीआई पास युवाओं को कम से कम 18 हजार रुपए मासिक वेतन देना सुनिश्चित किया जाए। वहीं, स्मिता ने कहा कि एक बार जब ये आदिवासी युवा बाहरी राज्यों के कारखानों में पहुंच जाते हैं तो वहां बंधुआ मजदूर बनकर रह जाते हैं। समाजवादी जन परिषद के बैतूल जिला अध्यक्ष बसंत टेकाम का कहना है कि पहले फैक्ट्रियों के दलाल गांव-गांव घूमकर आदिवासी युवाओं के तौर पर सस्ता श्रम तलाशते थे, लेकिन अब यही काम खुद सरकार कर रही है। समाजवादी जन परिषद इन रोजगार मेलों के आयोजन में एक साजिश भी सूंघ रही है। परिषद का आरोप है कि विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है और शिवराज सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए रोजगार मेलों की आड़ ले रही है। शिवराज सरकार इन मेलों का आयोजन कर यहां से युवाओं को बाहरी राज्यों में भेजना चाहती है, ताकि नाराज आदिवासी युवा उनके खिलाफ वोट न कर पाएं। अनुराग मोदी, स्मिता व बसंत टेकाम ने राज्य सरकार से मांग की है कि आदिवासी युवाओं को राज्य में ही उचित नौकरी दी जाए। उन्होंने युवाओं के शोषण को रोकने की मांग भी की है।

(कॉपी-संपादन : डेस्क)


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