तिरंगा के बजाय भगवा झंडा फहराने से रोका तो आदिवासी प्रोफेसर पर देशद्रोह का आरोप

हिंदुत्ववादी संगठनों के लिए तिरंगा का कोई महत्व नहीं है। राजस्थान के सिरोही जिले में जब एक आदिवासी प्रोफेसर ने भगवा झंडा फहराये जाने का विरोध किया तब उलटे उन्हें ही देशद्रोही कह उत्पीड़न किया जा रहा है। फारवर्ड प्रेस की रिपोर्ट :

राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड में पदस्थापित आदिवासी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष मीणा को जिलाधिकारी द्वारा राष्ट्रद्रोह, सरकार विरोधी एवं समाज विरोधी का आरोप लगाकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके खिलाफ आरएसएस से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने शिकायत दर्ज करायी थी। जबकि असलियत यह है कि पीड़ित प्रोफेसर ने अपने कॉलेज में भगवा झंडा फहराये जाने का सोशल मीडिया पर विरोध व्यक्त किया था।

राजस्थान के मीणा आदिवासी समुदाय से आने वाले डॉ. आशुतोष मीणा आबूरोड के राजकीय पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। मूलतः भरतपुर जिले की नदबई तहसील के पीली गांव के निवासी डॉ. मीणा का चयन राजस्थान लोकसेवा आयोग से 2006 में हुआ था। डॉ. मीणा ने बताया कि बीते दो वर्ष 2016 से 2018 के बीच उनका पांच बार तबादला किया गया है और साजिश के तहत उन्हें कई बार मानसिक तौर पर प्रताड़ित भी किया गया है। उन्होंने स्थानीय आरएसएस से जुड़े नेताओं से हमले की आशंका भी जतायी।

क्या है मामला?

डॉ. मीणा फेसबुक पर आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों के मुद्दे पर लिखते रहते हैं। यहीं कारण है कि वह स्थानीय आरएसएस से जुड़े नेताओं के आंख की किरकिरी बने हुए हैं।

पीड़ित प्रोफेसर डॉ. आशुतोष मीणा

डॉ. मीणा के अनुसार, 12 दिसंबर, 2017 को राजकीय महाविद्यालय आबूरोड में आरएसएस से जुड़े विश्व हिंदू परिषद और हिंदू शौर्य सेना संगठन व बजरंग दल प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह रजगुरु के नेतृत्व में कुछ लोग हाथ में भगवा झंडा लेकर नारे लगाते हुए ज़बर्दस्ती घुस गए और तिरंगा के स्थान पर भगवा झंडा फहरा दिया, लेकिन ज़िला प्रशासन व कॉलेज प्रशासन ने इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं की। डॉ. मीणा उस दिन अवकाश पर थे, लेकिन इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने इसे असंवैधानिक कहा और फेसबुक पर तीखी प्रतिक्रिया की। उनका पोस्ट सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ।

भगवा झंडा फहराने का विरोध करने पर विहिप ने दी धमकी

इसके लिए डॉ. मीणा को दोषी मानते हुए उसी शाम को 6 बजे विश्व हिंदू परिषद के एक स्थानीय नेता ने फ़ोन पर धमकी दी और नतीजा भुगतने को तैयार रहने को कहा। पहले से ही निशाने पर चल रहे डॉ. मीणा के पीछे पूरा कट्टरपंथी खेमा पड़ गया, भगवा झंडा फहराने की घटना के चौथे दिन 16 दिसंबर, 2017 को सोशल मीडिया (फेसबुक) पर हिंदूवादी विचारधारा से जुड़े कुछ लोगों ने डॉ. मीणा को देशद्रोही क़हा और धमकी दी कि “मीणा राडार पर है, लाठियों में तेल पिलाकर पीटेंगे, आबूरोड कॉलेज को जेएनयू नहीं बनने देंगे।”

पहले कार्रवाई का आदेश फिर कारण बताओ नोटिस

इसके बाद जांच के नाम पर दमन चक्र प्रारंभ हुआ। डॉ. मीणा के खिलाफ 28 दिसंबर, 2017 को तत्कालीन जिलाधिकारी, संदेश नायक, सिरोही के द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें लिखा गया था, “आप श्री आशुतोष मीणा, व्याख्याता, राजकीय महाविद्यालय, आबूरोड के पद पर कार्यरत रहते हुए सोशियल साइट (फेसबुक) पर दिनांक : 10-9-2017 से 20-9-2017 के मध्य अलग-अलग दिनांकों में राष्ट्र विरोधी एवं सरकार के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणियां की गई हैं, जो कि समाज विरोधी एवं धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली हैं। आप लोकसेवक होने के नाते ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए। आप इस संबंध में अपनी तथ्यात्मक टिप्पणी देवें। आप लोकसेवक होने के नाते आपका यह कृत्य राजस्थान सिविल सेवायें (आचरण) नियम, 1971 के नियम 4 व 11 के अंतर्गत दुराचरण की श्रेणी में आता है। अत: इस हेतु आप दोषी होने से आपको इस आरोप से आरोपित किया जाता है।”

बहुजन विमर्श को विस्तार देतीं फारवर्ड प्रेस की पुस्तकें

उक्त आरोप पत्र में राजस्थान सिविल सेवायें (आचरण) नियम, 1971 के नियम-24 के उल्लंघन के संदर्भ में भी कार्यवाही करने की बात कही गई थी। सिरोही जिलाधिकारी के इस आरोप पत्र में डॉ. मीणा को 15 दिन के भीतर लिखित अपील करने के लिए कहा गया था।

वहीं दूसरी तरफ सिरोही कलक्टर ने उक्त पत्र के पहले एक पत्र के माध्यम से कॉलेज एजुकेशन कमिश्नर को डॉ. मीणा के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की अनुशंसा भी की। कलेक्टर द्वारा सख्त कार्यवाही अनुशंसा पर कमिश्नर ने डॉ. मीणा के विरुद्ध राजकीय पीजी महाविद्यालय सिरोही के प्राचार्य के.के. शर्मा को जाँच अधिकारी नियुक्त किया और कार्यवाही भी शुरु हो गयी।

डॉ. मीणा के खिलाफ आरएसएस से जुड़े और नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष सुरेश कोठारी के द्वारा 2 जनवरी, 2018 को शिकायत दर्ज करायी गयी। सुरेश कोठारी ने डॉ. मीणा के ख़िलाफ़ जिला कलेक्टर सिरोही को नगर सुधार न्यास के लेटरहेड पर पत्र लिखा कि इस प्रोफ़ेसर पर कार्यवाही की जाय, क्योंकि मीणा की सोशल मीडिया पर समाज विरोधी व धर्मविरोधी टिप्पणियाें से माहौल नकारात्मक हो रहा है।

यहां यह तथ्य ध्यान देने योग्य है कि जिला कलेक्टर ने सख़्त कार्यवाही की सिफ़ारिश बिना जांच के पहले ही विभाग को कर दी और बाद में डॉ. मीणा से जवाब मांगा।

जवाब से जिलाधिकारी संतुष्ट, जांच रोकने की बात बेमानी

डॉ. मीणा ने 18 जनवरी, 2018 को लिखित जवाब प्रस्तुत किया, जिसमें डॉ. मीणा ने कहा कि मैं संविधान में विश्वास करता हूं और फेसबुक पर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है, जो देश विराधी, समाज विरोधी, सरकार विरोधी या धर्म विरोधी हो। साथ ही 10 सितंबर, 2017 से 20 सितंबर, 2017 के बीच के फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी प्रस्तुत किये। उसके बाद कलेक्टर ने 7 फरवरी, 2018 को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए भी बुलाया और सुनवाई के बाद संतुष्ट होते हुए जांच प्रक्रिया को रोक दिया।

फेसबुक पर डॉ. आशुतोष मीणा के द्वारा जारी पोस्ट के स्क्रीन शाॅट्स

एक तरफ जिला कलेक्टर ने अपने स्तर पर जांच रोकने की बात कही और दूसरी तरफ कॉलेज एजूकेशन कमिश्नर को डॉ. मीणा के विरुद्ध कार्यवाही की अनुशंसा को वापस लेने के लिए कोई पहल नहीं की, फलतः कमिश्नर ने कलेक्टर के अनुशंसा पर कार्यवाही जारी रखी।

डॉ. मीणा का हो रहा है उत्पीड़न जारी, दो साल में पांच बार ट्रांसफर

डॉ. मीणा ने फारवर्ड प्रेस से बातचीत में कहा कि, “मैं आबूरोड में पिछले 10 साल से कार्यरत हूं। मेरे माता-पिता, पत्‍नी और बच्चे आबूरोड में ही रहते हैं। आबूरोड से मेरी प्रतिनियुक्ति बायतू कर दी गई। फिर बायतू से मेरा तबादला डीडवाना कर दिया गया। लेकिन इन तबादलों में सबसे बड़ी कमी यह है कि मुझे जहां से हटाया जा रहा है, उस पद को रिक्त कर दिया जा रहा है और उस पर नई भर्ती की गई। वहीं दूसरी तरफ जिस कॉलेज में मेरी नियुक्ति हो रही है वहां कोई पद रिक्त नहीं है, वहां पर पहले से ही और प्रोफेसर हैं। वे बताते हैं कि इससे पहले मेरा तबादला कोटडा और उससे पहले सिरोही में किया गया, लेकिन यहां भी कोई पद रिक्त नहीं था। इस प्रकार के बारम्बार अनावश्यक तबादले अन्यायपूर्ण है एवं मुझे दुर्भावनावश प्रताड़ित करने के उद्देश्य से किया गया।”

डॉ. मीणा कहते हैं कि फेसबुक तो सिर्फ बहाना था, मुझे साजिश के तहत फंसाया गया है। यह विचारधारा का संघर्ष है। राजस्थान की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दो शिक्षक संगठन सक्रिय हैं, रुक्टा (आरयूसीटीए) और रुक्टा राष्ट्रीय, जिसे हिंदी में राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ नाम से जानते हैं। मैं रुक्टा में काफी सक्रिय हूं। यह कुछ लोगों को बर्दाश्त नहीं है। 16 सितम्बर 2017 को मुझे रुक्टा का सिरोही जिले का जिलाध्यक्ष चुना गया। इसके बाद से ही मैं एकदम से इनके निशाने पर हूं, मुझे बार-बार निशाना बनाया जाता है, प्रताड़ित किया जाता है और मारने की कोशिश भी की गयी। दुर्भावनापूर्ण तरीके से मेरे खिलाफ हर प्रकार की कार्यवाही की जा रही है।

इस मामले का रोचक पहलू यह है कि जब इस संबंध में फारवर्ड प्रेस ने मामले की जांच कर रहे राजकीय पीजी महाविद्यालय सिरोही के प्राचार्य के.के शर्मा को फोन कर इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि “मैं डॉ. आशुतोष मीणा नाम के किसी आदमी को नहीं जानता हूं। इस नाम का कोई आदमी मेरे कॉलेज में कार्यरत नहीं है।” कलक्टर से शिकायत के बारे में सुरेश कोठारी ने कहा कि “मुझे इस बारे में कुछ याद नहीं है। फोन पर मैं किसी अनजान आदमी से बात नहीं करता। सामने आओगे तो बताउंगा।” ज्ञातव्य है कि शर्मा विभिन्न  हिंदुत्वादी संगठनों से जुड़े रहे हैं।

सिरोही के तत्कालीन जिला कलक्टर संदेश नायक, वर्तमान जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल एवं राजस्थान कॉलेज एजुकेशन कमिश्नर आशुतोष पेडनेकर से संपर्क नहीं हो सका।

(इनपुट : भंवर मेघवंशी, कॉपी संपादन : एफपी डेस्क/रंजन)


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