कटघरे में विभूति नारायण राय

साहित्यकार और पूर्व नौकरशाह विभूति नारायण राय का विवादों से चोली-दामन वाला रिश्ता रहा है। वर्धा विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर रहते हुए भी उनके खिलाफ कई मामले प्रकाश में आये थे। करीब छह वर्ष पुराने एक मामले में वे फिर फंसते नजर आ रहे हैं। एक खबर

मामला उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) के पूर्व कुलपति विभूति नारायण से जुड़ा है। करीब छह वर्ष पूर्व राजीव कुमार सुमन ने उनके खिलाफ फर्जी प्रव्रजन प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप लगाया था। बीते 13 जुलाई 2018 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वर्धा अपूर्व भसारकर ने इस मामले में फिर से संज्ञान लिया। उन्होंने विभूति नारायण राय के खिलाफ दायर एफआईआर पर वर्धा पुलिस को तीन महीने के अंदर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिये हैं। साथ ही कोर्ट ने  उनके साथ ही विश्वविद्यालय के दो अन्य अधिकारियों को अभियुक्त बनाने का निर्देश दिया।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय

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गौर तलब है कि 6 वर्ष पूर्व 2012 में विश्वविद्यालय के पीएच-डी शोधार्थी राजीव कुमार सुमन द्वारा तत्कालीन कुलपति विभूति नारायण राय, कुलसचिव कैलाश खामरे (अब मृत), उपकुलसचिव अकादमिक कादर नवाज खान तथा परीक्षा प्रभारी कौशल किशोर त्रिपाठी के खिलाफ फर्जी प्रव्रजन पत्र बनाकर देने के संबंध में स्थानीय थाने में एफ़आईआर दर्ज़ करायी गई थी।

यह है मामला

राजीव कुमार सुमन हिंदी विश्वविद्यालय के छात्र थे तथा अपने सहयोगी मित्रों के साथ समय-समय पर विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार, असंवैधानिक नियुक्तियों को लेकर आवाज़ उठाते थे। इसी दौरान आईपीएस ऑफिसर विभूति नारायण राय को हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति के रूप में नामित किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान विभूति नारायण राय कई विवादों से घिरे रहे। कभी छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर तो कभी महिला लेखकों के प्रति विवादित टिप्पणी के लिए। विश्वविद्यालय के छात्र रहे राजीव सुमन का आरोप है कि राय द्वारा उन्हें न सिर्फ लगातार प्रताडित किया गया, बल्कि उन्हें फर्जी मुकदमे में भी फंसाया गया।


(कॉपी एडिटर : नवल)


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