दलित डॉक्टर को दिल्ली के पॉश इलाके में दी गईं जाति आधारित गालियां

केजीएमयू लखनऊ के गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर विवेक कुमार दिल्ली की किसी भी एमसीडी के सबसे पढे लिखे डॉक्टरों में से एक हैं। लेकिन एक तबके के डॉक्टरों ने उनको जाति के नाम पर गालियां दीं, उनके साथ मारपीट की। पीड़ित ने शिकायत की तो सियासी रुतबे वाले जातिवादी गठजोड़ ने उनका ट्रांसफर करा दिया और वेतन रोक दिया। फारवर्ड प्रेस की खास रिपोर्ट :

“पिछले साल बीस जनवरी की बात है। सुबह के साढ़े ग्यारह बजे थे। वह अस्पताल की ओपीडी में शराब के नशे में धुत होकर आया। मेरे मुंह से यकायक निकला, शराब की इतनी तेज़ बदबू कहां से आ रही है। मेरा इतना कहना था कि मुझ पर जानलेवा हमला कर दिया गया। डॉक्टर विवेक गुप्ता ने मुझे माँ-बहन की गंदी-गंदी गालियाँ दीं। जान से मारने की धमकी दी। बुरा भला कहते मारा-पीटा। मेरे कपड़े भी फट गए, यहां तक कि मेरे खून भी निकल आया। डॉक्टर विवेक गुप्ता ने मारपीट करने के बाद बड़ा काँच का कप भी फेंककर मारा। काँच मेरे हाथ में लगा। मेरे हाथ से खून निकल आया। मुझे रोज कुछ ना कुछ बुरा भला बोलकर परेशान करता रहा।

एमसीडी- साउथ का नेहरू नगर स्थित अस्पताल जहां डॉक्टर विवेक कुमार को ट्रांसफर किया गया

30 अप्रैल को भी मुझ पर यकायक विवेक गुप्ता ने हमला किया। गंदी गालियाँ दी गईं। अगले ही दिन मुझे सस्पेंशन लेटर थमा दिया गया। आधार बनाया गया मैं लेट आता हूं…। ओपीडी में शराब के नशे में धुत्त होकर कैसे कोई डॉक्टर आ सकता है जबकि मरीज खुद की जान बचाने के लिए वहां डॉक्टरों को देवता समझकर आते हैं। डॉ सेनगुप्ता और डॉ ममता ने कहा मेरी कोई गलती नहीं है। डॉ ममता ने 4 बार बोला, आपकी (डॉ विवेक कुमार की) बिल्कुल भी गलती नहीं है। वह बोलती रहीं कि डॉ विवेक गुप्ता शराब के नशे में धुत हैं, ‘ही इज नाट इन हिज सेंस।‘ ये खुद डॉ ममता के शब्द हैं- रिकॉर्डेड है। लेकिन बाद में डॉ ममता ने सारी गलती मेरी ही बता दी।”

ये पूरा मजमून किसी किस्से का हिस्सा नहीं, हकीकत है एमसीडी अस्पताल- बल्कि सबसे पॉश इलाके साउथ दिल्ली म्यूनिसपल कॉरपोरशन की, यहां के एक दंबग डॉक्टर की। जिसका पूरा ब्यौरा एक शिकायत पत्र में पीड़ित मेडिकल ऑफिसर ने सरकार को लिखा है। और ये पीड़ित मेडिकल ऑफिसर जिसे प्रताड़ित किया गया है, वह कोई और नहीं देश के नामी संस्थान केजीएमयू लखनऊ के गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर विवेक कुमार हैं। बताते चलें कि डॉक्टर विवेक कुमार एमबीबीएस ही नहीं बल्कि पीडीऐट्रिक्स (बाल चिकत्सा विज्ञान) में भी पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं। जाहिर है उनके साथ साउथ एमसीडी में काम करने वाले अधिकांश डाक्टरों को इतनी अकादमिक और मेडिकल शिक्षा प्राप्त नहीं है। विवेक कुमार एमबीबीएस, स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर के तौर पर कार्यरत हैं।

डॉक्टर विवेक कुमार का कुसूर सिर्फ इतना है कि वह दलित हैं और साउथ के एमसीडी अस्पताल में उन गैर-अछूतों के साथ बड़े मेडिकल अफसरों में बराबरी पर (बल्कि उनसे बीस बैठते हैं) खड़े हुए हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़ित मेडिकल अफसर विभाग से बड़े अधिकारियों और दिल्ली में केजरीवाल सरकार के एससी एसटी कल्याण मामलों के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम से मिले लेकिन हर जगह उनकी शिकायत नक्कारखाने की तूती बनकर रह गई।

कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने डॉक्टर विवेक कुमार के उत्पीड़न को लेकर विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। वह दिल्ली सरकार में एससी एसटी मामलों के कल्याण मंत्री हैं

हालांकि इस मामले में राजेंद्र पाल गौतम से जब फारवर्ड प्रेस ने संपर्क किया तो उन्होंने जानकारी दी कि पूरे मामले की जांच के लिए उन्होंने विजिलेंस आयुक्त को निष्पक्ष जांच करने को कहा है, साथ ही एमसीडी को भी पत्र लिखा जा चुका है। एक दो दिन के भीतर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई तेज हो जाएगी। राजेंद्र गौतम ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि दलित मेडिकल ऑफिसर को न्याय मिले।

ऊंची जातियों का कोकस

पीड़ित मेडिकल ऑफिसर ने कहा है कि बात सिर्फ डॉक्टर विवेक गुप्ता की ही नहीं। डॉक्टर कुमार के मुताबिक, साउथ एमसीडी में कुछ ऑफिसर आरक्षित वर्ग के कर्मियों से भेदभाव वाला बर्ताव करते हैं। उन्होंने सरकार को लिखा कि “इसी विवेक गुप्ता की तरह डॉक्टर राजेश भंडारी हैं जिन्होंने मेरे साथ भेदभाव और उत्पीड़न किया और मेरे आरक्षित वर्ग से होने के चलते जितना उनको आता था उतना बुरा भला कहा। हर रोज मुझे परेशान किया जाने लगा। राजेश मुझे बहुत बार जातिसूचक शब्द कहकर भी अपमानित करते रहे। उन्होंने मुझसे कहा कि नीची जाति के और भैंस-बकरी चराने का काम करने वाले गंवार एमसीडी में ऑफिसर बनकर आ गए हैं। आ गए हैं तो हम तुम्हें यहां रहने नहीं देंगे। ये डॉ राजेश भंडारी के शब्द थे जो कि मेरे समकक्ष ही मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात हैं साउथ एमसीडी में।

स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई डॉक्टर विवेक कुमार की चिठ्ठी

मंत्री से मिले डॉक्टर विवेक कुमार

दिल्ली के एससी-एसटी कल्याण मामलों के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम से मिलकर डॉक्टर विवेक कुमार ने बताया कि “जब रोज-रोज के भेदभाव और उत्पीड़न से वह तंग आ गए तो उन्होंने सितंबर 2017 एडिशनल डीएचए-एसडीएमसी को लिखित शिकायत दी। लेकिन इस शिकायत पर कोई भी कार्रवाई नहीं की। उल्टा एडिशनल डीएचए पीके दास धमकाया कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शिकायत देने की। डॉक्टर दास ने कहा कि डॉक्टर राजेश भंडारी हमारे खास मित्र हैं और तुमसे कई साल सीनियर है साउथ एमसीडी में। डॉक्टर विवेक ने बताया कि इसके बाद तो डॉ भंडारी ने जीना मुहाल कर दिया। रोज मुझे धमकाते और कहते मेरी शिकायत करने की कोशिश की है तुमने, अब मैं देखता हूं कि तुम साउथ एमसीडी में कैसे रह पाते हो। तुम्हें यहां से जाना पड़ेगा और अगर नहीं गए तो मैं तुम्हें यहां से निकलवा दूंगा। मैंने उनसे कहा कि मैं यूपीएससी दिल्ली से सेलेक्ट होकर परमानेन्ट पोस्ट पर आया हूँ और संवैधानिक तरीके से आया हूँ। आरक्षण की व्यवस्था तो संविधान में है। इस पर वो बोले कि मैं ऐसे संविधान को नहीं मानता हूँ।”

विभागीय कार्यवाही के दौरान डॉक्टर विवेक कुमार के साथ काम करने वाले ज्यादातर डॉक्टर अब पूरी तरह से पलट गए हैं। वह डॉक्टर सेन हों, डॉक्टर ममता हों या फिर उनके अन्य साथी। जाहिर है यह एमसीडी साउथ में ऊंची जातियों के डॉक्टरों का ऐसा गठजोड़ है जिससे पार पाना आसान नहीं है। डॉक्टर विवेक कुमार ने कहीं सुनवाई ना होने पर निचली जातियों के स्टाफ और डॉक्टरों के साथ होने वाले सुलूक को लेकर ऑडियो रिकॉर्डिंग करनी शुरू की। अब यही रिकॉर्डिंग आरोपी डॉक्टरों के गठजोड़ के लिए गले की फांस बनने वाला है।

उल्टे पीड़ित का किया ट्रांसफर, सैलरी रोकी

दिल्ली सरकार के सूत्रों ने बताया कि इस पूरे मामले में अक्टूबर 2017 में एडिशनल कमिश्नर हेल्थ एसडीएमसी और कमिश्नर एसडीएमसी को लिखित में शिकायत दी गई। साथ ही मेयर कमलजीत सेरावत को भी मामले से वाकिफ कराया गया। इसके बाद एक जांच कमेटी बिठा दी गई। कमेटी में डॉ सीता भागी, डॉ बरूआ और एक डॉ भारती को रखा गया। इस पर डॉक्टर विवेक कुमार का कहना है कि सच्चाई ये है कि इनमें डॉक्टर बरूआ डॉक्टर भंडारी के खास मित्र हैं। डॉक्टर विवेक कुमार कहते हैं कि उनको कमेटी ने बुलाया और सीधे शिकायत वापस लेने के लिए कहा गया। जिसके लिए मैंने इनकार कर दिया। इस पर तुरंत मेरा ट्रान्सफर टीबी अस्पताल नेहरू नगर में कर दिया गया। लेकिन आरोपी डॉक्टर भंडारी वहीं अपनी जगह बने रहे। इसके बाद डॉक्टर भंडारी ने मुझसे कहा अभी तो तुम्हारा ट्रान्सफर ही कराया है तुम्हें यहाँ से सस्पेंड और फिर निकलवा कर ही दम लूंगा। डॉक्टर विवेक कुमार ने बताया कि इस पूरे मामले में उनकी 8 महीने की सैलरी भी रोककर रखी गई।


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें 

 

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार 

About The Author

One Response

  1. Er. Gautam kumar Reply

Reply