55000 पास! : आखिर कैसे टूटा यूजीसी नेट परीक्षा का रिकार्ड?

यूजीसी नेट की परीक्षा में इस बार रिकॉर्ड टूटे। जहां पास करने वालों की तादाद 50 हजार पार कर गई है, वहीं रिजल्ट भी 18 दिन के भीतर आ गया। क्या इसके पीछे पेपरों की संख्या घटना वजह रही या फिर जेआरएफ अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा दो साल बढ़ाना? फारवर्ड प्रेस की रिपोर्ट :

इस बार यूजीसी-नेट की परीक्षा में करीब 55,000 उम्मीदवार पास हुए हैं। बीते साल के मुकाबले यह संख्या 17 हजार ज्यादा है। सीबीएसई ने इस बार तीन हफ्ते में परिणाम निकालकर अपना भी रिकॉर्ड तोड़ा है। यूजीसी नेट की परीक्षा 8 जुलाई को हुई थी और बोर्ड ने 31 जुलाई को नतीजे घोषित कर दिए। अब तक नतीजे आने में कम से कम तीन महीने का समय लग जाता था।

सीबीएसई सचिव अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि इस बार 11,48,235 अभ्यर्थियों में से 3929 छात्रों ने जेआरएफ जबकि 51943 छात्रों ने  राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण की। यूजीसी नेट की परीक्षा 8 जुलाई को हुई। परीक्षा 84 विषयों को लेकर हुई और इसके लिए देशभर के 91 शहर में सेंटर बनाए गए थे। त्रिपाठी के मुताबिक, नेट की परीक्षा के पेपर में भी बदलाव हुआ था। उम्मीदवारों को इस बार 3 की जगह सिर्फ 2 पेपर ही देने पड़े थे। पहला पेपर जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट का था और दूसरे पेपर उम्मीदवारों द्वारा चयनित विषय पर था। जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट में दो नंबर के 50 सवाल थे और दूसरे पेपर में दो नंबर के 100 सवाल थे। रजिस्ट्रेशन करवाने वालों में 8.59 लाख छात्र परीक्षा में बैठे जिनमें से 6.5 फीसद अभ्यर्थियों को सफलता मिली। जुलाई के तीसरे सप्ताह में बोर्ड ने आंसर-की अपलोड कर दी थी और 27 जुलाई तक आपत्तियां मांगी थीं।

क्या ज्यादा छात्रों का पास होना उम्र सीमा को बढ़ाना था? सीबीएसई ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप में शामिल होने के लिए इस बार अधिकतम आयु सीमा दो साल बढ़ाई गई थी। पहले यह सीमा 28 साल थी जबकि इस बार 30 कर दी गई थी। यूजीसी-नेट के लिए उम्मीदवारों से 6 मार्च 2018 से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख यानी 5 अप्रैल 2018 की गई थी जो एक महीने का समय अंतराल है।  यूजीसी-नेट की संशोधित स्कीम के अनुसार पहला प्रश्नपत्र 100 अंकों का था। इसमें सभी 50 ऑब्जेक्टिव प्रश्न अनिवार्य थे। ये प्रश्न सामान्य प्रकृति के रखे गए। दूसरा प्रश्न पत्र 200 अंकों का था। इसमें उम्मीदवार के चुने विषय पर 100 ऑब्जेक्टिव प्रश्न दिए गए थे।

दिल्ली के छात्र हर्ष कौशिक ने बताया कि सामान्य प्रकृति वाले सवाल काफी सरल थे जबकि ऑब्जेक्टिव सवालो में भी उनको कोई परेशानी नहीं आई। तीन पेपरों के होने का काफी दबाव रहता था जो इस बार नहीं था।


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