विभाजन से लेकर इक्कीसवीं सदी के भारत के चश्मदीद रहे कुलदीप नैय्यर का निधन

भारत-पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश करने वाले प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक कुलदीप नैय्यर अपने आखिरी दनों तक अपनी सेवाएं पत्रकारिता जगत को देते रहे। 23 अगस्त 2018 की सुबह उनका निधन हो गया। उनके बारे में बता रहे हैं प्रेम बरेलवी :

कुलदीप नैय्यर (जन्म : 14 अगस्त 1923, निधन : 23 अगस्त 2018)

ताशकंद समझौते के चश्मदीद और भारतीय पत्रकारिता के पुरोधा वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर का निधन 23 अगस्त 2018 को दल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया है। 95 वर्षीय नैय्यर पिछले तीन दिनों से एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर किया गया।

पाकिस्तान के हिस्से वाले पंजाब के सियालकोट में 14 अगस्त 1923 को जन्मे कुलदीप नैय्यर को भारत और पाकिस्तान के बीच की शांति स्थापित करने की कोशिश करने वाली एक अहम शख्सियत के रूप में देखा जाता रहा है। उन्होंने हमेशा भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बहाल करने की कोशिश की और अपने आखिरी दनों भी इस कोशिश को जारी रखा। ताशकंद में भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे समझौते के वे चश्मदीद रहे।

1984 में हुए सिक्ख दंगे के दौरान मारे गये लोगों के लिए समुचित मुआवजे की मांग को लेकर दिल्ली में कैंडिल मार्च का नेतृत्व करते कुलदीप नैय्यर (फोटो साभार : द हिन्दू, नवंबर 2011)

पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले कुलदीप नैय्यर ने अनेक किताबें लिखी हैं। इनमें ‘द डे लुक्स ओल्ड’ और ‘बियांड द लाइंस’ (एक जिंदगी काफी नहीं) खासी चर्चित रहीं। इसके अलावा ‘बिटवीन द लाइंस, ‘वाल एट वाघा, ‘डिस्टेंट नेवर : ए टेल ऑफ द सब कान्टिनेंट’, इंडिया-पाकिस्तान रिलेशनशिप’, ‘इंडिया हाउस’ और ‘इंडिया आफ्टर नेहरू’ जैसी किताबें भी उन्होंने लिखीं।

पत्रकारिता जगत में उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके जीवनकाल में ही उनके नाम से ‘कुलदीप नैय्यर पत्रकारिता अवार्ड’ दया जाने लगा। एक उर्दू रिपोर्टर के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाले नैय्यर 25 वर्षों के ‘द दाइम्स’ लंदन के भी संवाददाता रहे कुलदीप नैय्यर को सन् 1990 में उन्हें ब्रिटेन में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें 1996 में भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र संघ में भेजे गये प्रतिनिधि मण्डल का सदस्य बनाया था। वे राज्यसभा के मनोनीत सांसद भी रहे।

उर्दू से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले नैय्यर के लेख 14 भाषाओं में डेक्कन हेराल्ड (बेंगलुरु), द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान जैसे विश्व के 80 से अधिक प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।

 

नैय्यर यूएनआई, पीआईबी और इंडियन एक्सप्रेस के साथ भी लंबे समय तक जुड़े रहने वाले नैय्यर समाचार पत्र द स्टैट्समैन के संपादक भी रहे। एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और शांति कार्यकर्ता के तौर पर कार्य करने वाले नैय्यर आपातकाल के दौरान जेल भी गये।  2015 में उन्हें पत्रकारिता में आजीवन उपलब्धि के लिए ‘रामनाथ गोयनका स्मृ़ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल के दौरान वे भारत सरकार के प्रेस सूचना सलाहकार के पद पर नियुक्त हुए और लंबे समय तक इस पद पर अपनी सेवाएं देते रहे।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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