छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद छुट्टी पर भेजे गए मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति आद्या पांडे

मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति आद्या पांडे के खिलाफ छात्र आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही नियमित रुप से पठन-पाठन व परीक्षाएं होती हैं। बीते 31 मई से धरने पर बैठे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया जिसमें आधा दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए। अनुपमा सिंह की खबर :

पिछले दो महीने से मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति आद्या पांडे के खिलाफ छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते सोमवार को छात्रों ने जब विरोध मार्च निकाला तब पुलिस ने उनके उपर लाठीचार्ज किया। इस घटना में आधा दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गये। छात्रों के विरोध को देखते हुए इम्फाल में धारा 144 लगा दी गई है। इससे पहले रविवार को उपमुख्यमंत्री वाई. जॉय कुमार ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने की अपील की थी ताकि विश्वविद्यालय में पठन-पाठन नियमित हो सके।

मणिपुर के उपमुख्यमंत्री वाई. जॉय कुमार

पूर्व में मणिपुर के डीजीपी रह चुके उपमुख्यमंत्री वाई. जॉय कुमार ने बताया यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में चल रही बाधा को दूर करने के लिए मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा सकारात्मक कदम उठाते हुए मौजूदा कुलपति आद्या प्रसाद पांडे को तीस दिनों के लिए छुट्टी पर भेज दिया गया है। उनकी जगह वरिष्ठ प्रोफेसर डब्ल्यू. विश्वनाथ को प्रभार सौंपा गया है।

कुलपति आद्या पांडे को हटाने की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस ने किया लाठाीचार्ज

वहीं बीते 31 मई 2018 से धरने पर बैठे छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के बहुत सारे पद खाली हैं और इसकी वजह से पढ़ाई का स्तर बहुत गिर चुका है। उनका कहना है कि न तो समय से परीक्षा होती है ना ही समय से परिणाम घोषित किये जाते हैं। लम्बे समय से उनकी मांगों पर कोई सुनवाई ना होने पर उन्होंने बंद का आहवान किया।गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में छात्रों के समर्थन में 28 विभागों के अध्यक्ष और अलग अलग पांच संकाय अध्यक्षों (डीन)  ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सभी कुलपति आद्या पांडे को हटाये जाने की मांग कर रहे हैं।

इसी मांग को लेकर सोमवार को इम्फाल में विरोध मार्च किया गया। इस दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किये जाने पर छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक विरोध मार्च कर रहे थे। लेकिन पुलिस ने विरोध को दबाने के लिए निहत्थे छात्रों पर लाठीचार्ज किया। वहीं दूसरी ओर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि आक्रोशित छात्रों को नियंत्रित करने के लिए मजबूरी में लाठीचार्ज करना पड़ा। जबकि प्रदेश भाजपा के नेताओं का कहना है कि उनका विरोध मार्च से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

(कॉपी एडिटर : एफपी डेस्क)


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