एससी, एसटी और ओबीसी प्रशिक्षित बेरोजगारों ने हिमाचल सरकार को दिया अल्टीमेटम

हिमाचल प्रदेश के एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के प्रशिक्षित बेरोजगारों ने राज्य सरकार को चेताया है। उनका कहना है कि सरकार रोजगार ही नहीं देना चाहती है। बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। उनकी मांग है कि बैकलॉग खत्म कर रिक्त पदों के विरूद्ध भर्तियां की जाय। बी. आनंद की रिपोर्ट

 रोस्टर और बैकलॉग से भरे जाएं शिक्षा विभाग में रिक्त पद, नहीं तो चुनाव का करेंगे बहिष्कार

कोई भी पार्टी सत्ता में आने के लिए हर बार बेरोजगारों को नौकरी का प्रलोभन देती है परंतु वोट लेकर सरकार बन जाने के बाद बेरोजगारों को भूल जाती है। यह कहना है एससी, एसटी, ओबीसी प्रशिक्षित बेरोजगार संघ हिमाचल प्रदेश का। शिक्षा विभाग में पीटीए, पैरा, पैट और एसएमसी भर्ती प्रक्रिया में रोस्टर न लगाने से नाराज इन प्रशिक्षित बेरोजगारों ने जिला उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपकर रोस्टर लागू करने की मांग की है। उन्होंने सरकार का चेताया कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आगामी लोकसभा चुनाव में वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

जयराम ठाकुर, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश

एससी,एसटी, ओबीसी प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार कहते हैं कि इस संदर्भ में हमने उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में काफी सालों से खाली पड़े पदों को बैचवाइज आधार पर भरा जाए। इसके लिए हिमाचल बेरोजगार संघ एस,एसटी, ओबीसी प्रशिक्षित बेरोजगार और अन्य कई संगठन सरकार से बार-बार इन पदों को बैचवाइज आधार पर पद भरने की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस कार्यकाल के समय में वीरभद्र सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बैचवाइज 6 हजार पद भरे जाएंगे। उसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार आ गई। आज भी नियुक्तियां पीटीए, पैरा एसएमसी और पैट के आधार पर करती आ रही है।

संघ का कहना है कि इन असंवैधानिक भर्तियों के अंतर्गत कोई रोस्टर लाग नहीं किया गया और जो अपने बैच का इंतजार कर रहे हैं उनको नौकरी नहीं मिली। संघ ने सरकार को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि इन असंवैधानिक नीतियों का बेरोजगारों के ऊपर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कई प्रशिक्षित बेरोजगार 45 साल की उम्र भी पूरी कर चुके हैं। दूसरा इनका रोजगार का कोई अन्य साधन भी नहीं है। पिछली सरकार और अब जयराम सरकार के समय पिछले दरवाजों से जो भर्तियां हो रही हैं वे गैरकानूनी हैं। इसका खामियाजा बेरोजगारों को भुगतना पड् रहा है। संघ ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ऐसी ही असंवैधानिक भर्तियां की जा रही हैं तो हमीरपुर बोर्ड, बीएड व दूसरे प्रशिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया जाना चाहिए।

पीटीए, पैरा और एमएमसी के तहत हुई भर्तियों का विरोध

संघ ने कहा कि वे पीटीए, पैरा और एमएमसी के तहत हुई भर्तियों का विरोध करते हैं। यह सभी भर्तियां असंवैधानिक रूप से हुई हैं। साथ ही सरकार से मांग करती है कि वे भविष्य में इस तरह की भर्तियां न करें इससे प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ अन्याय होगा। भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान बेरोजगारों के साथ कई तरह के वादे व घोषणाएं की थी कि अगर यदि हमारी सरकार बन जाती है तो वे पीटीए, एमएमसी और पैरा को पूरी तरह से बाहर का रास्ता दिखाएंगे, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त नहीं किया जाएगा। अध्यक्ष सुरेश कुमार ने कहा कि सरकार भी बन गई, उसके बावजूद आज भी असंवैधानिक रूप से नियुक्तियां की जा रही हैं। यही कारण है कि  आज सरकारी स्कूलों का स्तर बेहद गिर चुका है।

संघ का कहना है कि प्रदेश में लगभग 20 से 25 हजार प्रशिक्षित बेरोजगार हैं। वर्ष 2013 में सरकार ने कुछ पोस्टें निकाली भी थी। लेकिन उसके बाद कोई भर्ती नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी अनसुनी करती है तो चुनाव का बहिष्कार करेंगे। साथ अपने मामले को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीमकोर्ट तक ले जाएंगे। उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को संघ के प्रतिनिधिनियों ने बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, कांगड़ा और कुल्लू में उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपा है। संघ सरकार से मांग करता है कि शिक्षा विभाग में करीब 10000 पद खाली चल रहे हैं। उन्हें पूरी तरह बैचवाइज और कमीशन के द्वारा भरा जाए। इससे एक तो सरकार का समय बचेगा और दूसरा ओवरएज हो चुके प्रशिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने संघ से वादा किया था कि 30 अप्रैल 2018 तक एससी, एसटी, ओबीसी का भी बैकलॉग बनता है उसे भर दिया जाएगा जो झूठा साबित हुआ। अब तक जितनी भी कैबिनेट मीटिंग हुई हैं उनमें बैकलॉग भरने के बारे में चर्चा तक नहीं हुई।

(कॉपी एडिटर : नवल)


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